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5 बड़ी पारियां जिसमें बल्लेबाज नहीं लगा पाए एक भी बाउंड्री

Abhishek Tiwary

वेस्टइंडीज और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ ट्राई सीरीज के दौरान दक्षिण अफ्रीका के कप्तान एबी डीविलियर्स को बाउंड्री हासिल करने में काफी समय लग गया था। उन्हें बाउंड्री जमाने के लिए 91 गेंदों का इंतज़ार करना पड़ा था। डीविलियर्स के लिए बाउंड्री का सूखा अपने तीसरे एकदिवसीय में खत्म हुआ था जब उन्होंने एडम जाम्पा की गेंद पर पुल शॉट मारकर चौंका हासिल किया था। वन-डे में सबसे तेज अर्धशतक, शतक और 150 रन बनाने का रिकॉर्ड अपने नाम रखने वाले डीविलियर्स ने ट्राई सीरीज के पहले तीन मैचों में बिना किसी बाउंड्री के 91 गेंदों में 54 रन बनाए। इसमें ताज्जुब नहीं कि दक्षिण अफ्रीका आखिर क्यों ट्राई सीरीज के फाइनल में जगह नहीं बना सकी। डीविलियर्स के बाउंड्री नहीं जमा पाने ने पुराने समय की यादें ताजा कर दी, जब बल्लेबाज के लिए चौंका या छक्का जमाना आसन नहीं होता था जैसा कि फटाफट क्रिकेट के युग में हो गया है। बहरहाल, ऐसे कई बल्लेबाज हैं जिन्होंने वन-डे में बड़ी पारी खेली, लेकिन गेंद या तो सीमा रेखा के पार नहीं गई या फिर सिर्फ एक बार गई। टेस्ट में ज्योफ्री बॉयकोट इस सूची में शीर्ष पर आते हैं जब उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 1978-79 में 77 रन की पारी खेली, लेकिन एक बार भी गेंद को सीमा रेखा के पार नहीं भेजा। महज एक बार 4 रन दौड़कर जरुर लिए। वन-डे में कोई भी बल्लेबाज बिना बाउंड्री के शतक नहीं लगा पाया है। 2720405-1467281579-800 रिकी पोंटिंग ने 2003 में बंगलोर में भारत के खिलाफ शतकीय पारी के दौरान सिर्फ एक बाउंड्री हासिल की थी। हालांकि, सात लंबे छक्कों ने पारी के दौरान चौंके नहीं मारने की भरपाई अच्छे ढंग से की थी। चलिए वन-डे की उन पांच पारियों पर नजर डालते हैं, जिसमें बल्लेबाजों ने बाउंड्री बिना लगाए भी बड़ी पारी खेली : #5) 2009 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ जेपी डुमिनी, 93 गेंदों में 71 रन 85664841-1467280477-800 (1) यह मैच एल्बी मोर्केल के 18 गेंदों में 40 रन की आतिशी पारी के लिए याद रखा जाता है, जिसमें उन्होंने 4 छक्के लगाकर दक्षिण अफ्रीका को ऑस्ट्रेलिया पर पहले वन-डे में रोमांचक जीत दिलाई थी। हालांकि, मोर्केल की तूफानी पारी ने जेपी डुमिनी पर से ध्यान हटवा दिया, जो की पूरी पारी के दौरान एक भी बाउंड्री नहीं जमा सके। जेपी डुमिनी ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ शानदार टेस्ट सीरीज के बाद वन-डे टीम में एंट्री पाई थी। टेस्ट सीरीज में उन्होंने पर्थ में बड़े लक्ष्य का पीछा करते समय अच्छी पारी खेली थी और फिर मेलबर्न में 166 रन की पारी खेलकर दक्षिण अफ्रीका को ऐतिहासिक सीरीज जीत दिलाई थी। गौरतलब है की वन-डे मैच में ऑस्ट्रेलिया ने दक्षिण अफ्रीका के सामने 272 रन का लक्ष्य रखा था। लक्ष्य का पीछा करते समय डुमिनी की पारी से लग रहा था कि वह टेस्ट मैच खेल रहे हों। बल्लेबाज को ज्यादा फायदा भी नहीं मिल रहा था क्योंकि वह विश्व के सबसे विशाल मैदानों में से एक - द एमसीजी पर खेल रहे थे। उन्होंने बिना बाउंड्री लगाए 50 रन पूरे किए और टीम को मजबूती दी। डुमिनी ने एक शॉट जरुर बाउंड्री के लिए खेला, लेकिन हसी ने इसे रोक दिया। जब डुमिनी आउट हुए तब वह थके हुए नजर आ रहे थे। उन्होंने 93 गेंदों में 71 रन बनाए थे, जिसमें तीन बार 3 रन दौड़कर लिए, लेकिन बाउंड्री हासिल करने में सफल नहीं हुए। यह पिछले 10 वर्षों में दूसरी अर्धशतकीय पारी है जब बल्लेबाज बाउंड्री नहीं लगा पाया हो। #4) 1985 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ डेस्मंड हेंस, 133 गेंदों में 76 रन 104152803-1467280567-800 अपना दिन होने पर, वह गेंद पर से चमड़ा उधेड़ने की हिम्मत रखते थे और नहीं होने पर शांत रहकर अपने साझेदार गॉर्डन ग्रीनीज को विस्फोटक बल्लेबाजी करते देखते थे। ऐसे थे डेस्मंड हेंस। बेंसन एंड हेजेस वर्ल्ड सीरीज कप में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ निर्णायक फाइनल में 179 रन के लक्ष्य का पीछा करते समय हेंस अपने रंग में जरा भी नजर नहीं आए। माइकल होल्डिंग की घातक गेंदबाजी ने ऑस्ट्रेलिया को 178 रन पर रोक दिया था और वेस्टइंडीज को मैच व सीरीज जीतने के लिए समझदारी से बल्लेबाजी करने की जरुरत थी। मगर वेस्टइंडीज के जल्द ही दो विकेट गिर गए और हेंस ने क्रीज पर जमकर टीम को सुरक्षित करने का फैसला कर लिया। उन्होंने विव रिचर्ड्स के साथ मिलकर टीम को जीत दिलाई। विव ने भी 76 रन की पारी खेली जिसमें 4 चौंके जमाए। हेंस भी 76 रन पर नाबाद रहे लेकिन इस मैच में केवल 10 बाउंड्री ही लगी थी। #3) 1988 में श्रीलंका के खिलाफ किम बार्नेट, 146 गेंदों में 84 रन 1243581-1467280698-800 श्रीलंका के खिलाफ टेक्साको ट्रॉफी के लिए एकमात्र वन-डे खेलने के लिए, इंग्लैंड ने 6 फीट लंबे, गंजे और मूंछ वाले खिलाड़ी को आजमाने का फैसला किया जिसने घरेलू क्रिकेट में ढेर सारे रन बनाए थे। 28 वर्षीय दाएं हाथ के बल्लेबाज को किम बार्नेट के नाम से जाना जाता था। वह क्रीज पर तब बल्लेबाजी करने के लिए उतरे जब इंग्लैंड की टीम 245 रन के लक्ष्य का पीछा कर रही थी और अपने कप्तान ग्राहम गूच का विकेट गंवा चुकी थी। बार्नेट क्रीज पर उतरे और अजीब ही स्टांस लिया। फिर उनकी धीरी पारी की शुरुआत हुई। उनके साथ खेलते समय क्रिस टावरे और ज्योफ्री बॉयकोट ने तेजी से रन बनाए। एलन लम्ब ने भी 70 गेंदों में 66 रन की तेजतर्रार पारी खेली। बार्नेट की पारी का अंत रनआउट होने के साथ हुआ। तब इंग्लैंड की टीम जीत से 32 रन दूर थी। बार्नेट को उनकी पारी के लिए डेब्यू मैच में मैन ऑफ द मैच के खिताब से नवाजा गया। बार्नेट को हालांकि भारत का दौरा करने का मौका नहीं मिला जबकि वह टीम में शामिल थे, क्योंकि वह माइक गेटिंग के रिबेल टूर का हिस्सा थे। बार्नेट पर 1992 तक प्रतिबंध लगा रहा। हालांकि अब भी उन्हें डर्बीशायर के महान खिलाड़ियों में शामिल किया जाता है। #2) 1982 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ जहीर अब्बास, 113 गेंदों में 84 रन 142407050-1467280779-800 एशियाई ब्रैडमैन ने 1970-80 के समय में अपनी अलग पहचान बनाई थी। वह न सिर्फ टेस्ट में शानदार पारियां खेलते थे, बल्कि छोटे प्रारूप में भी खुद को ढाल लेते थे। लिस्ट ए क्रिकेट में अब्बास का प्रदर्शन शानदार रहा और उन्होंने पाक क्रिकेट को अलग स्तर पर पहुंचा दिया। उनका स्ट्राइक रेट 85 के आसपास रहता था। हालांकि मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड के बड़े मैदान ने अब्बास को भी चुनौती दी जब वह बेंसन एंड हेजेस वर्ल्ड सीरीज के 9वें मैच में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ एक विकेट गिरने के बाद बल्लेबाजी करने के लिए उतरे। अब्बास तब लिली और थोम्प्सन व एल्डरमन का सामना कर रहे थे और गेंद को रोक रहे थे। तीन सप्ताह पहले ही अब्बास ने सिडनी क्रिकेट ग्राउंड पर ऑस्ट्रेलिया के इसी गेंदबाजी आक्रमण का सामना करते हुए अद्भुत शतक लगाया था। मगर इस मर्तबा मैच और परिस्थिति अलग थी और अब्बास को इसके मुताबिक खेलना था। उनकी 84 रन की पारी वो भी बिना बाउंड्री के मैच विजयी साबित हुई, उन्हें इस पारी के लिए मैन ऑफ द मैच चुना गया। पाकिस्तानी खिलाड़ियों द्वारा खेली पारियों में से यह एक सर्वश्रेष्ठ पारी रही और इसने साबित कर दिया कि महान क्रिकेटर किसी भी परिस्थिति में खुद को ढाल सकता है। #1) 1994 में भारत के खिलाफ एडम परोरे, 138 गेंदों में 96 रन 1287650-1467280885-800 कीवी विकेटकीपर भले ही संन्यास लेने के बाद माउंट एवरेस्ट पर चढ़े हो, लेकिन 28 अक्टूबर 1994 को एक बाउंड्री भी हासिल करना उनके लिए किसी माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई करने से कम नहीं था, उस दिन तो वह पूरी तरह असफल रहे। तब 23 वर्षीय परोरे भारत के खिलाफ जल्दी बल्लेबाजी करने के लिए उतरे और टीम को दो विकेट की खराब स्थिति से उबारने में जुट गए। दूसरे चोर पर केन रदरफोर्ड वड़ोदरा के दर्शकों का भरपूर मनोरंजन कर रहे थे। केन ने 105 गेंदों में 108 रन की करियर की सर्वश्रेष्ठ पारी खेली। वहीँ परोरे एक बाउंड्री लगाने के लिए तरस गए जबकि उन्होंने केन के साथ 180 रन की साझेदारी की। परोरे क्रीज पर टिके रहे लेकिन बाउंड्री नहीं लगा पाए। वह इसी के साथ अपने करियर का डेब्यू शतक लगाने से भी चूक गए। परोरे की 96 रन की पारी वन-डे में आज भी सर्वश्रेष्ठ पारी है, जिसमें बल्लेबाज एक भी बाउंड्री नहीं लगा पाया हो।

Edited by Staff Editor

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