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इन 4 वजहों से अमेरिका क्रिकेट का नया गढ़ बन सकता है

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Modified 23 Nov 2018, 20:03 IST
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यूएस में कई बड़े खेल समारोह आयोजित किए जाते हैं, ओलंपिक से लेकर रेसिंग इवेंट का पैमाना काफ़ी बड़ा है। अमेरिका में खेल का इतिहास स्वर्णिम रहा है। हांलाकि यहां क्रिकेट की उतनी लोकप्रियता नहीं रही है जितना कि भारतीय उपमहाद्वीप में है। इसकी सबसे बड़ी बजह ये है कि अमेरिका को ब्रिटिश साम्राज्य से 1776 ईसवी में आज़ादी मिली थी। उस वक़्त कई अन्य ब्रिटिश उपनिवेश में क्रिकेट का खेल अपने शुरुआती दौर में था। ऐसे में क्रिकेट को अमेरिका में पनपने का मौका नहीं मिला। 

कई सदियां गुज़र जाने के बाद यूएस ने कई खेलों को अपनाने की शुरुआत की और इसका खाका भी तैयार कर लिया गया। अमेरिका में विभिन्न खेलों की लोकप्रियता रही है। इस देश के खिलाड़ियों ने नए-नए खेलों को भी आज़माया है। साल 2016 के कबड्डी वर्ल्ड कप में अमेरिकी टीम ने भी हिस्सा लिया था, जिसे भारत में आयोजित किया गया था। आईसीसी की इच्छा है कि क्रिकेट को ब्रिटिश कॉमनवेल्थ को देशों के अलावा दूसरे मुल्कों में भी फैलाया जाए, जिससे इस खेल को नया बज़ार मिल सके।

अमेरिका को साल 1965 में आईसीसी के एसोसिएट टीम का दर्जा दिया गया था। उसी साल अमेरिकी क्रिकेट टीम ने कैलगेरी शहर के रिले पार्क में कनाडा के ख़िलाफ़ 2 दिवसीय मैच खेला था। इस मैच में यूएस टीम के क्लिफ़ोर्ड सेवर्न ने अपने भाई विंस्टन के साथ डेब्यू किया था। उस वक़्त क्लिफ़ोर्ड की उम्र 39 साल थी। हाल में ही सौरभ नेत्रवालकर को यूएस क्रिकेट टीम का कप्तान बनाया गया है। ये भारत के लिए गर्व का विषय है कि मुंबई रणजी टीम के किसी खिलाड़ी को अमेरिकी राष्ट्रीय क्रिकेट टीम की अगुवाई करने का मौका मिला है।

हम यहां उन 4 वजहों के बारे में बात करेंगे जिसके आधार पर हम कह सकते हैं कि यूएस क्रिकेट का अगला गढ़ बन सकता है। 

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Published 23 Nov 2018, 20:03 IST
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