5 क्रिकेटर्स जो एक अच्छे कप्तान भी रहे और फिर राष्ट्रीय टीम के कोच भी बने

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अनिल कुंबले के भारतीय टीम के कोच बनने के बाद से हर जगह से तारीफ़ों का तांता लगा है। 45 वर्षीय इस पूर्व भारतीय दिग्गज के नाम भारत की तरफ से टेस्ट क्रिकेट में सबसे ज्यादा 619 विकेट लेने का रिकॉर्ड भी दर्ज है। उन्हें फील्ड के अंदर उनकी आक्रमकता के लिए जाना जाता था। कोच के तौर पर भी उनके ऊपर इसी जज़्बे को आगे बढ़ाने की जरूरत होगी, ताकि टीम ज्यादा से ज्यादा मैच जीत सके। कुंबले ने टीम इंडिया की 2007 से लेकर 2008 तक टेस्ट में कप्तानी भी की हैं, उनके रहते टीम ने 3 मैच जीते और 6 मैच ड्रॉ रहे। और अब इस पूर्व भारतीय कप्तान पर है टीम इंडिया के कोच की ज़िम्मेदारी। एक नज़र डालते हैं 5 अलग-अलग कप्तानों पर, जिन्होंने अपनी राष्ट्रीय टीम की कोचिंग भी की हो। 1- जॉन राइट जॉन राइट न्यूज़ीलैंड के ऐसे पहले बल्लेबाज़ थे, जिन्होंने टेस्ट में 4,000 रन पूरे किए हो। उनके रहते टीम ने 1980 के दशक में शानदार प्रदर्शन किया। राइट ने 82 टेस्ट में 12 शतक लगाए, जिसमें उनका सबसे बड़ा स्कोर 185 का रहा। राइट के नाम 6 टेस्ट टीमों के ख़िलाफ़ शतक भी हैं। उन्होंने टीम की 14 टेस्ट में कप्तानी की थी। वो 1987 से लेकर 1990 तक टीम के कप्तान रहे। उन्होंने अपनी दूसरी पारी कोच के तौर पर शुरू की और उनका भारतीय टीम के साथ कोच के रूप में कार्यकाल भी शानदार रहा। वो 2000 से लेकर 2005 तक टीम के कोच रहे। उसके बाद उन्हें 2010 में न्यूज़ीलैंड का कोच बना दिया गया और उसके बाद कीवी टीम 2011 के वर्ल्ड कप के सेमीफ़ाइनल में पहुंची थी। उन्हीं के रहते टीम ने ओस्ट्रेलिया में 26 सालों में कोई टेस्ट जीता था। 2- जावेद मियांदाद javed-miandad-1467051250-800 जावेद मियांदाद पाकिस्तान के सबसे अच्छे बल्लेबाजों में से एक थे। उन्होंने पाकिस्तान के लिए पहले छ्ह वर्ल्डकप में भी हिस्सा लिया। इसके अलावा उनके नाम वनडे में 7000 रन और टेस्ट क्रिकेट में 8000 रन बनाए थे। वो स्क्वायर ऑफ द विकेट काफी अच्छा खेलते थे, इसके अलावा वो विकटों के बीच में भी तेज़ भागते थे, वो एक आक्रमक बल्लेबाज़ भी थे। उन्हें सब उस छक्के के लिए याद रखते हैं, जो आखिरी गेंद पर चेतन शर्मा को 1987 में लगाया था। मियांदाद 1980 से लेकर 1093 तक टीम के कप्तान भी रहे। उनकी कप्तानी में टीम ने 26 वनडे और 14 टेस्ट मैच जीते। 1996 वर्ल्ड कप के बाद मियांदाद ने संन्यास ले लिया था, मियांदाद ने पाकिस्तान टीम की 3 बार कोचिंग भी की। सबसे पहले वो 1998 में टीम के कोच बने। उनकी शुरुआत भी काफी अच्छी रही और टीम ने शरजाह कप जीता और भारत के खिलाफ पहला टेस्ट ड्रॉ खेला, लेकिन उन्होंने 1999 वर्ल्ड कप से पहले अपना इस्तीफा दे दिया था। उसके बाद उन्हें 2000 में दोबारा कोच बनाया गया और टीम ने पहले शरजाह कप जीता और उसके बाद वेस्टइंडीज में ट्राई सीरीज़ भी अपने नाम की, लेकिन उसके अगले साल उन्हें मैच फिक्सिंग में शामिल होने के कारण टीम से निकाल दिया गया था। वो 2003 में वापस टीम में आए और फिर से शरजाह कप जीता, लेकिन 2004 में उनकी जगह बॉब वूलमर को 2004 में कोच बना दिया गया। वो 2012 में टीम के बल्लेबाज़ी सलाहकार के रूप में एक बार फिर जुड़े। 3- अजित वाडेकर wadekar-1467051378-800 भारत के सबसे सफल कप्तानों और स्लिप फील्डर्स में से एक रहे वाडेकर ने टीम को जीत की आदत डाली। वो बल्लेबाज़ी करने नंबर तीन पर आते थे और उन्होंने 37 टेस्ट में 2000 से ज्यादा रन बनाए। इसके अलावा उनकी कप्तानी में टीम ने इंग्लैंड और वेस्टइंडीज में पहली सीरीज़ जीती। उन्होंने टीम की 16 टेस्ट में कप्तानी की जिसमें से भारत ने 4 टेस्ट जीते। उन्होंने अपना आग़ाज़ 25 साल की उम्र में 1966 में किया था और वो 1974 तक खेले, उसके बाद वो वाडेकर ने संन्यास ले लिया। उसके बाद उन्होंने 1992 में टीम में कोच के रूप में वापसी की और उनके जोड़ीदार बने टीम के कप्तान मोहम्मद अजहरुद्दीन। उनके कोचिंग के दौरान टीम ने इंग्लैंड को 3-0 से शिकस्त दी, उसके अलावा भारत 1992 से लेकर 1994 तक टेस्ट में एक भी मैच नहीं हारी थी। कपिल देव एक और ऐसे वर्ल्ड कप विजेता कप्तान थे, जिन्होंने इंडिया की कोचिंग की, हालांकि वो कोच के रूप में सफल नहीं रहे। 4- मारवन अट्टापट्टु atapattu-1467051637-800 दाएं हाथ के सलामी बल्लेबाज़, जो कि श्रीलंका के लिए 1990 से 2007 तक खेले, उन्होंने सनथ जयसूर्या के साथ मिलकर शानदार सलामी साझेदारी बनाई। उनके नाम 14,000 से ज्यादा अंतर्राष्ट्रीय रन हैं। वो श्रीलंकाई टीम के 9वें कप्तान थे और उनकी कप्तानी में टीम ने 18 टेस्ट मैच में से 8 जीते, तो 63 वनडे में 37 वनडे जीतने में कामयाब रही। उन्होंने कोच के रूप में अपना करियर कनाडा और सिंगापोर की टीम के साथ किया। उसके बाद 2011 में उन्हें श्रीलंका का बैटिंग कोच बनाया गया और 2014 में टीम के हेड कोच बन गए। हालांकि लगातार टेस्ट सीरीज में हारने के बाद, उन्होंने अगले साल ही टीम के कोच पद से इस्तीफा दे दिया। 5- बॉब सिंपसन simpson-1467051764-800 बॉब सिंपसन ने अपने करियर में काफी कुछ किया, वो एक खिलाड़ी थे, कप्तान, कोच और उसके बाद वो ऑस्ट्रेलिया के कमेंटेटर भी रहे। उन्होंने 63 टेस्ट में 10 शतक लगाए, उनका सर्वाधिक स्कोर 311 रन का था, उन्होंने अपनी लेग स्पिन से 73 विकेट भी अपने नाम किए थे। उन्होंने अपने करियर में 4869 रन बनाए, जिसमें से 1381 रन तो सिर्फ 1964 में ही आए, जो कि उस समय एक रिकॉर्ड था। उनकी कप्तानी में टीम ने 39 टेस्ट खेले, जिसमें से 12 जीते। वो टीम के दो बार कप्तान बने, एक बार 1963 से लेकर 1964 तक और दूसरी बार 1977 से लेकर 1978 तक। इसके अलावा रिबेल लीग में टीम में वापसी की, जिसे वर्ल्ड सीरीज क्रिकेट भी कहा जाता है। उन्हें 1986 में टीम का कोच बनाया गया और वो अगले साल तक टीम के कोच रहे। उनकी कोचिंग में टीम ने 1987 का विश्व कप जीता, उसके अलावा ऑस्ट्रेलिया की टीम ने 90 के दशक में पूरी तरह से डोमिनेट किया। ऑस्ट्रेलिया ने 1989 में एशेज़ को अपने नाम किया। लेखक- आद्या शर्मा, अनुवादक- मयंक महता