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वर्ल्डकप इतिहास के 5 बेहतरीन डेथओवर गेंदबाज़

मनोज तिवारी
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आधुनिक क्रिकेट में सबसे ज्यादा दर्द अगर किसी को होता है, तो वह गेंदबाज़ को होता है। 22 गज की पिचें बल्लेबाजों को सबसे ज्यादा फेवर करती हैं। वास्तव में बहुत से लोग ये भी कहते हैं कि क्रिकेट पूरी तरह से बल्लेबाजों का खेल हो गया है। ये फैसला हैरान करने वाला होता है जब कोई युवा खिलाड़ी गेंदबाज़ बनता है। और ये कोई ताज्जुब करने वाली बात नहीं है कि हमें वसीम अकरम और वकार युनिस जैसे गेंदबाज़ अब देखने को नहीं मिल रहे हैं। मौजूदा दौर में जो गेंदबाज़ हैं उनमे ऐसे कम ही गेंदबाज़ हैं, जो डेथ ओवर में अच्छी गेंदबाज़ी करते हैं। सामान्य तौर पर गेंदबाज़ी करना अगर एक कला है, तो डेथओवर में गेंदबाज़ी करना चालाकी है। ऐसे कई महान गेंदबाज़ हुए जो डेथ ओवर में रन लुटाते नजर आये हैं क्योंकि डेथ ओवरों में बल्लेबाज़ तकनीक छोड़कर रन बनाने पर ध्यान देता है। कैस्ट्रोल एक्टिव के एक्टिवबांड्स जिस तरह से इंजन को सुरक्षा प्रदान करते हैं। उसी तरह ये 5 खिलाड़ी भी डेथ ओवरों में अपने प्रदर्शन से टीम की सुरक्षा करते हैं। आइये डालते हैं एक नजर इन्हीं 5 गेंदबाजों पर जो डेथओवर में अच्छी गेंदबाज़ी करते हैं:

#1 ड्वेन ब्रावो

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ड्वेन ब्रावो का नाम इस लिस्ट में चौंकाने वाला है, लेकिन उनके नाम के होने का कारण है। अभी ज्यादा वक्त नहीं हुआ है जब वेस्टइंडीज के खिलाड़ियों और बोर्ड के बीच विवाद चल रहा था। जिसमें ब्रावो भी शामिल थे जिन्होंने खेलने से मना कर दिया था। हालांकि कुछ साल पहले वेस्टइंडीज टी-20 वर्ल्ड कप की चैंपियन बनी थी। इस जीत ने वहां के फैंस को खुशियां तो दी ही थी। साथ ही पूरी टीम में प्रेरणा की लहर दौड़ गयी थी। उस वक्त सभी खिलाडी टीम में थे। जबकि ड्वेन ब्रावो ने सबको पछाड़कर डेथ ओवरों में बेहतरीन गेंदबाज़ी की थी। इस कैरेबियाई गेंदबाज़ ने अंतिम ओवरों में स्लोवर और चतुराईपूर्ण गेंदबाज़ी करते हुए टीम के लिए रन बचाने का अच्छा काम किया था। उनकी गेंदों पर बल्लेबाजों को रन बनाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ती थी।

#2 मिचेल स्टार्क

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अपने पहले वर्ल्डकप टूर्नामेंट में किसी भी गेंदबाज़ ने मिचेल स्टार्क जैसा प्रभाव नहीं छोड़ा है। ऐसा बहुत ही कम ही देखने को मिला है, जब गेंदबाज़ वर्ल्डकप में 'मैन ऑफ़ द टूर्नामेंट' बना हो। साल 2015 के वर्ल्डकप में मिचेल स्टार्क ने शानदार गेंदबाज़ी की थी। पूरे टूर्नामेंट में स्टार्क ने 3.50 के इकॉनमी रेट और 10.18 के औसत से 22 विकेट लिए थे। ये आंकड़े कहानी की तरह लग रहे होंगे लेकिन ऐसा था नहीं। ऑस्ट्रेलिया की तरफ से अबतक के सबसे बेहतरीन गेंदबाज़ ग्लेन मैकग्रा रहे हैं। लेकिन उनका आंकड़ा डेथ ओवरों इतना अच्छा नहीं रहा, जैसा मिचेल स्टार्क का रहा है।

#3 लसिथ मलिंगा

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लसिथ मलिंगा ने जब अपने करियर की शुरुआत की थी तो लोग उनकी तेज गेंदों से नहीं बल्कि उनके गैरपारंपरिक एक्शन से डरते थे। कुछ लोग उनके एक्शन को ग़लत भी कह रहे थे। लेकिन ये गलत अफवाह थी। उनके अंदर कुछ ऐसा था जो अलग था। श्रीलंका वर्ल्ड कप में बड़े लंबे समय से करीब पहुंचकर चूक जाता है। साल 2007 के वर्ल्ड कप में वर्षा बाधित फाइनल मैच में उसे ऑस्ट्रेलिया से हार का सामना करना पड़ा था। उसके बाद 2011 के फाइनल में एक बार फिर श्रीलंकाई टीम भारत से हार गयी। मलिंगा ने अपनी गेंदबाज़ी खासकर डेथओवरों में बल्लेबाजों के मं में खौफ भर दिया था। मलिंगा की खासियत है कि वह बेहद ही नपी तुली यॉर्कर गेंद डालते हैं। जिसका सबसे बड़ा कारण उनका राउंडआर्म एक्शन है। इस वजह से डेथ ओवर में उनकी हर गेंद सोने के अंडे की जैसी होती है।

#4 वकार युनिस

Waqar Younis of Pakistan celebrates the wicket of Nasser Hussain of England

वह एक दौर था जब वकार युनिस की तरह कोई गेंदबाज़ विकेट ही नहीं लेता था। उस दौर में जब भी लोग पाकिस्तान के मैच के बाद टीवी ऑन करते थे, तो वकार के नाम 4-5 विकेट होते ही थे। वकार जब खेलते थे तो बल्लेबाज़ उनके सामने हथियार डाल देते थे। उनका ऐसा खौफ हुआ करता था। उस दौर में वसीम अकरम को स्विंग का किंग माना जाता था। लेकिन वकार अपने डरावनी तेज गेंदों और कटर से बल्लेबाजों के नाक में दम कर देते थे। उनकी ऑफ स्टम्प वाली गेंदे तेजी से अंदर आकर बल्लेबाज़ का स्टम्प उखाड़ देती थीं। वहीं जब वह सीम के सहारे गेंद करते थे तो वह बल्लेबाज़ को एलबीडब्लू होने को मजबूर कर देते थे। और जब गेंद पुरानी हो जाती थी, तो लाजवाब रिवर्स स्विंग कराते थे। जो डेथ ओवरों में किसी भी बल्लेबाज़ के लिए खतरे से कम नहीं था।

#5 वसीम अकरम

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इस लिस्ट में इस नाम का होना किस भी तरह का संदेह नहीं होने देता। जब हम उनकी तुलना महान गेंदबाजों जैसे रिचर्ड हैडली, कोर्टनी वाल्श और अन्य के साथ करेंगे तो हो सकता है लोग भले ही इस बात पर बहस करें। हालांकि कोई भी बहस इस बाएं हाथ के महान तेज गेंदबाज़ के बगैर पूरी नहीं हो सकती है। उनकी सबसे बड़ी खासियत ये थी कि वह किसी भी परिस्थिति में किसी भी गेंद से स्विंग कराने में माहिर खिलाड़ी थे। वह स्विंग के किंग थे। वह जब डेथ ओवरों में रिवर्स स्विंग गेंद डालते थे। तो बल्लेबाज़ के अंदर खौफ भर जाता था। जब वकार युनिस साल 1992 के वर्ल्ड कप में चोटिल हो गये थे। तब अकरम ने पाकिस्तान को चैंपियन बनाने में काफी मदद की थी। वह हर पारी में गजब की गेंदबाज़ी करते थे। कैस्ट्रोल, अनुवादक-मनोज तिवारी

Edited by Staff Editor
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