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टेस्ट क्रिकेट इतिहास के 3 ऐसे रिकॉर्ड्स जो शायद कभी न टूटें

Modified 27 Feb 2018, 07:58 IST
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टेस्ट मैच की शुरुआत साल 1877 में मेलबर्न के एमसीजी ग्राउंड में हुई थी। ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बीच ये एतिहासिक मैच खेला गया था। तब से लेकर अब तक इस खेल में काफ़ी बदलाव आया है। क्रिकेट का इतिहास सर्वणिम रहा है, टेस्ट क्रिकेट में कई विश्व स्तर के खिलाड़ियों ने अपना जलवा बिखेरा है। इन खिलाड़ियों में से कई लोगों ने ऐसे रिकॉर्ड बनाए हैं जो अब तक क्रिकेट प्रेमियों के जेहन में ताज़ा हैं, और इनको चुनौती देना आसान नहीं है। कुछ रिकॉर्ड ऐसे हैं जो भले ही लंबे समय तक बरक़रार रहे हों लेकिन टूट सकते हैं, जैसे जीत का अंतर, सबसे ज़्यादा टेस्ट विकेट आदि। कहा जाता है कि रिकॉर्ड टूटने के लिए ही बनते हैं, लेकिन यहां हम 3 ऐसे रिकॉर्ड के बारे में चर्चा कर रहे हैं जो सदियों से बरक़रार हैं, इनका टूट पाना शायद मुश्किल ही नहीं, नामुमकिन भी है।  

#1 जिम लेकर की एक टेस्ट मैच में सबसे बेतरीन गेंदबाज़ी (19 विकेट)

  साल 1956 में जब ओल्ड ट्रैफ़र्ड मैदान में एशेज़ सीरीज़ का मैच चल रहा था, तब इंग्लैंड के गेंदबाज़ जिम लेकर ने पूरे मैच पर अपना दबदबा कायम किया था। उन्होंने इस टेस्ट मैच की दोनों पारियों को मिलाकर 90 रन दिए थे और 19 विकेट हासिल किए थे। जिम लेकर ने इस मैच की पहली पारी में 37 रन देकर 9 विकेट लिए और दूसरी पारी में 53 रन लुटाकर शानदार 10 विकेट हासिल किए थे। लेकर के अलावा भारत के अनिल कुंबले ही एकलौते गेंदबाज़ हैं जिन्होंने टेस्ट की एक पारी में सभी 10 बल्लेबाज़ों को आउट किया था, लेकिन कुंबले एक मैच में 19 विकेट लेने वाले रिकॉर्ड को नहीं तोड़ पाए थे। आज के दौर में लेकर के बराबार भी पहुंचना नामुमकिन सा है।
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Published 27 Feb 2018, 07:58 IST
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