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5 प्रतिभाशाली भारतीय क्रिकेटर जिनका करियर लंबा नहीं हो सका

Daya Sagar
ANALYST
Modified 18 Jan 2018, 09:30 IST
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क्रिकेट अनिश्चितताओं का खेल है। इस खेल में यह जरूरी नहीं है कि आप जितना बोयेंगे उतना ही आप काटेंगे। कुछ प्रतिभाशाली क्रिकेटर ऐसे ही होते हैं जिनके अंदर प्रतिभाएं तो अकूत भरी होती हैं पर वह अपने इस अकूत संपत्ति का इस्तेमाल अपने करियर में नहीं कर पाते हैं। उनके पास क्रिकेट खेलने के लिए जरूरी निरंतरता, टेंपरामेंट और कड़ी मेहनत करने की क्षमता तो होती है पर वह आश्चर्यजनक और निराशाजनक रूप से सफल नहीं हो पाते हैं। तो आज यहां कुछ ऐसे ही क्रिकेटरों पर एक नजर डालते हैं, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने प्रतिभा के साथ न्याय नहीं कर सकें।

#5 विनोद कांबली

Vinod Kambli   विनोद कांबली एक बेहद प्रतिभाशाली बल्लेबाज थे जो अपने आकर्षक स्ट्रोक और मैदान पर अपनी आक्रामकता के लिए जाने जाते थे। कांबली ने अपने पहले सात टेस्ट मैचों में ही दो दोहरे शतक और दो शतक के साथ अपने धमाकेदार करियर की शुरूआत कर ली थी। अपनी आक्रमकता और निडर अप्रोच के साथ कांबली ने घोषणा कर दी थी कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को जल्द ही एक नया सितारा मिलने वाला है। इससे पहले कांबली ने पहले गेंद पर ही छक्का लगाकर अपने रणजी ट्रॉफी करियर की भी शानदार शुरूआत की थी। वहीं वनडे क्रिकेट में भी वह 1994 में शारजाह में ऑस्ट्रेलियाई दिग्गज शेन वॉर्न पर एक ओवर में 22 रन बना चुके थे। वह 1000 टेस्ट रनों तक पहुंचने वाले सबसे तेज भारतीय थे और उन्होंने सिर्फ 14 पारियों में ही इस मील के पत्थर को पा लिया था। लेकिन दुर्भाग्य से इसके बाद कांबली का अंतरराष्ट्रीय करियर लगातार ढलने लगा और चयनकर्ता उन्हें चयन के लिए अयोग्य माना लिए। उन्होंने 23 साल की उम्र में अपना अंतिम टेस्ट मैच खेला। उनका टेस्ट करियर 54.20 की शानदार औसत के साथ 1084 रन पर खत्म हुआ। कांबली को अब एकदिवसीय क्रिकेट का स्पेशलिस्ट बल्लेबाज माने जाने लगा। यही कारण है कि वह 100 से अधिक एकदिवसीय मैच खेल सकें। 1996 के बाद से कांबली के एकदिवसीय प्रदर्शन में भी गिरावट आने लगी और उन्हें एकदिवसीय टीम से भी जल्द ही हटा लिया गया। इसके पहले तक वह टीम में नियमित मध्यक्रम के बल्लेबाज थे। हालांकि कांबली को बाद में वापसी के थोड़े मौके मिले लेकिन वह इसका फायदा नहीं उठा सके और दबाव के आगे बिखर गए। कांबली का एकदिवसीय करियर 2000 में समाप्त हुआ। उन्होंने तब तक एकदिवसीय क्रिकेट में 32.59 की औसत से 2477 रन बनाए थे। कई जानकारों का मानना है कि क्रिकेट के मैदान के अंदर और बाहर कांबली का टेंपरामेंट धीरे-धीरे खराब होता जा रहा था। वह धीरे-धीरे शराब के लत का शिकार हो गए थे और टीम के साथियों के साथ भी उनके संबंध खराब हो चले थे। यहां तक कि उनके बचपन के दोस्त सचिन से भी उनके संबंध खराब होने की खबर आ रही थी। कारण कुछ भी रहा हो पर सच्चाई ये है कि भारतीय क्रिकेट ने एक बेहद प्रतिभाशाली क्रिकेटर खो दिया था।
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Published 18 Jan 2018, 09:30 IST
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