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IPL 2018: 3 ऐसे कारण जो चेन्नई सुपर किंग्स के लिए ख़िताब जीतना बना रहे हैं मुश्किल

  • कावेरी जल विवाद के बाद सुपर किंग्स का होम ग्राउंड अब चेन्नई की जगह पुणे हो गया है
Modified 20 Dec 2019, 18:38 IST

चेन्नई सुपर किंग्स टी -20 क्रिकेट के इतिहास में सबसे शानदार फ्रैंचाइजी में से एक है। जिसने कई आईपीएल और चैंपियंस लीग के फाइनल में पहुंच और खिताब जीत कर हमेशा ही अपने प्रदर्शन को साबित किया है। सिर्फ दो कारण ही टी-20 के इतिहास में चेन्नई सुपर किंग्स की सफलता का राज बता सकते हैं। पहला ड्वेन ब्रावो, सुरेश रैना, फ़ाफ़ डू प्लेसी जैसी मजबूत कोर टीम की उपस्थिति, जो किसी भी स्थिति से अपनी टीम के लिए मैच जीता सकते हैं और दूसरा कारण चेन्नई के फ्रेंचाइजियों के पास एमएस धोनी जैसा कप्तान होना है जो गजब की खेल समझ और सबकी सोच से हटकर फैसले लेकर जीत दिलाने में विश्वास रखता है। इस टी-20 की दिग्गज टीम ने आईपीएल के नये सत्र की शानदार शुरुआत मुंबई इंडियंस और कोलकाता नाइट राइडर्स पर लगातार जीत के साथ की है। हालांकि धोनी के धुरंधरों को तीसरे बेहद नजदीकी मैच में किंग्स-XI पंजाब के हाथों हार का सामना करना पड़ा है। लेकिन कहते हैं अच्छी से अच्छी टीम में कुछ ना कुछ खामी जरुर होती है। ऐसे ही कुछ कारण हैं जो चेन्नई के आईपीएल 2018 के अभियान को पटरी से उतरवा सकते हैं। आइए नजर डालते हैं ऐसी ही तीन कारणों पर जो कि चेन्नई के आईपीएल 2018 के सफर में रुकावट डाल सकते हैं।

#3 स्पिनर्स पर अत्यधिक निर्भरता



  महेंद्र सिंह धोनी स्पिनरों को कप्तानी करना पसंद करते हैं यह बात जगजाहिर है। जब स्पिनरों के लिए फील्ड सेट करने की बात आती है तो धोनी को इसमें महारत हासिल है और साथ ही यह उनकी खेल समझ का ही कमाल है कि वह अनुमान लगा लेते हैं कि बल्लेबाज आगे क्या उम्मीद कर रहा है। संभवतः इसका नजारा सीएसके के आगामी सीजन के लिए अपनी टीम का चयन करते समय दिखता है। हालांकि उनकी टीम में कई मैच विनर स्पिनर शामिल हैं जो अपने दम पर मैच जीता सकते हैं और धोनी की यह पसंद अक्सर अंतिम एकादश में कई स्पिनरों को शामिल कर देखने के रूप में मिलती है। जो कि गंभीर रूप से टीम के संतुलन को प्रभावित कर सकता है, विशेष रूप से मार्क वुड और लुंगी एनगिडी जैसे केवल दो विशेषज्ञ विदेशी तेज गेंदबाजों को टीम में रखकर। हालांकि ताहिर पहले दो मैचों में ( दो मैच में 1 विकेट) पूरी तरह से अपना रंग नहीं दिखा पाये हैं, लेकिन धोनी ने हरभजन को बेहद कम उपयोग में लिया है, इस ऑफ स्पिनर को शुरुआती दो मैचों में 4 ओवरों का अपना कोटा नहीं पूरा करने मिला है। स्पिनरों पर अतिरिक्त निर्भरता सीएसके के सामने घातक साबित हो सकती है, विशेष रूप से वानखेड़े या चिन्नास्वामी जैसे छोटे मैदानों पर।
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Published 19 Apr 2018, 06:45 IST
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