10 भारतीय क्रिकेटर जो अच्छी शुरुआत के बाद कहीं खो गए

क्रिकेट, दुनिया में सबसे ज्यादा खेले जाने वाले खेलों में से एक है और लाखों लोगों के जीवन का हिस्सा बन गया है। क्रिकेट इतिहास में हमने कई क्रिकेटरों को देखा है जिन्होंने अपने निरंतर शानदार प्रदर्शन से कई रिकॉर्ड कायम किये, वहीं कुछ ऐसे क्रिकेटर भी हैं जो कुछ मैचों में अच्छा प्रदर्शन करने के बाद निरंतरता कायम नहीं रख पाए और क्रिकेट प्रशंसकों ने धीरे धीरे उन्हें भुला दिया। तो आइए एक नज़र डालते हैं ऐसे खिलाड़ियों पर जो अच्छी शुरुआत के बाद कहीं खो गए।

#10 ऋषि धवन

हिमाचल प्रदेश के ऑलराउंडर ऋषि धवन को भारतीय टीम में सालों से चली आ रही अदद ऑलराउंडर की कमी को पूरा करने वाला खिलाड़ी माना गया था। लेकिन लगातार दो आईपीएल सत्रों में ख़राब प्रदर्शन के बाद उन्हें लगभग भुला दिया गया। भारतीय टीम के लिए तीन वनडे और एकमात्र टी -20 मैच में उन्होंने 13 रन बनाए और 8.50 की महंगी इकोनॉमी रेट से केवल दो विकेट लिए। उन्होंने 2016 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वनडे मैच से अपने अंतराष्ट्रीय क्रिकेट का पर्दापण किया था। लेकिन ऐसे प्रदर्शन के बाद धवन को टीम से बाहर कर दिया गया। उन्हें अपनी फिटनेस में सुधार कर घरेलू टूर्नामेंट में अपने आपको साबित करने की ज़रूरत है। इस समय वह अपने राज्य हिमाचल प्रदेश के कप्तान हैं।

#9 फैज़ फ़ज़ल

फैज़ फ़ज़ल भारतीय क्रिकेट के इतिहास में सबसे दुर्भाग्यशाली क्रिकटरों में से एक रहे हैं। घरेलू सर्किट में 14 वर्षों तक शानदार प्रदर्शन करने के बावजूद, उन्हें सिर्फ एक बार भारतीय टीम में खेलने का मौका मिला। हालांकि फैज़ ने भारत के लिए खेले अपने एकमात्र मैच में 55 रन बनाए, लेकिन उन्हें कई मौके में राष्ट्रीय चयनकर्ताओं और आईपीएल फ्रेंचाइज़ियों द्वारा अनदेखा किया गया। यह सलामी बल्लेबाज शिखर धवन और रोहित शर्मा की बेजोड़ सलामी बल्लेबाज़ जोड़ी के रहते हुए अभी तक दोबारा भारतीय टीम में जगह नहीं बना सके हैं। गौरतलब है कि विदर्भ ने फैज़ की कप्तानी में रणजी ट्रॉफी और ईरानी कप जीता है।

#8 पंकज सिंह

राजस्थान के लंबे क़द के तेज़ गेंदबाज पंकज सिंह वर्तमान में घरेलू सर्किट में सबसे अनुभवी खिलाड़ियों में से एक है। 2003 में राजस्थान के लिए अपने क्रिकेट करियर की शुरुआत के बाद से, वह आज तक अपनी घरेलू टीम के सबसे महत्वपूर्ण खिलाड़ी हैं। घरेलू क्रिकेट में निरंतर अच्छे प्रदर्शन करने के बावजूद, वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपना प्रदर्शन दोहरा नहीं सके, जिस वजह से वह सिर्फ एक ही मैच खेलकर टीम से बाहर हो गए। 2014 में अपने एकमात्र वनडे मैच में उन्होंने अपने स्पेल में बिना किसी विकेट के 45 रन दिए थे। पंकज सिंह अभी भी राजस्थान के लिए खेलते हैं और रणजी ट्रॉफी में अपनी टीम की ओर से सबसे ज़्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज़ हैं।

#7 राहुल शर्मा

आईपीएल के 5 वें और 6ठे संस्करण में राहुल शर्मा सबसे किफायती गेंदबाजों में से एक थे। हालांकि, उसके बाद, उनके प्रदर्शन में निरंतर गिरावट आती चली गई और वह राष्ट्रीय टीम के साथ-साथ आईपीएल से भी बाहर हो गए। 2012 से वह दोबारा टीम इंडिया में स्थान बनाने में नाकाम रहे हैं। अब चूंकि युजवेंद्र चहल जैसे लेग स्पिनर टीम में अपना स्थान पक्का कर चुके हैं, ऐसे में राहुल का राष्ट्रीय टीम का हिस्सा बनना लगभग नामुमकिन सा लगता है। इसके अलावा, राहुल शर्मा को आईपीएल के 8 वें संस्करण के बाद से आईपीएल में कोई खरीदार नहीं मिला है।

#6 अभिमन्यु मिथुन

कर्नाटक के इस तेज़ गेंदबाज़ को अपने पहले रणजी ट्रॉफी सीज़न में एक हैट्रिक सहित 47 विकेट लेने के बाद राष्ट्रीय टीम में शामिल किया गया था। 2010 में श्रीलंका के खिलाफ अपने पहले टेस्ट मैच में, उन्होंने 4/105 के सर्वश्रेष्ठ आंकड़े के साथ अंतराष्ट्रीय क्रिकेट में पर्दापण किया था। हालांकि, उनके प्रदर्शन में निरंतर गिरावट आती गई और 2011 से वह राष्ट्रीय टीम में जगह बनाने के कहीं आस-पास भी नहीं हैं। चूंकि वह केवल 28 वर्ष के हैं और उनके पास समय है कि वह दोबारा अपनी फॉर्म में लौटकर राष्ट्रीय चयनकर्तायों का ध्यान आकर्षित करें। वर्तमान में वह अपनी घरेलू टीम के महत्वपूर्ण गेंदबाज़ हैं।

#5 परविंदर अवाना

दिल्ली के दाएं हाथ के तेज गेंदबाज परविंदर अवाना को 2012 में किंग्स-XI पंजाब ने उनके रणजी ट्रॉफी में शानदार प्रदर्शन को देखते हुए अपनी टीम में शामिल किया था। उनकी सटीक और धारदार गेंदबाज़ी को देखते हुए अवाना को पहली बार 2012 में इंग्लैंड के खिलाफ टी -20 श्रृंखला के लिए भारतीय टीम में शामिल किया गया था। लेकिन, अपने दो मैचों में उन्होंने 11.83 की महंगी इकोनॉमी रेट से कुल 71 रन लुटा डाले, जिसके बाद उन्हें टीम से बाहर का रास्ता दिखा दिया। इसके बाद आईपीएल 2015 से उन्हें कोई खरीदार नहीं मिला। अब भुवनेश्वर कुमार और जसप्रीत बुमराह जैसे बेहतरीन गेंदबाज़ों के टीम में रहते, उनका टीम में वापसी करना मुमकिन नहीं लगता।

#4 मुनाफ़ पटेल

लगातार चोटिल होने के कारण भारतीय टीम से बाहर होने वाले तेज़ गेंदबाज़ मुनाफ पटेल ने विश्वकप जीत 2011 में भारत की ख़िताबी जीत में अहम भूमिका निभाई थी। हालाँकि, लगातार चोटिल होने की वजह से वह टीम इंडिया में अपना स्थान बरकरार नहीं रख सके। इसके अलावा अपने गिरते प्रदर्शन की वजह से उन्हें आईपीएल के साथ उनकी घरेलू टीम बड़ौदा से भी बाहर होना पड़ा। पटेल 2011 के बाद से टीम इंडिया से बाहर चल रहे हैं। मैच-प्रैक्टिस और फिटनेस की कमी के कारण, पिछले साल गुजरात लायंस की तरफ से खेलने वाले इस गेंदबाज़ को इस साल की आईपीएल नीलामी में कोई खरीदार नहीं मिला।

#3 परवेज़ रसूल

जम्मू-कश्मीर के ऑलराउंडर परवेज़ रसूल ने 2004 में रणजी ट्रॉफी में अपनी घरेलू टीम के लिए जबरदस्त प्रदर्शन किया था। अपने अच्छे प्रदर्शन के दम पर उन्हें आईपीएल में खेलने का मौका मिला और फिर 2013 में रसूल को पहली बार भारतीय टीम में जगह मिली लेकिन उनकी कहानी बाकी खिलाड़ियों से अलग रही है। वह ऑफ स्पिन गेंदबाजी कर सकते हैं लेकिन विकेट लेने में असमर्थ हैं। उनकी गेंदबाजी में यह कमज़ोरी उनकी बल्लेबाजी क्षमताओं को भी प्रभावित करती है। हमने 2017 में आखिरी बार उन्हें भारतीय जर्सी में देखा था। उन्हें अपनी बल्लेबाज़ी और गेंदबाजी में सुधार करने की ज़रूरत है। वर्तमान में वह अपनी घरेलू टीम जम्मू-कश्मीर के लिए कप्तान की भूमिका निभाते हैं।

#2 प्रज्ञान ओझा

स्पिन-सनसनी, प्रज्ञान ओझा 2013 तक भारतीय टीम के नियमित खिलाड़ी थे। वेस्टइंडीज के खिलाफ सचिन तेंदुलकर के आखिरी मैच में, उन्हें 10/89 के आंकड़े के साथ मैच के बाद 'मैन ऑफ द मैच' चुना गया था। लेकिन रविंद्र जडेजा जैसे स्पिनर के टीम में आने से उन्हें बाहर कर दिया गया।ओझा के टीम से बाहर होना के मुख्य कारण हैं उनका लचर क्षेत्ररक्षण और औसत गेंदबाज़ी। इसके अलावा आईपीएल 2015 में उनकी टीम मुंबई इंडियंस ने भी उन्हें टीम से निकाल दिया। वर्तमान समय में कुलदीप यादव और रविंद्र जडेजा जैसे प्रतिभाशाली स्पिनरों के होते हुए ओझा का टीम में वापसी करना नामुमकिन लगता है। वह अब घरेलू क्रिकेट में हैदराबाद के लिए खेलते हैं।

#1 प्रवीण कुमार

एक समय में भारतीय टीम के गेंदबाज़ी आक्रमण की कमान संभालने वाले प्रवीण कुमार लगातार चोटिल होने की वजह से टीम से बाहर हो गए और अभी तक वापसी नहीं कर पाए हैं। इस मध्यम तेज़ गेंदबाज़ की गेंद को दोनों तरह से स्विंग कराने की क्षमता ने उन्हें भारत का स्टार गेंदबाज़ बना दिया था। खराब फिटनेस का असर उनकी गेंदबाज़ी पर भी पड़ा और आईपीएल में वह काफी महंगे साबित हुए हैं। प्रवीण के गिरते प्रदर्शन को देखते हुए इस साल आईपीएल नीलामी में किसी भी टीम ने उनके लिए बोली नहीं लगाई। वर्तमान भारतीय टीम में उनके राज्य से आने वाले भुवनेश्वर कुमार टीम इंडिया के प्रमुख गेंदबाज़ हैं। फ़िलहाल प्रवीण घरेलू क्रिकेट में उत्तर प्रदेश के लिए खेलते हैं। लेखक: सूरज श्री गणेश अनुवादक: आशीष कुमार

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