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पार्थिव पटेल के 5 यादगार लम्हें

SENIOR ANALYST
Modified 05 Dec 2016
रिद्धिमान साहा के चोटिल होने के बाद जब पार्थिव पटेल को मोहाली टेस्ट के लिए भारतीय टीम में चुना गया तो सबकी मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आईं । सबको शक था कि 8 साल बाद वापसी कर पार्थिव क्या अपनी पूरी क्षमता से प्रदर्शन कर पाएंगे ? लेकिन पार्थिव पटेल ने सबको गलत साबित कर दिया । उन्होंने अच्छी वापसी की और मोहाली टेस्ट की दोनों पारियों में अच्छे रन बनाए । पहली पारी में जहां उन्होंने 42 तो दूसरी पारी में 67 रनों की आक्रामक पारी खेली । हाल ही में BCCI.TV से एक इंटरव्यू में इस विकेटकीपर बल्लेबाज ने बताया कि मोहाली टेस्ट में जब उन्होंने गेरेथ बैटी की गेंद पर विजयी  शॉट तो ये उनके लिए बहुत ही यादगार लम्हा था, क्योंकि इससे पहले उन्हें कभी मैच फिनिश करने का मौका नहीं मिला था । पटेल ने कहा ' ये मेरे लिए बहुत ही यादगार लम्हा था । मैं पहले भी टेस्ट मैच खेल चुका हूं, लेकिन इस तरह से कभी विनिंग रन नहीं बनाया था ।' पार्थिव ने कहा कि एक बल्लेबाज के तौर पर खेल को खत्म करना सबसे बड़ी बात होती है । इतने साल बाद वापसी करने के बाद विनिंग रन बनाना मेरे लिए बहुत ही गर्व की बात है । वाकई पार्थिव पटेल के लिए ये बहुत ही यादगार लम्हा था । लेकिन 2002 में करियर की शुरुआत करने के बाद उनके जीवन में कई ऐसे यादगार लम्हे आए ।  भारत के सीमित ओवरों के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के आ जाने से कई खिलाड़ियों को मौका नहीं मिला, क्योंकि धोनी विकेटकीपिंग और बल्लेबाजी दोनों में लाजवाब थे । फिर भी फैंस पार्थिव पटेल को भूले नहीं ।तो आइए आपको लिए चलते हैं उस दौर में और रुबरु करवाते हैं पार्थिव के उन यादगार लम्हों से ।   5. टेस्ट मैचों में सबसे कम उम्र में डेब्यू करने वाले विकेटकीपर- pp1-1480832484-800 साल 2002 में ट्रेंट ब्रिज में इंग्लैंड के खिलाफ उन्होंने मात्र 17 साल की उम्र में टेस्ट डेब्यू किया । इसके साथ ही वो टेस्ट इतिहास में सबसे कम उम्र में डेब्यू करने वाले युवा विकेटकीपर बन गए । इस मैच से पहले पार्थिव ने कोई भी प्रथम श्रेणी मैच नहीं खेला था और जब पहले ही पारी में वो  बिना खाता खोले आउट हो गए तो उनके चयन पर सवाल उठने लगे । हालांकि उन्होंने दूसरी पारी में अपनी दमदार बल्लेबाजी से सबको गलत साबित कर दिया । उस मैच में इंग्लैंड ने पहली पारी में 617 रनों का विशाल स्कोर बनाया, भारतीय बल्लेबाजों के सामने मैच बचाने की चुनौती थी । हालांकि द्रविड़, गांगुली और सचिन तेंदुलकर की बेहतरीन बल्लेबाजी की वजह से भारत ये मैच बचाने में कामयाब रहा । लेकिन उस मैच में पार्थिव के योगदान को भी भुलाया नहीं जा सकता । पार्थिव ने दूसरी पारी में संयम के साथ खेलते हुए 60 गेंदों पर 19 रन बनाए । जो कि मैच बचाने में काफी काम आया । 84 मिनट की उनकी पारी ने ना केवल इंग्लैंड की जीत की उम्मीदों को धूमिल कर दिया, बल्कि 1991-92 से पहली बार लगातार 4 टेस्ट मैच जीतने की इंग्लैंड की हसरतों पर पानी भी फेर दिया ।
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Published 05 Dec 2016
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