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महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में भारत की 5 सबसे बड़ी हार

ऋषि
ANALYST
Modified 20 Nov 2017, 13:19 IST
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महेंद्र सिंह धोनी का करियर अब अंतिम पड़ाव में है और टी20 मैचों में उनके स्थान पर भी अब सवाल खड़े होने लगे लेकिन उन्होंने अपने खेल और कप्तानी से क्रिकेट जगत में में जो मुकाम हासिल किये हैं उनकी बराबरी करना बिल्कुल आसान नहीं है। उनकी कप्तानी में भारतीय टीम ने 2007 टी20 विश्वकप, 2011 एकदिवसीय विश्वकप और 2013 चैंपियंस ट्रॉफी अपने नाम किया। उनकी कप्तानी में भारतीय टीम ने 178 मैचों में जीत हासिल की, जिसमें टेस्ट में 73, एकदिवसीय में 110 और टी20 में 41 जीत है। इसी वजह से धोनी का नाम भारतीय क्रिकेट इतिहास में सुनहरे अक्षरों में लिखा जायेगा। आंकड़ों के हिसाब से वह भारत के सबसे सफल कप्तान है और यह विकेटकीपर बल्लेबाज एकदिवसीय मैचों के सबसे महान फिनिशरों में एक माना जाता है। दबाव में भी शांत रहने की उनकी क्षमता उन्हें औरों से अलग बनती है और इसी वजह से वो मुश्किल वक्त में भी शांत रहकर सही फैसले ले पातें हैं। हालांकि कई बार ऐसे भी मौके आये हैं जब उनके इस स्वभाव की वजह से उन्हें आलोचनाएं भी झेलनी पड़ी हैं खासकर जब टीम विदेशी सरजमीं पर लगातार हारी है। घरेलू मैचों में धोनी ने शानदार कप्तानी की है लेकिन विदेशों में वो भी खासकर टेस्ट मैचों में उनकी कप्तानी ढीली नजर आई है और इसी वजह से टीम को लगातार हार का सामना करना पड़ा था। आज हम धोनी की कप्तानी के दौरान भारत की 5 सबसे बड़ी हार के बारे में आपको बतायेंगे #5.  बनाम न्यूज़ीलैंड, दाम्बुला (एकदिवसीय त्रिकोणीय श्रृंखला, 2010) c258f-1510847913-800 मेजबान श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट सीरीज के पहले मैच में हार के बाद वापसी करते हुए टेस्ट सीरीज को 1-1 से बराबरी कराने वाली भारतीय टीम आत्मविश्वास के साथ त्रिकोणीय श्रृंखला में उतरी। भारत और श्रीलंका के अलावा सीरीज की तीसरी टीम न्यूज़ीलैंड थी। भारत और न्यूज़ीलैंड के बीच हुआ उस सीरीज का पहला मैच जो केन विलियम्सन का भी पहला मैच था, भारतीय टीम के लिए बुरे सपने की तरह रहा। धोनी की सेना 88 रनों पर सिमट गयी और न्यूज़ीलैंड ने 200 रनों से यह मैच जीत लिया। पहले बल्लेबाजी करते हुए न्यूज़ीलैंड की टीम ने 288 रन बनाए और उनकी तरफ से रॉस टेलर ने 95 और स्कॉट स्टायरिस ने 89 रनों की पारी खेली। भारत की शुरुआत ठीक-ठाक रही और पहले विकेट के लिए 39 रनों की साझेदारी हुई। हालांकि उसके बाद एक भी बल्लेबाज ने जिम्मेदारी के साथ नहीं खेला और अगले 49 रनों के भीतर पूरी टीम पवेलियन लौट गई। भारतीय टीम 30 ओवर भी नहीं खेल पाई और उसे 200 रनों से हार का सामना करना पड़ा। रनों के मामले में यह भारत की चौथी सबसे बड़ी हार थी। भारतीय बल्लेबाजों का ना चलना काफी अचंभित करने वाला था क्योंकि मैच भारतीय उपमहाद्वीप में हो रहा था जहां की पिचों पर न्यूज़ीलैंड की टीम को हमेशा परेशानी हुई है। इस हार के बावजूद भारत ने सीरीज के फाइनल तक का सफर तय किया लेकिन वहां उसे मेजबान श्रीलंका के हाथों हार का सामना करना पड़ा।
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Published 20 Nov 2017, 13:19 IST
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