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5 बड़ी पारियां जिसमें बल्लेबाज नहीं लगा पाए एक भी बाउंड्री

ANALYST
Modified 01 Jul 2016, 19:42 IST
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वेस्टइंडीज और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ ट्राई सीरीज के दौरान दक्षिण अफ्रीका के कप्तान एबी डीविलियर्स को बाउंड्री हासिल करने में काफी समय लग गया था। उन्हें बाउंड्री जमाने के लिए 91 गेंदों का इंतज़ार करना पड़ा था। डीविलियर्स के लिए बाउंड्री का सूखा अपने तीसरे एकदिवसीय में खत्म हुआ था जब उन्होंने एडम जाम्पा की गेंद पर पुल शॉट मारकर चौंका हासिल किया था। वन-डे में सबसे तेज अर्धशतक, शतक और 150 रन बनाने का रिकॉर्ड अपने नाम रखने वाले डीविलियर्स ने ट्राई सीरीज के पहले तीन मैचों में बिना किसी बाउंड्री के 91 गेंदों में 54 रन बनाए। इसमें ताज्जुब नहीं कि दक्षिण अफ्रीका आखिर क्यों ट्राई सीरीज के फाइनल में जगह नहीं बना सकी। डीविलियर्स के बाउंड्री नहीं जमा पाने ने पुराने समय की यादें ताजा कर दी, जब बल्लेबाज के लिए चौंका या छक्का जमाना आसन नहीं होता था जैसा कि फटाफट क्रिकेट के युग में हो गया है। बहरहाल, ऐसे कई बल्लेबाज हैं जिन्होंने वन-डे में बड़ी पारी खेली, लेकिन गेंद या तो सीमा रेखा के पार नहीं गई या फिर सिर्फ एक बार गई। टेस्ट में ज्योफ्री बॉयकोट इस सूची में शीर्ष पर आते हैं जब उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 1978-79 में 77 रन की पारी खेली, लेकिन एक बार भी गेंद को सीमा रेखा के पार नहीं भेजा। महज एक बार 4 रन दौड़कर जरुर लिए। वन-डे में कोई भी बल्लेबाज बिना बाउंड्री के शतक नहीं लगा पाया है। 2720405-1467281579-800 रिकी पोंटिंग ने 2003 में बंगलोर में भारत के खिलाफ शतकीय पारी के दौरान सिर्फ एक बाउंड्री हासिल की थी। हालांकि, सात लंबे छक्कों ने पारी के दौरान चौंके नहीं मारने की भरपाई अच्छे ढंग से की थी। चलिए वन-डे की उन पांच पारियों पर नजर डालते हैं, जिसमें बल्लेबाजों ने बाउंड्री बिना लगाए भी बड़ी पारी खेली : #5) 2009 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ जेपी डुमिनी, 93 गेंदों में 71 रन 85664841-1467280477-800 (1) यह मैच एल्बी मोर्केल के 18 गेंदों में 40 रन की आतिशी पारी के लिए याद रखा जाता है, जिसमें उन्होंने 4 छक्के लगाकर दक्षिण अफ्रीका को ऑस्ट्रेलिया पर पहले वन-डे में रोमांचक जीत दिलाई थी। हालांकि, मोर्केल की तूफानी पारी ने जेपी डुमिनी पर से ध्यान हटवा दिया, जो की पूरी पारी के दौरान एक भी बाउंड्री नहीं जमा सके। जेपी डुमिनी ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ शानदार टेस्ट सीरीज के बाद वन-डे टीम में एंट्री पाई थी। टेस्ट सीरीज में उन्होंने पर्थ में बड़े लक्ष्य का पीछा करते समय अच्छी पारी खेली थी और फिर मेलबर्न में 166 रन की पारी खेलकर दक्षिण अफ्रीका को ऐतिहासिक सीरीज जीत दिलाई थी। गौरतलब है की वन-डे मैच में ऑस्ट्रेलिया ने दक्षिण अफ्रीका के सामने 272 रन का लक्ष्य रखा था। लक्ष्य का पीछा करते समय डुमिनी की पारी से लग रहा था कि वह टेस्ट मैच खेल रहे हों। बल्लेबाज को ज्यादा फायदा भी नहीं मिल रहा था क्योंकि वह विश्व के सबसे विशाल मैदानों में से एक - द एमसीजी पर खेल रहे थे। उन्होंने बिना बाउंड्री लगाए 50 रन पूरे किए और टीम को मजबूती दी। डुमिनी ने एक शॉट जरुर बाउंड्री के लिए खेला, लेकिन हसी ने इसे रोक दिया। जब डुमिनी आउट हुए तब वह थके हुए नजर आ रहे थे। उन्होंने 93 गेंदों में 71 रन बनाए थे, जिसमें तीन बार 3 रन दौड़कर लिए, लेकिन बाउंड्री हासिल करने में सफल नहीं हुए। यह पिछले 10 वर्षों में दूसरी अर्धशतकीय पारी है जब बल्लेबाज बाउंड्री नहीं लगा पाया हो। 
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Published 01 Jul 2016, 19:42 IST
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