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जब भारतीय दिग्गज शूटर मनु भाकर को 2018 कॉमनवेल्थ गेम्स एरिना में जाने से रोक दिया गया था

मनु भाकर (Manu Bhaker) - तस्वीर साभार: ओलंपिक चैनल
मनु भाकर (Manu Bhaker) - तस्वीर साभार: ओलंपिक चैनल
Irshad
ANALYST

अगर आपको ये कहा जाए कि भारतीय शूटिंग में एक बड़ा नाम और ISSF वर्ल्ड कप चैंपियन रह चुकीं मनु भाकर (Manu Bhaker) को 2018 कॉमनवेल्थ गेम्स के दौरान एरिना में जाने से रोक दिया गया था, तो आप क्या कहेंगे ? ये बिल्कुल सच है और इसपर से पर्दा हटाया है मनु भाकर के पिता रामकिशन भाकर (Ramkishan Bhaker) ने।

दरअसल 2018 राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान गोल्ड कोस्ट एरिना में बस उन्हीं एथलीट को जाने की इजाज़त थी जिन्होंने स्वर्ण पदक हासिल किया हो। मनु के पिता ने ओलंपिक चैनल के साथ हुई बातचीत में बताया कि, “इस बात की जानकारी मनु को नहीं थी और वह उस एरिना में जा रहीं थीं। इस एरिना में प्रवेश की निगरानी एक अधिकारी द्वारा की जा रही थी। जब मनु ने इसमें प्रवेश किया तो वह दौड़ता हुए वहां पहुंचा और उसे यह कहकर रोक दिया कि जिन एथलीटों ने स्वर्ण पदक जीता है केवल वो ही यहां हस्ताक्षर करके अंदर जा सकते हैं।"

इस घटना ने मनु को निराश नहीं किया बल्कि इससे उनका आत्मविश्वास और बढ़ गया था। इसके बाद जो हुआ वह जानकर आप और हैरान रह जाएंगे। मनु के पिता रामकिशन ने बताया कि मनु ने अधिकारी को कहा कि कल मैं फिर आऊंगी और हाथ में स्वर्ण पदक के साथ।

“मनु ने अधिकारी को कहा कि मैं कल स्वर्ण पदक जीतूंगी, लेकिन मुझे आज तो हस्ताक्षर करके प्रवेश करने दीजिए। लेकिन अधिकारी ने इनकार कर दिया। फिर मनु ने अधिकारी को पेन लौटाया और कहा कि कल मेरे हाथ में पदक होगा और फिर हस्ताक्षर करूंगी। मुझे मनु की इस बात पर पूरा भरोसा था कि वह पोडियम के सबसे ऊपर रहेगी।"

इसमें भारत ने 16 पदक हासिल करते हुए शीर्ष स्थान कायम किया था। इनमें सात स्वर्ण पदक शामिल थे। इस 16 पदकों में मनु भाकर (Manu Bhaker) का महिलाओं की 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा में जीता गया स्वर्ण पदक भी शामिल था। उनके साथी 16 वर्षीय अनीश भानवाला ने पुरुषों की 25 मीटर रैपिड फायर पिस्टल में स्वर्ण पदक और 18 वर्षीय मेहुली घोष ने 10 मीटर एयर राइफल में रजत पदक जीता।

हुआ भी ठीक वैसा ही अगले दिन मनु ने कॉमनवेल्थ गेम्स में इतिहास रच दिया। उन्होंने 240.9 अंकों के साथ रिकॉर्ड बनाते हुए स्वर्ण पदक हासिल किया था।

ये वह लम्हा था जिसने न सिर्फ़ भारतीय इतिहास में एक नई इबारत लिखी थी बल्कि मनु भाकर के पिता का सीना भी गर्व से चौड़ा हो गया था।

उन्होंने कहा, "हर माता-पिता अपने बच्चे के लिए निवेश करते हैं, लेकिन मैं उससे आश्वासन लेता था कि उसे कम से कम 1-2 साल तक खेलना है। शूटिंग काफी ख़र्चीला खेल है, लेकिन मैंने यह सुनिश्चित किया कि मनु को कोई परेशानी नहीं आये। मैं उससे इस बारे में सोचने की बजाय केवल शूटिंग पर ध्यान देने को कहता था। उसके लिए रेंज तैयार करना मेरा काम था, लेकिन सुबह 4 बजे जग कर वहां पहुंचना उसका काम। हमने कभी नहीं सोचा था कि वह ओलंपिक में भी प्रतिस्पर्धा करेगी।"

मनु भाकर की नज़र अब टोक्यो ओलंपिक में भी इतिहास रचने पर होगी, जो उनका पहला ओलंपिक होगा। उन्होंने म्यूनिख में आयोजित 2019 ISSF वर्ल्ड कप में चौथा स्थान हासिल करते हुए टोक्यो का टिकट हासिल कर चुकी हैं।

Edited by Irshad
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