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भारतीय क्रिकेट इतिहास के 5 बड़े कथन जो दिग्गजों ने कहे और फ़ैन्स हुए भावुक

Himanshu Kothari
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भारतीय क्रिकेट इतिहास में कई घटनाएं देखने को मिली हैं, अलग-अलग मामलों में उन घटनाओं पर प्रतिक्रियाएं भी भिन्न-भिन्न होती हैं। कुछ इन घटनाओं के बारे में खुले तौर पर अपने विचार रखते हैं तो कुछ उनका वर्णन करने के दूसरे तरीके ढूंढ़ लेते हैं। वहीं कुछ इन घटनाओं को लेकर चुप रहना ही बेहतर समझते हैं। यहां वे 5 उदाहरण दिए गए हैं जब भारतीय क्रिकेटरों से पूछे गए किसी विशेष प्रश्न को लेकर उन्होंने सर्वश्रेष्ठ जवाब दिया। नोट: उदाहरण केवल अकेले लेखक के विचार हैं। कई अन्य उद्धरण भी कहे गए हैं जो कि समान रूप से प्रभावकारी रहे हैं।

#5 अपने टेस्ट संन्यास के दिन महेंद्र सिंह धोनी

महेंद्र सिंह धोनी ने भारतीय क्रिकेट टीम की काफी लंबे समय तक कप्तानी की है। अपनी कप्तानी के दौरान महेंद्र सिंह धोनी ने टीम को नई बुलंदियों तक पहुंचा दिया। 30 दिसंबर 2014 को भारतीय टीम के विकेटकीपर बल्लेबाज महेंद्र सिंह धोनी ने क्रिकेट के सबसे लंबे फॉर्मेट टेस्ट से संन्यास लेने की घोषणा कर दी। महेंद्र सिंह धोनी के इस फैसले का किसी को भी अंदाजा तक नहीं था। न ही उनके टीम के साथी और न ही विपक्षी खिलाड़ियों को इस बात का अंदाजा था। यहां तक कि मीडिया, जो सभी कोनों से अंदरूनी सूचनाएं इकट्ठा करने में माहिर है, उसे भी इस बात की भनक तक नहीं थी। लेकिन महेंद्र सिंह धोनी ने टेस्ट क्रिकेट की सीरीज के मध्य में ही अपने संन्यास का ऐलान कर दिया। उनकी अंतिम प्रेस कॉन्फ्रेंस टेस्ट के पोस्टमार्टम के तौर पर साबित हुई। जब उनसे पूछा गया कि उन्हें भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच निचले क्रम की बल्लेबाजी में इतना बड़ा अंतर क्यों लगा, तो उन्होंने कहा, "अब तो पेटा भी कह चुका है कि आप पूंछ को समाप्त नहीं कर सकते हैं।"

#4 आईपीएल 2013 में स्पॉट फिक्सिंग स्कैंडल के बाद राहुल द्रविड़

राहुल द्रविड़ भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान भी रह चुके हैं। अपनी कप्तानी में उन्होंने कई उतार चढ़ाव भी देखे हैं। राहुल द्रविड़ उन खिलाड़ियों में से एक हैं जो शांत रहना ज्यादा पसंद करते हैं। राहुल द्रविड़ एक ऐसे खिलाड़ी के तौर पर भी जाने जाते हैं जिन्होंने अपने करियर के दौरान अपनी भावनाओं को ज्यादा जाहिर नहीं किया। दाएं हाथ के खिलाड़ी राहुल द्रविड़ हमेशा से ही अपने खेल पर ज्यादा फोकस करते रहे हैं। मैदान पर वो किस तरह का खेल खेल रहे हैं इस पर ही उनका पूरा ध्यान रहता था। इंडियन प्रीमियर लीग 2013 के दौरान स्पॉट फिक्सिंग स्कैंडल का खुलासा हुआ। इसमें राजस्थान रॉयल्स के तीन खिलाड़ियों पर स्पॉट फिक्सिंग का आरोप लगा। तब राहुल द्रविड़ अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख पाए और खुलकर सामने आए। राहुल द्रविड़ ने कहा, "मैं झूठ नहीं बोलूंगा, यह हमारे लिए एक कठिन दौर था। यह टीम के लिए एक झटके के समान था, ऐसा कुछ ऐसा था जिसका मैंने कभी अनुभव नहीं किया था। यह किसी तरह से मारे जाने की तरह है।"

#3 ब्रायन लारा के सर्वाधिक टेस्ट रन का रिकॉर्ड तोड़ने के बाद सचिन तेंदुलकर

क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर के नाम क्रिकेट जगत के कई रिकॉर्ड है। भारतीय क्रिकेट टीम की ओर से खेलते हुए सचिन तेंदुलकर ने कई कीर्तिमान स्थापित किए हैं, जिसे तोड़ पाना किसी भी क्रिकेटर के लिए आसान नहीं होगा। रिकॉर्ड की इस कड़ी में सचिन तेंदुलकर के नाम टेस्ट क्रिकेट में सर्वाधिक रन बनाने का रिकॉर्ड भी शामिल है। हालांकि सचिन तेंदुलकर से पहले टेस्ट क्रिकेट में सर्वाधिक रन बनाने का रिकॉर्ड वेस्टइंडीज के महान खिलाड़ी ब्रायन लारा के नाम दर्ज था। लेकिन 17 अक्टूबर 2008 के दिन सचिन तेंदुलकर ब्रायन लारा से आगे निकलने का कारनामा कर चुके थे। सचिन तेंदुलकर ने इस दिन ब्रायन लारा के टेस्ट क्रिकेट में सर्वाधिक रनों का रिकॉर्ड तोड़कर अपने नाम कर लिया। मोहाली के मैदान पर दोपहर में सचिन तेंदुलकर ने टेस्ट क्रिकेट में इतिहास रच दिया और सबसे अधिक रनों के मामले में ब्रायन लारा के रिकॉर्ड को पछाड़ते हुए आगे निकल गए। दिन के खेल की समाप्ति के बाद दाएं हाथ के बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर को अपनी उपलब्धि पर टिप्पणी करने के लिए कहा गया था। जिसके बाद उन्हें कहा, "लोग आप पर पत्थर फेंकते हैं और आप उन्हें मील के पत्थर में परिवर्तित करते हैं।"

# 2011 के विश्व कप में दक्षिण अफ्रीका से हारने के बाद एमएस धोनी

साल 2011 का विश्व कप भारत में खेला गया। इस साल के विश्व कप में टीम इंडिया की कप्तानी महेंद्र सिंह धोनी के हाथों में थी। विश्व कप की इस खिताबी लड़ाई में भारतीय टीम ने भले ही बाजी मार ली और खिलाब को अपने नाम कर लिया लेकिन शुरुआती मैचों में भारत को दक्षिण अफ्रीका के हाथों हार का सामना भी करना पड़ा था। 2011 में विश्व कप जीत से पहले खेले गए मुकाबलों में भारत की एक मामूली गड़बड़ी, नागपुर में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ भारत के लिए हार लेकर आई। विश्व कप 2011 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ खेले गए इस मुकाबले में भारतीय टीम पहले बल्लेबाजी करते हुए 1 विकेट के नुकसान पर 267 रन बना चुकी थी और मेजबान टीम मजबूती से एक बड़े स्कोर की तरफ कदम बढ़ा रही थी। लेकिन इसके बाद जो कुछ भी हुआ, उसका किसी को अंदाजा तक भी नहीं था। इस मैच में गौतम गंभीर आउट हुए और फिर बाक़ी की टीम ताश के पत्तों की तरह बिखर गई। भारतीय टीम के आखिरी 9 विकेट महज 29 रनों पर ही गिर गए थे। इस मैच में भारत ने 296 रन बनाए और आखिर में भारतीय टीम को इस मुकाबले में दक्षिण अफ्रीका के हाथों हार का सामना करना पड़ा। मैच के बाद के प्रेजेंटेशन में एमएस धोनी ने कहा, "अहम ये है कि आप भीड़ के लिए नहीं खेलते बल्कि अपने देश के लिए खेलते हैं।"

#1 विश्व कप जीतने के बाद सचिन तेंदुलकर पर विराट कोहली

भारतीय क्रिकेट टीम ने साल 2011 में विश्व कप को अपने नाम कर लिया था। साल 2011 की विश्व कप की जीत सचिन तेंदुलकर के लिए काफी अहम थी। अपने लंबे करियर के दौरान सचिन तेंदुलकर इससे पहले एक भी विश्व कप जीतने में असफल रहे थे। साल 2003 में भी सचिन तेंदुलकर विश्व कप के खिताब से सिर्फ एक कदम की दूरी पर ही रह गए थे। जब भारत ने 2011 के विश्व कप जीता, तो ये सचिन तेंदुलकर के लिए आखिरी सम्मान के तौर के देखा गया था। विश्व कप जीतने के बाद कई खिलाड़ियों ने इस बात का उल्लेख किया कि सचिन तेंदुलकर के लिए ये काफी भावुक यात्रा थी और उन्होंने सचिन के लिए इस खिताब को जीता है। हालांकि, विराट कोहली ने किसी अन्य खिलाड़ी से बेहतर इसका वर्णन करते हुए कहा, "तेंदुलकर ने 21 सालों तक देश का भार उठाया है, अब ये वक्त था कि हम उन्हें उठाएं।'' लेखक: शंकर नारायण अनुवादक: हिमांशु कोठरी

Edited by Staff Editor
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