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क्रिकेट इतिहास के 5 शतक जिन्हें ख़ास तवज्जो नहीं मिला

Modified 17 Jul 2017, 21:35 IST
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क्रिकेट के किसी भी प्रारूप में बल्लेबाज़ का शतक मैच में बड़ा अंतर डाल सकता है। किसी भी बल्लेबाज़ का तिहरे अंक में पहुंचना उसकी प्रतिभा से न्याय माना जाता है। शतक लगाने के बाद बल्लेबाजों में अद्भुत जोश पैदा होता है, उनकी ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहता है। वह उसे लम्बे समय तक याद रखना चाहते हैं। लेकिन दुर्भाग्यवश क्रिकेट के इतिहास में कई शतक ऐसे भी लगे जिन्हें उतनी खास तवज्जो नहीं मिली। ये वह पांच शतक हैं, जिन्हें लोगों की तारीफ़ मिलनी चाहिए। लेकिन अन्य कारणों और बेहतरीन बल्लेबाज़ी के आगे इन शतकों को कोई खास तवज्जो नहीं मिली। आइये इस लेख में जानें उन पांच शतकों के बारे में जिन्हें कोई ख़ास तवज्जो नहीं मिली। चेतेश्वर पुजारा: 113 बनाम वेस्टइंडीज, नवम्बर 2013, मुंबई  सचिन तेंदुलकर का ये आखिरी अंतर्राष्ट्रीय मैच था। तकरीबन दो दशक तक भारतीय क्रिकेट की सेवा करने वाले तेंदुलकर ने अपने 200वें टेस्ट मैच में संन्यास की घोषणा की। बीसीसीआई, मीडिया और क्रिकेटिंग वर्ल्ड में सचिन के आखिर मुकाबला का अलग ही माहौल बना हुआ था। भारतीय स्पिनर प्रज्ञान ओझा और आर अश्विन ने इस टेस्ट मैच के पहले ही दिन विंडीज की पूरी टीम को 182 रन पर समेट दिया था। भारतीय सलामी बल्लेबाजों ने अच्छी शुरुआत की, लेकिन उनके बाद मैदान पर पुजारा और तेंदुलकर आये। सचिन उस वक्त सबके लिए केंद्र बिंदु थे और वह अपने फैन्स को निराश नहीं करना चाहते थे। तेंदुलकर ने अपने ट्रेडमार्क शॉट खेले और जल्द ही उन्होंने अपना अर्धशतक पूरा किया। हालांकि तीसरे दिन की सुबह देवनारायण की गेंद पर सैमी ने सचिन का कैच पकड़कर उन्हें शतक से वंचित किया और करोड़ों सपनों को पल भर में बिखेर दिया। उसके बाद विराट कोहली ने बेहतरीन अर्धशतक लगाया। उसके बाद इसी पारी में रोहित शर्मा ने अपने करियर का शतक पूरा किया। जिससे सारा लाइमलाइट दूसरे मुंबईया बल्लेबाज़ की ओर शिफ्ट हो गया। वहीं पुजारा ने अपनी बेहतरीन बल्लेबाज़ी तकनीकी का प्रदर्शन किया। इस दाएं हाथ के बल्लेबाज़ ने नई गेंद और स्पिनरों का जिस तरह से सामना किया वह वाकई काबिलेतारीफ था। पुजारा ने अपने स्ट्रोकप्ले में भी विविधता का परिचय दिया। लेकिन समूचा क्रिकेट जगत सचिन को देख रहा था। सौराष्ट्र के इस बल्लेबाज़ ने पहली गेंद पर पॉइंट में चौका जड़कर अपना आगाज किया था। उसके बाद स्ट्रैट और कवर ड्राइव से खुद मास्टर बल्लेबाज़ साबित किया था। 146 गेंदों में 21 चौके की मदद से पुजारा ने अपना शतक पूरा किया। वह 113 रन बनाकर आउट गये थे। लेकिन टीम को मजबूती दे गये थे।
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Published 17 Jul 2017, 21:35 IST
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