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बल्लेबाजी के 'विराट' कोहली कप्तानी में सामान्य, क्या मिलनी चाहिए उन्हें विश्व कप की कमान?

आईपीएल में कप्तान के तौर पर जीत का प्रतिशत सिर्फ 46.50 रहा

Richa Gupta
ANALYST
Timeless

विराट कोहली दुनिया के सबसे बेहतरीन बल्लेबाजों की सूची में शुमार हैं। तो क्या वह बेहतरीन कप्तान भी साबित हुए हैं? इसका जवाब लगभग लोगों के सामने आ चुका है। इंडियन प्रीमियर लीग का 12वां संस्करण शुरू होने से पहले बड़ी-बड़ी बातें करने वाले रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के कप्तान कोहली शुरुआती चार मैचों में से टीम को एक जीत भी हासिल न करवा पाए। आरसीबी के सबसे फिसड्डी टीम साबित होने के बाद सवाल उठना लाजिमी है कि क्या अब भी विराट कोहली पर भरोसा करना चाहिए या उनसे कप्तानी छील लेनी चाहिए। इसको लेकर कई पूर्व खिलाड़ियों के साथ क्रिकेट प्रशंसकों में मतभेद है। हालांकि, सबसे बड़ा प्रश्न यह खड़ा हो रहा है कि क्या कोहली विश्वकप जैसे महत्वपूर्ण आयोजन में टीम इंडिया की कप्तानी के लिए उपयुक्त रहेंगे या कमान किसी और को सौंप दी जानी चाहिए। 

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गंभीर ने पहले ही चेता दिया था

भारत के प्रशंसकों ने तो सीधे तौर पर कह दिया है कि जो आरसीबी को आठ साल से आईपीएल नहीं जिता पा रहा है, वो विश्वकप कैसे जिता पाएगा। प्रशंसकों का यह सवाल चिंतनीय है। कुछ दिन पहले इस तरह का प्रश्न भारतीय टीम के पूर्व सलामी बल्लेबाज गौतम गंभीर ने उठाया था। उन्होंने कहा था कि विराट कोहली दिमाग से कप्तानी नहीं कर पाते हैं। उन्हें किस्मतवाला कहना उचित होगा। तभी तो वह आठ साल से आरसीबी को आईपीएल ट्रॉफी न हासिल करवा पाने के बावजूद टीम के कप्तान बने हुए हैं। 

50 ओवर और टी-20 फॉर्मेट के पिछले सारे मैच हारे

यह तो हुई जुबानी जंग। अब अगर आंकड़ों पर गौर करें तो लीग में कप्तान के तौर पर सबसे खराब प्रदर्शन विराट कोहली का रहा है। उनकी अगुआई में टीम की जीत का प्रतिशत 46.50 रहा। आरसीबी के कप्तान के तौर पर उन्होंने पिछले आठ मार्च से अब तक लगातार सात मैच गंवाए हैं। अगर विराट कोहली के हालिया प्रदर्शन पर गौर करें तो उन्होंने दो अंतिम अंतरराष्ट्रीय टी-20 मैच हारे। लगातार तीन एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय मैच ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ गंवाए। आईपीएल के शुरुआत चारों मुकाबले हारे। 

80.2 करोड़ खर्च करने के बावूजद फिसड्डी रह गई टीम

विराट की कप्तानी में जीत के लिए आरसीबी तरस रही है। टूर्नामेंट के 12वें संस्करण के लिए आरसीबी फ्रैंचाइजी ने अपनी 24 सदस्यीय टीम बनाने के लिए 80.2 करोड़ रुपये खर्च किए। 2019 की नीलामी से पहले 14 खिलाड़ियों को रिटेन किया गया था। इसके बावजूद इतना शर्मनाक प्रदर्शन आरसीबी का रहा। लगातार हार पर टीम के गेंदबाजी कोच आशीष नेहरा ने कहा था कि आप मैच तभी जीत सकते हैं, जब हाथ आए हर छोटे-बड़े मौकों का फायदा उठाया जाए। अब ज्यादा वक्त नहीं है क्योंकि अब सिर्फ 14 मैच ही बाकी रह गए हैं। तो आगे कोहली की कप्तानी चमकेगी या नहीं यह तो वक्त ही बता पाएगा। 

क्या धोनी के बिना कुछ नहीं विराट

सोशल मीडिया पर लोग फ्रैंचाइजी से हाथ जोड़कर विराट से कप्तानी छीनने की गुजारिश कर रहे हैं। ट्विपल्स का कहना है कि विराट कोहली सिर्फ खुद की पब्लिसिटी करना चाहते हैं। उन्हें टीम पर भरोसा नहीं है। इन ट्वीट्स से अंदाजा लग रहा है कि बैंगलोर के फैंस कितने निराश हैं। उधर, क्रिकेट के जानकार कहते हैं कि महेंद्र सिंह धोनी की गैरहाजिरी में विराट कोहली कप्तानी सामान्य हो जाती है। कई मौकों पर देखा गया है कि जब मैच फंसता है तो विराट धोनी से ही सलाह मशविरा करते हैं। हालांकि, आईपीएल में वह अकेले हैं। इस वजह से वो बस एक सामान्य कप्तान ही रह गए हैं। क्रिकेट जानकार कहते हैं कि विश्वकप के लिए विराट से कप्तानी छीनकर महेंद्र सिंह धोनी को दे देनी चाहिए। अगर वह राजी नहीं होते हैं तो दूसरे विकल्प के तौर पर रोहित शर्मा ठीक रहेंगे क्योंकि उन्होंने भी धोनी की तरह तीन बार आईपीएल की ट्रॉफी जीती है।


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Published 04 Apr 2019, 22:03 IST