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ये 10 क्रिकेटर जो दूसरो देशों के लिए खेले या खेल रहे हैं

जितेंद्र तिवारी
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क्रिकेट दुनिया के सबसे लोकप्रिय खेलों में से एक है। जिसे दुनिया के कई देश खेलते हैं और कई अन्य देश भी धीरे-धीरे इसे अपना रहे हैं। यही नहीं कई ऐसे खिलाड़ी भी इस खेल से जुड़े रहे हैं, जिन्होंने अपने करियर को आगे बढ़ाने के लिए अन्य देशों का रुख किया है। जिनमें कई देशों के खिलाड़ियों ने दूसरे देश की तरफ से खेलने के लिए नागरिकता भी ली है। आज इस लेख में हम आपको ऐसे ही 10 खिलाड़ियों के बारे में बता रहे हैं, जिन्होंने अन्य देशों की तरफ से इस खेल में भाग लिया: क्रिस जॉर्डन क्रिस जॉर्डन इंग्लैंड के लिए बेहतरीन खिलाड़ी साबित हुए हैं। दायें हाथ के इस तेज गेंदबाज़ ने जिस तरह से अपनी गेंदबाज़ी से लोगों को प्रभावित किया है, उसी तरह उन्होंने बल्लेबाज़ी में भी अहम योगदान दिया है। जॉर्डन का जन्म बारबाडोस में हुआ था। उनके माता-पिता का ताल्लुक बारबाडोस से है, जबकि उनके दादा-दादी ब्रिटेन के नागरिक थे। अपनी प्राथमिक शिक्षा पूरी करने के बाद जॉर्डन उच्च शिक्षा के लिए इंग्लैंड चले आये, जहां डलविच कॉलेज में उनका एडमिशन हुआ, साथ ही उन्हें स्पोर्ट्स स्कालरशिप भी मिल गयी। जॉर्डन ने साल 2007 में सरे के लिए उन्होंने अपना डेब्यू किया, जहां बतौर तेज गेंदबाज़ उनका प्रदर्शन बेहतरीन रहा और उन्हें इसका इनाम मिला, जब उन्हें ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ इंग्लैंड टीम में चुना गया। जॉर्डन ने अबतक 8 टेस्ट, 31 वनडे व 26 टी-20 खेलें हैं, जिसमें क्रमशः 21, 43 व 31 विकेट लिए हैं। एड जॉएस एड जॉएस पहले ऐसे आयरिश खिलाड़ी हैं, जिन्होंने इंग्लैंड व आयरलैंड के लिए अंतरर्राष्ट्रीय मुकाबले खेलें हैं। बाएं हाथ के इस बेहतरीन बल्लेबाज का प्रदर्शन आयरलैंड के लिए खेलते हुए ज्यादा अच्छा रहा है। साल 2007 के आईसीसी विश्वकप और साल 2006-07 एशेज में जॉएस इंग्लैंड की टीम के सदस्य रहे थे। जॉएस ने लेकिन अपने देश की तरफ से खेलने का निर्णय लिया और वह आयरलैंड की तरफ से खेलने लगे। साल 2011 के विश्वकप में जॉएस ने आयरलैंड का प्रतिनिधित्व किया। जॉएस ने इंग्लैंड व आयरलैंड के लिए 71 वनडे मैचों में 2349 रन बनाए हैं, जहां उनका औसत 36.14 का रहा है। बॉएड रैनकिन आयरलैंड के इस बाएं हाथ के तेज गेंदबाज ने बहुत ही कम समय में ही करियर में बड़े आयाम हासिल कर लिए थे। रैंकिन का खानदान भी क्रिकेट से जुड़ा रहा है। कमाल का प्रदर्शन करने की वजह से रैंकिन का चयन साल 2007 में आयरलैंड की टीम में हो गया था। इस विश्वकप में उन्हें 12 विकेट मिले। साल 2012 में रैंकिन दुनिया के उभरते हुए बेहतरीन क्रिकेटरों में से एक रहे और इसी वर्ष से वह इंग्लैंड की टीम में शामिल हो गये। जहां इंग्लैंड की तरफ से वह साल 2013-14 के एशेज सीरीज में भी खेले। हालांकि कम मौके मिलने की वजह से वह एक बार फिर आयरलैंड वापस आ गये। रैंकिन ने अबतक 46 वनडे और 26 टी-20 अंतर्राष्ट्रीय मैचों में क्रमश: 57 व 28 विकेट लिए हैं। मैट रैन्शा ऑस्ट्रेलिया के बेहतरीन युवा क्रिकेटरों में से एक नाम मैट रैन्शा है, इंग्लैंड के यॉर्कशायर में जन्में रेंशा का परिवार न्यूजीलैंड में सेटल हो गया था। उनकी उम्र जब 7 वर्ष थी, तभी उनका परिवार ऑस्ट्रेलिया पहुंच गया। जहां कुईंसलैंड के लिए वह खेलने लगे। रेंशा ने अपनी टीम के लिए घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन किया जिसका इनाम उन्हें साल 2016 में मिला जब उन्हें दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टेस्ट क्रिकेट के लिए कंगारू टीम में हुआ। जहां उन्होंने अपने प्रदर्शन से सबको प्रभावित किया। हालांकि रैन्शा ने अपनी सबसे यादगार पारी साल 2016 में पाकिस्तान के खिलाफ 184 रन बनाकर खेला था। इसके अलावा भारतीय स्पिनर जोड़ी जडेजा और आश्विन का भी सामना उन्होंने डटकर किया था। 10 टेस्ट मैचों में उन्होंने 623 रन बनाये हैं। इयोन मोर्गन इसमें कोई दो राय नहीं है कि इयोन मॉर्गन इंग्लैंड के लिए खेलने वाले आयरलैंड के सबसे बेहतरीन खिलाड़ियों में से एक हैं। बाएं हाथ के इस कमाल के बल्लेबाज़ ने साल 2006 में स्कॉटलैंड के खिलाफ आयरलैंड की तरफ से अपना पहला अंतर्राष्ट्रीय मैच खेलने वाले मॉर्गन ने साल 2009 में इंग्लैंड का रुख किया। मॉर्गन ने बेहतरीन खेल दिखाया और उनका चयन इंग्लिश टीम में हो गया। साल 2014 में मॉर्गन को इंग्लैंड की वनडे टीम की कप्तानी भी मिल गयी। मॉर्गन इंग्लैंड के पहले ऐसे वनडे कप्तान हैं, जिन्होंने बतौर कप्तान 4 शतक बनाये हैं। इसके अलावा वह टी-20 टीम के भी कप्तान हैं। मॉर्गन ने 190 वनडे अंतर्राष्ट्रीय मैचों में 37.92 के औसत से 5801 रन बनाये हैं। पॉल हैरिस दक्षिण अफ्रीका के पूर्व बाएं हाथ के इस स्पिनर का जन्म रोडेशिया(जो अब ज़िम्बाब्वे है) में हुआ था। उनके पिता रोडेशिया में 1980 तक ब्रिटिश दक्षिण अफ़्रीकी पुलिस के सदस्य थे। हैरिस जब केपटाउन में आये थे तब वह युवा था। जिससे उन्होंने ज्यादातर क्रिकेट दक्षिण अफ्रीका में ही खेली है। सन 1998 में हैरिस ने वेस्टर्न प्रोविंस बी के लिए अपना डेब्यू किया और अपने प्रदर्शन से वह चयनकर्ताओं के रेडार पर आ गये। जब निकी बोये ने संन्यास लिया तो उन्हें टीम में जगह भी मिल गयी। साल 2007 में हैरिस ने भारत के खिलाफ अपना डेब्यू किया, जहां उन्हें सचिन तेंदुलकर का विकेट मिला और उनका प्रदर्शन भारतीय विकेट पर बेहतरीन रहा। हैरिस ने दक्षिण अफ्रीका के लिए 37 टेस्ट मैच खेले और उन्हें 103 विकेट मिले। एंड्रू स्ट्रॉस इंग्लैंड के सबसे लोकप्रिय कप्तानों में से एक एंड्रू स्ट्रास का जन्म जोहान्सबर्ग, दक्षिण अफ्रीका में हुआ था। उनकी उम्र जब 6 वर्ष थी, तभी उनका परिवार इंग्लैंड आ गया था। हालांकि उन्होंने अपने शुरूआती करियर में सिडनी और एडिलेड, ऑस्ट्रेलिया में भी बिताया है। 1998 में स्ट्रास ने मिडिलसेक्स की तरफ अपना डेब्यू किया और लगातार रन बनाये। बाएं हाथ के इस बल्लेबाज़ को साल 2003 में अपना पहला अंतर्राष्ट्रीय मुकाबला श्रीलंका के खिलाफ खेलने को मिला। इंग्लैंड के लिए 9 वर्ष तक खेलने वाले स्ट्रास ने बतौर सलामी बल्लेबाज़ खूब रन बनाये हैं। साथ ही बतौर कप्तान उन्होंने साल 2009 व 2011 के एशेज में टीम को जीत भी दिलाई थी। स्ट्रास ने 100 टेस्ट व 127 वनडे मैच खेले हैं, जिसमें क्रमश: 7037 और 4205 रन बनाये हैं। केविन पीटरसन केविन पीटरसन आधुनिक क्रिकेट के बेहतरीन बल्लेबाज़ में से एक हैं, दक्षिण अफ्रीका में उनका जन्म हुआ और उन्होंने वहां के घरेलू क्रिकेट में अच्छा प्रदर्शन भी किया। इसी दौरान क्लाइव राइस की नजर उनपर पड़ी और उन्होंने पीटरसन को नाटिंघमशायर काउंटी क्रिकेट क्लब के लिए खेलने के लिए आमंत्रित किया। जहां केविन ने शानदार प्रदर्शन के बूते इंग्लैंड की टीम में जगह बना ली। पीटरसन आक्रामक बल्लेबाज़ के तौर पर जाने जाते हैं, और 2005 के एशेज सीरीज की जीत में उनकी भूमिका अहम रही। लय में होने पर केपी किसी भी गेंदबाज़ी आक्रमण को नेस्तनाबूद कर सकते हैं। साथ ही उनके ऊपर ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और दक्षिण अफ्रीका की तेज पिचों का भी असर नहीं पड़ता था। पीटरसन ने हर जगह अपनी बल्लेबाज़ी की छाप छोड़ी है। 104 टेस्ट व 136 वनडे मैचों में पीटरसन ने क्रमश: 8181 व 4440 रन बनाये हैं। हालांकि मौजूदा समय में वह इंग्लैंड की टीम से बाहर चल रहे हैं। ईश सोढ़ी न्यूज़ीलैंड के लेग स्पिनर ईश सोढ़ी का जन्म लुधियाना, भारत में हुआ था। सोढ़ी जब बच्चे ही थे तभी उनके माता-पिता ऑकलैंड, न्यूज़ीलैंड में शिफ्ट हो गये थे। न्यूज़ीलैंड की टीम में आने से पहले उन्होंने घरेलू स्तर पर बेहतरीन प्रदर्शन किया था। साल 2013 में बांग्लादेश के खिलाफ सोढ़ी ने ज़हूर अहमद चौधरी स्टेडियम में अपना पहला टेस्ट खेला था। जहां अपनी लेग-ब्रेक गेंदों से उन्होंने चयनकर्ताओं को प्रभावित किया, जिससे उन्हें वनडे और टी-20 टीमों में भी जगह मिल गयी थी। सोढ़ी ने अबतक 14 टेस्ट और 18 वनडे खेले हैं, जिसमें क्रमश: 38 और 19 विकेट अपने नाम किये हैं। बेन स्टोक्स इंग्लैंड टीम के मौजूदा सुपरस्टार बेन स्टोक्स का जन्म न्यूज़ीलैंड के क्राइस्टचर्च में हुआ था। उनके पिता रग्बी के खिलाड़ी और कोच थे। स्टोक्स जब युवा ही थे तभी उनके पिता इंग्लैंड आ गये थे। साल 2009 बेन ने डरहम के लिए घरेलू क्रिकेट खेलना शुरू किया। हालांकि सच्चाई ये भी है कि उनके पिता बाद में न्यूज़ीलैंड वापस चले गए थे। स्टोक्स ने अपने ऑलराउंड प्रदर्शन से जल्द ही इंग्लैंड की टीम में अपना स्थान पक्का कर लिया। मौजूदा समय में वह दुनिया के सर्वश्रेष्ठ ऑलराउंडर में से एक हैं। साथ ही स्टोक्स अकेले दम पर मैच बदलने की भी कुव्वत रखते हैं। इंग्लैंड के लिए स्टोक्स ने अबतक 39 टेस्ट और 62 वनडे मैच खेले हैं, जिसमें क्रमश: 2429 व 1650 रन और 95 व 53 विकेट अपना नाम किये हैं। इसके अलावा वह विवादों का भी हिस्सा रहे हैं। लेखक- कोवाली तेजा, अनुवादक- जितेंद्र तिवारी

Edited by Staff Editor
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