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5 क्रिकेटर जिनकी लेट एंट्री ने उन्हें दिग्गज बनाया

Modified 12 Dec 2016
महान करियर की जब बात होती है, तो लोगों की जुबां पर कुछ ऐसे शब्द आते हैं... लाजवाब समर्पण, बहुत लोग इसे किस्मत भी कहते हैं। हालांकि ये सारी एक महान करियर के आकार लेने में मायने रखती हैं। लेकिन इसमें सबसे बड़ी भूमिका चयनकर्ताओं की भी होती है। जो कई खिलाड़ियों को इग्नोर करते हैं। या फिर देर से मौका देते हैं। जिससे बहुत से महान खिलाड़ियों का करियर काफी देर से शुरू होता है। साल 2000 में भारत के मध्यक्रम में और ऑस्ट्रेलिया के अंतिम एकादश में जगह पाना बेहद ही मुश्किल काम था। इस वजह से बहुत से महान खिलाड़ी टीम में जगह नहीं पा सके। लेकिन जब उन्हें मौका मिला तो देर तो हो चुकी थी, लेकिन उन्होंने क्रिकेट की दुनिया में अहम योगदान दिया। आज हम ऐसे ही 5 खिलाड़ियों के बारे में बता रहे हैं। स्टुअर्ट मैकगिल, क्रिस रोजर्स जैसे खिलाड़ी इसी युग की देन हैं: माइकल हसी हसी का कद ऑस्ट्रेलिया के पूर्व दिग्गज ब्रेडमैन के बराबर था। लेकिन चयनकर्ताओं ने उन्हें देर से टीम में मौका दिया था। साल 2005 में जब हसी ने डेब्यू किया तो उनकी उम्र 30 साल थी। साथ ही हसी ने 37 वर्ष की उम्र में साल 2013 में क्रिकेट को अलविदा कह दिया। वास्तव में ऑस्ट्रेलियाई टीम को हसी को युवावस्था में मौका देना चाहिए था। लेकिन उन्हें देर से मौका मिला इसलिए उनका करियर बेहद छोटा रहा। अपने 7 साल के करियर में हसी ने 79 टेस्ट मैचों में 51 के औसत से 6235 रन बनाये थे। जिसमें 19 शतक और 29 अर्धशतक लगाये थे। इसके अलावा 185 वनडे में हसी ने 48 के औसत से 5442 रन बनाये थे। उनके इसी रिकॉर्ड के चलते उन्हें मिस्टर डिपेंडेबल कहा जाता था। वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया के इस खिलाड़ी ने वेस्टइंडीज के खिलाफ अपना डेब्यू किया था। जिसके बाद हसी ने अगले चार मैचों में 3 शतक ठोंके थे। हसी ने आखिरी 6 टेस्ट मैचों में भी 3 शतक बनाये थे और अपनी शर्तों पर टीम से बाहर हुए थे। उन्हें इस बात का रिग्रेट रह गया था कि वह ब्रिसबेन टेस्ट में 195 रन ही बना पाए थे।
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Published 12 Dec 2016
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