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सौरव गांगुली की कप्तानी में ज़्यादा आगे न बढ़ पाने वाले क्रिकेटर्स

Rahul Pandey
ANALYST
Modified 17 Feb 2018, 16:55 IST
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भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान के रूप में सौरव गांगुली के कप्तानी काल को व्यापक रूप से भारतीय क्रिकेट के इतिहास में एक बड़े परिवर्तन के रूप में जाना जाता है।क्योंकि इस दौरान भारतीय टीम ने विरोधी टीमों के खिलाफ देश और विदेश में जीतने की आदत विकसित हुई। गांगुली ने उस समय कप्तान के रूप में पदभार संभाला था जब भारतीय क्रिकेट मैच फिक्सिंग से निकलने के बाद संघर्ष कर रहा था। सचिन तेंदुलकर ने मैच फिक्सिंग प्रकरण के बाद थोड़े समय के लिए जिम्मेदारी संभाली, लेकिन असल में गांगुली के नेतृत्व में, मेन इन ब्लू में वह जोश और महानता हासिल की इच्छा आयी। गांगुली की कप्तानी के दौरान कई युवा खिलाड़ियों ने भारतीय टीम में खुद को स्थापित किया और अंततः आधुनिक युग में महान खिलाड़ी बने। युवराज सिंह, वीरेंदर सहवाग, जहीर खान और हरभजन सिंह ऐसे ही कुछ ही उल्लेखनीय नाम हैं। हालांकि, कुछ ऐसे खिलाड़ी भी रहे थे जो अपनी योग्यता साबित करने के लिए पर्याप्त मौके मिलने के बावजूद दीर्घकालिक आधार पर खुद के लिए एक नाम बनाने में नाकाम रहे। गांगुली एक ऐसे कप्तान थे जिन्हें अपने खिलाड़ियों से बहुत कुछ उम्मीद होती थी और शायद ये खिलाड़ी कप्तान की अपेक्षाओं पर खरे नही उतर सके और अंततः कुछ मैच के बाद अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य से गायब हो गए। आइए ऐसे 5 ऐसे खिलाड़ियों पर नजर डालें जिन्होंने गांगुली की कप्तानी के तहत अपना करियर शुरू किया, जिनसे बहुत उम्मीद थी, लेकिन अंततः अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक सफल करियर बना पाने में नाकाम रहे।  

# 5 रितिंदर सिंह सोढ़ी

  अंडर -15 विश्वकप जीतने वाली टीम के कप्तान और 2000 अंडर -19 विश्वकप जीतने वाली टीम के उपकप्तान और महत्वपूर्ण सदस्य, जिसमें युवराज सिंह और मोहम्मद कैफ जैसे प्रतिभाशाली खिलाड़ी थे, वहाँ इस युवा ऑलराउंडर से बहुत उम्मीद की गई थी। पंजाब से आने वाले इस खिलाड़ी को यहां तक ​​कि अगले कपिल देव के रूप में देखे जाने लगा था। गांगुली की कप्तानी के तहत रितिंदर सिंह सोढ़ी ने ज़िम्बाब्वे के खिलाफ अपने अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत की और अफ्रीकी खिलाड़ियों के खिलाफ थोड़ी सफलता हासिल की। श्रृंखला के पांचवें और अंतिम एकदिवसीय मैच में अर्धशतक जमाते हुए उन्होंने दो मैचों के बाद वेस्टइंडीज के खिलाफ 67 रन की पारी खेली। हालांकि, सोढ़ी का बल्ले से जल्द ही ख़राब फॉर्म शुरू हो गया और वह गेंद से समान रूप से अप्रभावी साबित हुए। इस खिलाड़ी से उम्मीद थी कि 50-50 ओवर में भारत के लिए नंबर-6 पर एक दीर्घकालिक खिलाड़ी के रूप में अपनी जगह बना पाएंगे। लेकिन अपने कंधों पर भारी दबाव को कुछ हद तक सोढ़ी संभालने में असमर्थ थे और उन्होंने खुद को भारतीय टीम से बाहर पाया। उन्होंने 18 एकदिवसीय मैचों में 280 रन बनाये और मात्र 5 विकेट लिए।
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Published 17 Feb 2018, 16:55 IST
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