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प्रो कबड्डी लीग 2018-2019: फाइनल मुकाबला टाई होने पर किस तरह निकलेगा मैच का नतीजा?

बेंगलुरू बुल्स और गुजरात फॉर्च्यूनजायंट्स के बीच आज मुंबई में होगी खिताबी भिड़ंत

मयंक मेहता
05 Jan 2019, 15:22 IST
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प्रो कबड्डी लीग के छठे सीजन का आज फाइनल मुकाबला खेला जाएगा। बेंगलुरु बुल्स और गुजरात फॉर्च्यूनजायंट्स के बीच मुंबई में खिताबी भिड़ंत होने वाली है। इस सीजन में दोनों ही टीमों के बीच अबतक दो मुकाबले हुए हैं, जिसमें एक मैच में बैंगलोर ने जीत दर्ज की, तो एक मैच टाई रहा था। इसी को देखते हुए एक बात तो साफ है कि फैंस को एक बार फिर रोमांचक मैच देखने को मिलने वाला है। 

बेंगलुरू बुल्स दूसरे सीजन के बाद पहली बार फाइनल में पहुंचे हैं। दूसरे सीजन में बैंगलोर को मुंबई ने हराकर खिताब पर कब्जा किया था। दूसरी तरफ गुजरात फॉर्च्यूनजायंट्स की लगातार दूसरे सीजन में फाइनल खेलने वाली हैं। सीजन 5 में उन्हें पटना पाइरेट्स ने शिकस्त दी थी।

यह भी पढ़ें- प्रो कबड्डी लीग 2018: फाइनल मैच का सीधा प्रसारण कब और कहां देखें?

हालांकि दोनों ही टीमों को देखते हुए इस मैच में तीनों ही परिणाम संभव हैं। फैंस अब सोच रहे होंगे कि फाइनल मुकाबला टाई होने की स्थिति में कौन सी टीम खिताब पर कब्जा करेगी और कैसे विजेता का फैसला किया जाएगा?

आपको बता दें कि इस सीजन में नया चैंपियन मिलना तय है। हम आपको बताते हैं कि फाइनल मैच बराबरी पर रहने के बाद किस तरह मैच का परिणाम निकल सकता है:

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40 मिनट के खेल के बाद अगर दोनों ही टीमों के स्कोर बराबरी पर रहते हैं, तो 7 मिनट का टाई ब्रेकर होगा जिसमें 3-3 मिनट के दो हाफ होंगे और एक मिनट का ब्रेक होगा, जिसमें टीम अपनी रणनीति तय कर सकती है। टाईब्रेकर में नियम एक आम मैच की तरह ही होते हैं।



हालांकि 7 मिनट के टाईब्रेकर के बाद भी स्कोर बराबरी पर ही रहते हैं, तो मैच का फैसला गोल्डन रेड के जरिए होगा।

गोल्डन रेड के लिए पहले टॉस होता है और जो भी टीम टॉस जीतेगी उसे रेड करने का मौका मिलेगा और अगर वो उसमें पॉइंट लाने में कामयाब होती है, तो वो विजेता बन जाएगी। रेड करने वाली टीम पॉइंट लाने में कामयाब नहीं होती है,तो दूसरी टीम को गोल्डन रेड करने का मौका दिया जाएगा। गोल्डन रेड के नियम काफी अलग होते हैं, इसमें रेडर के लिए ब्लैक लाइन (जिसे पार करने के बाद ही रेड मान्य होती है) ही मेन लाइन बन जाती है, जिसे पार करते ही रेडर को अंक मिल जाता है। इस स्थिति में रेडर के एक पैर हवा में और दूसरा ब्लैक लाइन के पार होना जरूरी नहीं है। गोल्डन रेड में डिफेंड करने वाली टीम को टैकल के अंक नहीं मिलते हैं।

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इसके अलावा एक्सट्रा टाइम या उससे पहले किसी खिलाड़ी को सस्पेंड किया जाता है, तो वो खिलाड़ी गोल्डन रेड का हिस्सा नहीं बन पाएगा और उसकी टीम को कम खिलाड़ियों के साथ कोर्ट में उतरना होगा। जिस टीम में जितने खिलाड़ी कम होंगे, उतने ही अंक विपक्षी टीम को मिल जाएंगे। हालांकि दोनों टीमों द्वारा एक-एक गोल्डन रेड करने के बाद भी स्कोर बराबरी पर रहता है, तो अंत में मैच का फैसला टॉस के जरिए होगा और जो भी टॉस को जीतेगी उसे विजेता घोषित किया जाएगा।

वैसे तो प्रो कबड्डी की 6 सीजन में अबतक प्ले ऑफ या फिर फाइनल मुकाबला बराबरी पर नहीं छूटा है, लेकिन जिस तरह का सीजन रहा है उसे देखते हुए इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि यह मैच टाई भी रह सकता है। हालांकि इतने शानदार सीजन के बाद कोई भी इस बात की उम्मीद नहीं करेगा कि छठे सीजन के विजेता का फैसला टॉस के जरिए किया जाए। निश्चित ही हर कोई एक शानदार फाइनल मुकाबले की उम्मीद कर रहा होगा।

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