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वर्ल्ड कप 2018 : क्रोएशिया को हराकर 20 साल बाद चैंपियन बना फ्रांस

क्रोएशिया को 4-2 से दी मात, 1974 के बाद विश्व कप में पहला अवसर था जब फाइनल में मध्यांतर से पहले तीन गोल हुए।

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संदीप भूषण
Updated 21 Sep 2018, 20:22 IST

वर्ल्ड कप 2018 के फाइनल मुकाबले में अपनी काबिलियत और भाग्य के दम पर फ्रांस ने रविवार को क्रोएशिया को 4-2 से हराकर दूसरी बार विश्व चैंपियन का ताज हासिल किया। फ्रांस ने मैच के 18वें मिनट में ही मारियो मैंडजुकिच के आत्मघाती गोल से बढ़त बना ली थी। इसके बाद 38वें मिनट में पेनल्टी पर एंटोनी ग्रीजमैन के गोल ने क्रोएशिया को मैच से दूर कर दिया। 59वें मिनट में पॉल पोग्बा और फिर 65वें मिनट में काइलियन एमबेपे के गोल ने क्रोएशिया के विश्व कप जीतने के सपने को चूर-चूर कर दिया। हालांकि पहले हाफ में क्रोएशिया ने बेहतरीन खेल का प्रदर्शन किया और उसके लिए 28वें मिनट में इवान पेरिसिच ने गोल दागा। दूसरे हाफ में मैच के 69वें मिनट में गोल दाग कर क्रोएशिया की उम्मीद जगाई लेकिन उनके इस गोल से सिर्फ हार का अंतर ही कम हो पाया। फ्रांस इससे पहले 1998 में भी विश्व विजेता बनी थी। तब उस टीम के कप्तान डिडयर डेसचैंप्स थे जो इस वक्त टीम के कोच हैं।

पहले हाफ में क्रोएशिया ने बेहतर प्रदर्शन किया

क्रोएशिया पहली बार विश्व कप के फाइनल में पहुंचा था। महज 40 लाख की आबादी वाले इस देश के खिलाड़ियों ने अपनी तरफ से जीत के लिए हर संभव प्रयास किए। हालांकि अंत में जालटको डालिच की टीम को उप विजेता बनकर ही संतोष करना पड़ा। इस मैच के दौरान क्रोएशियाई खिलाड़ियों के कौशल और चपलता ने दर्शकों का दिल जीत लिया। दोनों टीमें 4-2-3-1 के संयोजन के साथ मैदान पर उतरीं। क्रोएशिया ने इंग्लैंड के खिलाफ जीत दर्ज करने वाली शुरुआती एकादश में बदलाव नहीं किया। हालांकि फ्रांस ने  इस मैच में अपनी रक्षापंक्ति को मजबात करने पर ध्यान लगाया। क्रोएशिया ने पहले हाफ में न सिर्फ गेंद पर अधिक समय तक कब्जा किया बल्कि अपने आक्रमण में भी कोई कमी नहीं की। मैच के दौरान क्रोएशियाई खिलाड़ियों पर थकान हावी हो रहा था। उनके पिछले कुछ मैचों में अतिरिक्त समय में खेलने का भुगतान आज टीम को हार से करना पड़ा।

फ्रांस को पहला मौका 18वें मिनट में मिला। उसे दाईं तरफ बॉक्स के करीब फ्री किक मिला। ग्रीजमैन ने मौके का फायदा उठाते हुए दमदार शॉट मारा। गेंद गोलकीपर डेनियल सुबासित की तरफ बढ़ रहा था। तभी मैंडजुकिच ने उसे रोकने के प्रयास में उस पर हेडर लगा दिया और गेंद सीधे गोल में समा गई। क्रोएशिया की गलती से फ्रांस ने शुरुआत  में ही एक गोल की बढ़त बना ली। इस गोल ने क्रोएशियाई खिलाड़ियों का मनोबल तोड़ दिया। इस तरह से मैंडजुकिच विश्व कप फाइनल में आत्मघाती गोल करने वाले पहले खिलाड़ी बन गए। यह वर्तमान विश्व कप का रेकार्ड 12वां आत्मघाती गोल है।

इसकी भरपाई पेरिसिच ने जल्दी ही की। उन्होंने मैच के 28वें मिनट में गोल कर टीम के साथ ही मैंडुकिच में जोश भर दिया। पेरिसिच का यह गोल दर्शनीय था। क्रोएशिया को फ्री किक मिला और फ्रांस के खिलाड़ी इसे रोकने मे पूरी तरह से नाकाम रहे। इसके तुरंत बाद पेरिसिच की गलती से फ्रांस को पेनल्टी मिला गया। दरअसल, बॉक्स के भीतर एक गोल बचाने के चक्कर में  गेंद उनके हाथ से लगी। रेफरी ने वीएआर की मदद ली और फ्रांस को पेनल्टी मिला। फ्रांस टीम के स्टार ग्रीजमैन ने इस बार गेंद को गोल पोस्ट में पहुंचाने में कोई गलती नहीं की। पेनल्टी पर दागे गए शॉट को क्रोएशिया के गोलकीपर भांप ही नहीं पाए और गेंद नेट में समा गई। इस तरह पहले हाफ तक फ्रांस ने 2-1 से बढ़त बना ली थी। यह  1974 के बाद पहला मौका था जब विश्व कप के फाइनल में मध्यांतर से पहले तीन गोल दागे गए हों।

दूसरे हाफ में हावी रहा फ्रांस

क्रोएशिया ने दूसरे हाफ में भी अपनी पुरानी रणनीति पर ही चलना ठीक समझा और लगातार हमले जारी रखे। मैच के 48वें मिनट में लुका मोड्रिच ने एंटी रेबिच को गेंद थमाई। उन्होंने गोल पर बेहतरीन शॉट लगाया लेकिन लोरिस ने बड़ी खूबसूरती से उसे बचा लिया। मैच के 59वें मिनट में फ्रांस के तेज-तर्रार एमबेपे दाएं छोर से गेंद लेकर आगे बढ़े। उन्होंने गेंद पोग्बा तक पहुंचाई। हालांकि पोग्बा के शॉट को विडा ने रोक लिया। रिबाउंड पर गेंद फिर से पोग्वा के पास पहुंची और उन्होंने इस बार क्रोएशिया के खिलाड़ियों को कोई मौका नहीं दिया। उनका दनदनाता शॉट सीधे नेट में समा गया। इसके साथ ही फ्रांस की टीम 3-1 से आगे हो गई। इसके कुछ देर बाद ही एमबेपे ने एक गोल और दाग कर टीम को 4-1 की विजयी बढ़त दिला दी। उन्होंने बाएं छोर से लुकास हर्नाडेज से मिली गेंद पर नियंत्रण बनाया और 25 गज की दूरी से शॉट मारकर गेंद को गोल पोस्ट का रास्ता दिखा दिया। उनके इस शॉट का विडा और सुबासिच के पास कोई जवाब नहीं था। इस गोल के साथ ही एमबेपे ने एक नया रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। पेले के बाद वह विश्व कप के फाइनल में गोल करने वाले सबसे युवा खिलाड़ी बने।

तीन गोल से पिछड़ने के बाद भी क्रोएशियाई टीम का जज्बा कम नहीं हुआ और एक गोल दागकर टीम के हार के अंतर को कम किया। हालांकि यह गोल मैंडजुकिच की चतुराई और फ्रांसीसी गोलकीपर की गलती के कारण हुआ। उन्होंने तब गेंद को ड्रिबल किया जब मैंडजुकिच उनके पास थे। क्रोएशियाई फॉरवर्ड ने उनसे गेंद छीन कर आसानी से उसे गोल में डाल दिया। निसंदेह क्रोएशिया ने बेहतर फुटबॉल खेला लेकिन फ्रांस ने अधिक प्रभावी और चतुराईपूर्ण खेल दिखाया, यही उसकी असली ताकत है जिसके दम पर वह 20 साल बाद फिर चैंपियन बनने में सफल रहा।

पेले के बाद फाइनल में गोल करने वाले सबसे युवा खिलाड़ी बने एमबेपे
विश्व कप के शुरुआत से भी काइलियन एमबेपे ने जो रफ्तार दिखाई उससे फुटबॉल जगत के दिग्गज उनके दीवाने हो गए। उन्हें फ्रांस की टीम के लिए तुरुप का इक्का माना जा रहा था। उन्होंने क्रोएशिया के खिलाफ फाइनल मुकाबले में गोल दाग कर अपनी काबिलियत का लोहा मनावा दिया। वे फाइनल में गोल करने वाले पेलले के बाद दूसरे सबसे युवा खिलाड़ी बन गए हैं।
मैच के 65वें मिनट में बाएं छोर से लुकास हर्नाडेज से मिली गेंद पर नियंत्रण बना कर एमबेपे ने 25 गज की दूरी से दमदार शॉट लगाया। उनके इस गोल का क्रोएशियाई खिलाड़ी और गोलकीपर के पास कोई जवाब नहीं था। उन्होंने 19 साल 207 दिन की उम्र में यह गोल दागा। इसके 60 साल बाद पहले 1958 में पेले ने 17 साल की उम्र में गोल दागा था।

फाइनल में गोल करने वाले सबसे कम उम्र के खिलाड़ी
उम्र                             खिलाड़ी            साल
17 साल 249 दिन        पेले                   1958
19 साल 207 दिन        एमबेपे              2018
20 साल 229 दिन       पेरिसियो           1938
21 साल 320 दिन        प्यूसेले              1930
21 साल 323 दिन        एमरिल्डो          1962

कब-कब हुआ गोल

फ्रांस ने 18वें मिनट में मारियो मैंडजुकिच के आत्मघाती गोल से बढ़त बनाई।
इवान पेरिसिच ने 28वें मिनट में बराबरी का गोल दागा।
एंटोनी ग्रीजमैन ने 38वें मिनट में गोल किया
पॉल पोग्बा ने 59वें मिनट में तीसरा गोल दागा।
65वें मिनट में काइलियन एमबेपे ने गोल किया।
मैंडजुकिच ने 69वें मिनट में गोल दागा

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