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5 ऐतिहासिक टेस्ट मैच जो भारत हर हाल में जीत सकता था

Modified 02 Oct 2016, 22:32 IST
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भारतीय टीम 500वां टेस्ट खेलकर  क्रिकेट की दुनिया में एक मील का पत्थर पार कर चुकी है और भारतीय क्रिकेट के स्वर्णिम इतिहास की यादें ताज़ा करना किसी लालच से कम है। हालांकि इतिहास में हुए उतार का जश्न भी मनाना उतना ही महत्वपूर्ण है, जितना की नई बुलंदियां छूने का। क्योंकि भारतीय क्रिकेट टीम की शुरुआत इंग्लैंड , ऑस्ट्रेलिया और वेस्टइंडीज़ जैसी टीमों के लिए  महज़ एक अभ्यास कराने वाली टीम की तौर पर हुई थी, लेकिन यकीकन भारत ने उस दौर से काफी ऊंचाईयां छूई हैं। भारतीय टीम आज खेल के तीनों फॉर्मैट्स में एक प्रमुख टीम है और भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) निःसंदेह दुनिया का सबसे अमीर और ताकतवर बोर्ड है। लेकिन क्रिकेट के असल रूप में,  भारतीय टीम ने बीते सालों में इस खेल को वो दिया है जो और कोई देश न दे सका,  'जूनून'। असलियत यह है कि आज कोई भी और देश बेधड़क होकर नहीं खेलता जैसे भारतीय टीम खेलती है,  वेस्टइंडीज़ की टीम इस मामले में अपवाद जरूर हो सकती है। आज तक भारतीय टीम के साथ कई बार दिल तोड़ देने वाले हादसे हुए हैं। 7 बार भारत को हार का सामना तब करना पड़ा जब विपक्षी टीम लक्ष्य का पीछा करते हुए 6 या ज्यादा विकेट खो चुकी थी। 10 मौकों पर टीम इंडिया को हार का सामना तब करना पड़ा जब वो लक्ष्य हासिल करने से 50 रन से कम की दूरी पर थी। भारत टीम एतिहासिक टाई टेस्ट मैच का हिस्सा बनीं। 3 बार ऐसे टेस्ट ड्रॉ हुए जो जीते जा सकते थे जिसमें जीत का  फासला 10 के अंदर था , ऐसे ही 5 मैचों पर आईए नजर डालते हैं जो भारत जीत सकता था , लेकिन चूक गया: 


  1. ) जनवरी 1999, चेन्नई, भारत 12 रन से पाकिस्तान से हारा

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संभवत: सचिन तेंदुलकर के लिए सबसे बड़ा शॉक और भारतीय क्रिकेट इतिहास में सबसे दिलतोड़ देने वाला टेस्ट , इस मैच को टेस्ट क्रिकेट इतिहास के सबसे बेहतरीन मुकाबले की संज्ञा भी प्राप्त है। ये मुकाबला न जाने कितनी बार पलटा, लेकिन इस मशहूर टसल का फैसला खेल के आखिरी घंटे में हुआ । इस मैच में भारतीय दर्शकों ने भी निःस्वार्थ भाव से पाकिस्तान के खेल की सराहना की और पाकिस्तान की जीत में खूब तालियां बजाई बावजूद इसके की भारत के लिए ये दिल दहला देने वाली हार थी। पाकिस्तान पहले बल्लेबाज़ी करते हुए टेस्ट के पहले ही दिन  महज 238 पर ऑलआउट हो गया । और अगर मोईन खान और मो. यूसुफ अर्धशतकीय पारी न खेलते तो ये स्कोर शर्मिंदा करने वाला होता। अनिल कुंबले ने पहली पारी में 6 विकेट झटके। जवाब में भारत का हाल भी काई खास नहीं था। सौरव गांगुली और द्रविड़ के अर्धशतकीय पारियों की बदौलत भारत टीम 254 तक पहुंची । सक़लैन मुश्ताक ने 5 विकेट लिए, जिसमें सचिन का विकेट भी शामिल था, वह 0 पर आउट हुए । दूसरी पारी में पाकिस्तान का एक्सपेरिमेंट काम आया और शाहिद अफरीदी ने 191 गेंद पर 141 रन की ताबड़तोड़ पारी खेलकर पाकिस्तान को 286 तक पहुंचा दिया जबकि वेंकटेश प्रसाद ने पारी में 6 विकेट लिए और भारत को 271 रन का टारगेट मिला। भारत का स्कोर 5 विकेट पर 82 रन था, लेकिन जब तक सचिन क्रीज़ पर थे तब कोई भारतीय हार मानने को तैयार नहीं था। कमर के दर्द और चेन्नई की गर्मी से जूझते हुए सचिन ने अपने करियर के शानदार शतकों में से एक सैकड़ा जड़ा।  सचिन ने छठे विकेट के लिए नयन मोंगिया के साथ 136 रन की साझेदारी की। इससे पहले कि सचिन का दर्द असहनीय हो जाए मोंगिया तेज़ रन बनाकर मैच जल्दी खत्म करना चाहते थे , लेकिन वो आउट हो गए और भारत को जीत लिए 53 रन की जरूरत थी। सचिन की जांची परखी पारी आखिरकार पीठ दर्द के सामने जवाब देने लगी और सकलैन को सचिन का अमूल्य विकेट मिल गया। मास्टर उस वक्त आउट हुए जब टीम जीत से महज 17 रन दूर थी। हालांकि भारत की बाकी तीन विकेट सिर्फ 4 रन की अंदर ही गिर गई और सकलैन ने एक बार फिर 5 विकेच लिए. लक्ष्य का पीछा करते हुए अतयंत दबाव में खेली सचिन की इस झुझारू पारी का अयोग्य अंत हुआ। ये वो असाधारण मौका था जब सचिन मैन ऑफ द मैच का अवॉर्ड लेने भी नहीं आए।
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Published 02 Oct 2016, 22:32 IST
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