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क्रिकेट इतिहास के 4 विवादित बल्ले, दिग्गज खिलाड़ियों के नाम शामिल

St Lucia Zouks v Jamaica Tallawahs - 2019 Hero Caribbean Premier League (CPL)
St Lucia Zouks v Jamaica Tallawahs - 2019 Hero Caribbean Premier League (CPL)
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सावन गुप्ता
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क्रिकेट में अक्सर हम देखते हैं कि बल्लेबाज तरह तरह के बल्ले का प्रयोग करते हैं। कोई बल्लेबाज किसी तरह के बैट से खेलता है तो कोई बल्लेबाज अलग तरह के बैट से खेलता है। अब तक के क्रिकेट इतिहास में खिलाड़ियों ने अलग-अलग प्रकार के बैट का प्रयोग किया है। वहीं कुछ खिलाड़ियों के बल्ले को लेकर विवाद भी हुआ है।

क्रिकेट इतिहास में कई बार ऐसा हुआ है जब किसी खिलाड़ी के बल्ले को लेकर विवाद हुआ हो। अब तक कई बार इसको लेकर काफी विवाद हो चुका है। किसी बल्ले को लेकर विवाद कोई नया नहीं है। क्रिकेट इतिहास में बल्ले और विवादों का गहरा नाता रहा है। आइए आपको इतिहास में लिए चलते हैं और बताते हैं कुछ ऐसे ही बैट विवाद के बारे में।

क्रिकेट इतिहास के 4 विवादित बल्ले

4. 1771 का विशालकाय बल्ला

क्रिकेट के इतिहास में ये पहला मौका था जब क्रिकेट बैट को लेकर इतना बड़ा विवाद हुआ। ये 1771 की बात है, जब अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट मैच शुरु नहीं हुए थे। ये विवाद इतना बढ़ गया था कि इसके बाद क्रिकेट के नियमों में बदलाव करके बल्ले की चौड़ाई की सीमा तय कर दी गई थी।

ये विवाद 25 सितंबर 1771 को चेर्ट्सी और हैंब्लेटन के बीच खेले गए मैच के दौरान हुआ था। उस मैच में थामस व्हॉइट एक ऐसे बल्ले के साथ बल्लेबाजी करने के लिए उतरे जिसकी चौड़ाई बहुत ज्यादा थी। वो बल्ला इतना चौड़ा था कि सिर्फ बल्ले से पूरा स्टंप कवर हो जाता था। अगर उस मैच में व्हॉइट सिर्फ हर गेंद को रोकने की कोशिश करते तो कोई भी गेंदबाज उनको आउट नहीं कर पाता। हैंब्लेटन के खिलाड़ियों के पास इस बल्ले के विरोध के अलावा और कोई चारा नहीं था।

टीम के तेज गेंदबाज थॉमस ब्रेट की अगुवाई में उन्होंने इसका जमकर विरोध किया। इसके बाद हैंब्लेटन के कप्तान और ऑलराउंडर रिचर्ड नाइरन और मुख्य तेज गेंदबाज और बल्लेबाज जॉन ने एक छोटा सा पेटीशन साइन किया। इसके तहत क्रिकेट के नियमों में थोड़ा बदलाव किया गया और बल्ले की चौड़ाई कम कर दी गई। हालांकि उस मैच में चेर्ट्सी की टीम हैंब्लेटन के 218 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए महज 1 रन से मैच हार गई।

3. डेनिस लिली का एल्यूमीनियम बैट

डेनिस लिली
डेनिस लिली

15 दिसंबर 1979 को ऑस्ट्रेलियाई तेज गेंदबाज डेनिस लिली एल्युमीनियम की बैट के साथ बल्लेबाजी करने के लिए उतरे। एशेज सीरीज का पहला टेस्ट मैच पर्थ में खेला जा रहा था और पहले दिन का खेल खत्म होने के बाद ऑस्ट्रेलियाई टीम 232 रनों पर 8 विकेट गंवाकर संघर्ष कर रही थी। लिली नाबाद 11 रनों पर खेल रहे थे। लेकिन जब दूसरे दिन का खेल शुरू हुआ तो डेनिस लिली एल्युमीनिय के बल्ले के साथ बल्लेबाजी के लिए मैदान में आए। इससे सभी लोग हैरान रह गए।

लिली पहले भी एल्युमीनियम के बैट का प्रयोग कर चुके थे। पर्थ टेस्ट के 12 दिन पहले ब्रिस्बेन मे ंवेस्टइंडीज के खिलाफ मैच में उन्होंने इसका प्रयोग किया था, लेकिन तब कोई शिकायत नहीं की गई थी। लेकिन पर्थ टेस्ट में महज 4 गेंद बाद ही जब लिली ने इयान बॉथम की गेंद को ड्राइव कर 3 रन लिया, इसके बाद ही बैट को लेकर विवाद शुरु गया। ऑस्ट्रेलियाई कप्तान ग्रैग चैपल को लगा कि गेंद बाउंड्री लाइन को टच करनी चाहिए थी, इसीलिए उन्होंने 12वें खिलाड़ी रॉडनी हॉग से लिली के लिए सामान्य बल्ला भिजवाया, लेकिन लिली नहीं माने और एल्युमीनियम के बैट से ही खेलते रहे। इसके बाद इंग्लैंड टीम के कप्तान माइक ब्रेरली ने लिली के बल्ले के बारे में अंपायरों से शिकायत की।

इंग्लिश कप्तान का कहना था कि लिली के बल्ले से गेंद को नुकसान हो रहा है जिससे खेल का समय बर्बाद हो रहा है। इसके बाद ऑस्ट्रेलियाई कप्तान ग्रेग चैपल खुद मैदान में आए और लिली को लकड़ी का बल्ला दिया। इससे लिली गुस्से में आग बबूला हो गए और उन्होंने अपना बल्ला जमीन पर फेंक दिया। हालांकि इसके बाद उन्होंने नए बल्ले से ही बल्लेबाजी की

2.द् मूनगूज

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2010 के आईपीएल सीजन में पूर्व ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी मैथ्यू हेडन भी अपने बल्ले के कारण विवादों में रहे। हेडन ने आईपीएल के उस संस्करण में एक ऐसे बल्ले का प्रयोग किया था, जिसको 'मूनगूज' कहा जाता था और लोगों का मानना था कि इससे खेल में काफी बदलाव आएगा। हेडन के हाथ में एक छोटा सा एमएमआईथ्री का खतरनाक सा बल्ला था। इस बल्ले को लेकर काफी विवाद हुआ कि क्या इस बैट का उपयोग करना सही है कि नहीं।

हेडन ने उसी बल्ले से दिल्ली डेयरडेविल्स के खिलाफ 43 गेंदों पर तूफानी 93 रन बनाए। हालांकि हेडन के उस बल्ले का बांग्लादेशी क्रिकेटर मोहम्मद अशरफुल ने समर्थन किया और कहा कि 'बल्ले में ऐसी कोई गैरकानूनी बात नहीं है और गेंद को जब आप सही से हिट करते हैं तो वो अपने आप सीमा रेखा के पार चली जाती है' लेकिन आईपीएल में हेडन की टीम के साथी खिलाड़ी सुरेश रैना जिन्होंने खुद उस बैट का प्रयोग किया था कहा कि ' ये बल्ला गेंद को हिट करने के लिए तो काफी अच्छा है, लेकिन डिफेंड करने के लिए ये बल्ला सही नहीं है। इसी वजह से मैंने सामान्य बल्ले का प्रयोग करना शुरु कर दिया।' इसके बाद उस बल्ले का प्रयोग धीरे-धीरे बंद हो गया।

1.गेल का गोल्डेन बल्ला

क्रिस गेल अपने गोल्डन बैट के साथ
क्रिस गेल अपने गोल्डन बैट के साथ

क्रिस गेल के गोल्डन कलर के बल्ले ने भी काफी सूर्खियां बटोरी। ये बल्ला स्पॉर्टन कंपनी का था और इसे गोल्डन कलर में रंगा गया था। गेल ने पहले इस बल्ले का भारत में प्रयोग किया फिर ऑस्ट्रेलिया में 2015 के बिग बैश लीग सीजन में भी उन्होंने इसी बल्ले से बल्लेबाजी की। गेल ने बीबीएल में इस बल्ले से 23 रनों की छोटी सी पारी खेली और कुछ बड़े शॉट भी लगाए, हालांकि एक छोटी गेंद को पुल करने के चक्कर में वो आउट हो गए। लेकिन तब तक रंगीन बल्ले का प्रयोग करने वाले वो पहले बल्लेबाज बन चुके थे।

गेल के इस बल्ले पर काफी विवाद पैदा हुआ। बहुत सारे लोगों का ये मानना था कि इस बैट के अंदर मेटल लगा हुआ है। लेकिन स्पॉर्टन के मालिक कुनाल शर्मा ने इस विवाद को सिरे से खारिज कर दिया और कहा कि' बल्ले पर जो हमने गोल्डन कलर लगाया है उसके अंदर कोई भी मेटल नहीं लगा हुआ है। क्रिकेट में इस बात को लेकर कई सारे नियम हैं कि किस तरह के बल्ले से खेलना है और किस तरह के बल्ले से नहीं'।

Edited by सावन गुप्ता
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