गोल्फ़

Asian Games 2018 : गोल्फ में सात युवाओं से सोने की उम्मीद

भारत के लिए गोल्फ में पहला व्यक्तिगत स्वर्ण पदक 1982 एशियन खेलों में आया था

एशियाई खेलों में भारत का एक मात्र लक्ष्य है पदकों की संख्या बढ़ाना। इसे पूरा करने के लिए देश के 572 एथलीट जी-जान से जुटे हुए हैं। इसी की एक कड़ी गोल्फ के उन युवा खिलाड़ियों से जुड़ी है जो इंडोनेशिया में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। गोल्फ के लिए सात सदस्यीय दल जकार्ता के लिए रवाना होगा। इन सात युवाओं की बदौलत ही भारत सोलह साल बाद स्वर्ण पदक जीतने की कोशिश करेगा। हालांकि ये सभी काफी युवा हैं और पहली बार एशियाई खेलों मे शिरकत करेंगे। इन्हें लक्ष्य को पाने के लिए सिर्फ अपने प्रदर्शन पर ही नहीं बल्की दिग्गजों के दबाव से भी निपटना होगा। इस प्रतियोगिता में उनके सामने चीनी ताइपे, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे मजबूत देशों के गोल्फरों से पार पाना होगा। आज चर्चा इन्हीं गोल्फरों और उनके प्रदर्शन की...

दिल्ली एशियाड में मिला था पहला सोना

भारत एशियाई खेलों की गोल्फ स्पर्धा में भारत अब तक 6 पदक जीत चुका है। इसमें तीन स्वर्ण और तीन रजत पदक शामिल हैं। भारत के लिए गोल्फ में पहला व्यक्तिगत स्वर्ण पदक 1982 एशियन खेलों में आया। इस पदक को लक्ष्मण सिंह ने दिलाया था। इसके बाद भारत ने 2006 के एशियाई खेलों में रजत पदक जीता। हालांकि यह भी सही है कि भारत अब तक टीम स्पर्धा में ही बेहतर प्रदर्शन कर पाया है। व्यक्तिगत स्पर्धा में भारत को इस एशियाई खेलों में बेहतर कर पदक के इंतजार को खत्म करना होगा।

शिव ने आखिरी बार जीता स्वर्ण

एशियाई खेलों में आखिरी स्वर्ण पदक शिव कपूर ने जीता था। कपूर ने बुसान में हुए 2002 एशियाई खेलों में यह शानदार उपलब्धि हासिल की थी। इस कारनामें को हुए लगभग 16 साल हो गए। इसके बाद से अब तक भारत किसी भी स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने में कामयाब नहीं हो पाया है। इस एशियाई खेलों में युवाओं के कंधे पर इस 16 साल के सूखे को समाप्त करने की जिम्मेदारी है।

दक्षिण कोरिया का है दबदबा

एशियाई खेलों में पदक जीतने के मामले में दक्षिण कोरिया सबसे ऊपर है। उसके नाम अब तक कुल 32 पदक हैं। इसमें 13 तो स्वर्ण हैं। वहीं 11 रजत और 8 कांस्य भी कोरिया की शान बढ़ा रहे हैं। भारत पदक के मामले में चौथे स्थान पर है। उससे पहले चीनी ताइपे और जापान पदक तालिका में राज कर रहे हैं। चीनी ताइपे के खाते में कुल 19 जबकि जापान के खाते में कुल 16 पदक हैं। हालांकि दोनों के पास सात-सात गोल्ड और चार-चार रजत पदक हैं।

2014 में भी खाली हाथ लौटे थे भारतीय

2014 एशियाई खेलों में भारतीय गोल्फरों का प्रदर्शन मायूस करने वाला था। वे लंबे समय बाद कोई भी पदक नहीं जीत सके थे। हालांकि 2006 और 2010 के एशियाई खेलों में भी भारत व्यक्तिगत स्पर्धा में कोई सोना नहीं जीत पाया था लेकिन टीम स्पर्धा में गोल्फरों ने रजत जीत कर देश की मान रख ली थी। ऐसे में इस बार बार भारतीय गोल्फरों पर पदक जीतने का दबाव होगा। वे इस बार भी व्यक्तिगत और टीम स्पर्धा में भाग ले रहे हैं।

आदिल और क्षितिज के कंधों पर अधिक जिम्मेदारी

दिल्ली के क्षितिज कौल और चंडीगढ़ के आदिल बेदी से भारत को पदक की उम्मीद है। आदिल के हाल का प्रदर्शन काफी बेहतर रहा है, इस लिहाज से उन्हें पदक का प्रबल दावेदार माना जा रहा है। आदिल ने पिछले साल लॉस वेगास में जूनियर विश्व स्टार टूर्नामेंट जीत कर अपनी काबिलियत साबित की थी। वहीं क्षितिज ने हाल में इंडिया ओपन में उम्दा प्रदर्शन किया है। अन्य युवा भी इस बार मिले मौके को स्वर्णिम अवसर में बदलने को बेताब हैं.