वनडे के 5 बेहतरीन भारतीय खिलाड़ी जो टेस्ट क्रिकेट में नाकाम रहे हैं

जब भी कोई खिलाड़ी एक फ़ॉर्मेट में अच्छा प्रदर्शन करता है, तब हमेशा ये सवाल किया जाता है कि क्या वो अन्य फ़ॉर्मेट में भी इतना ही बेहतरीन प्रदर्शन कर पाएंगा? हांलाकि कुछ खिलाड़ी हैं जो ऐसा करने में कामयाब हो जाते हैं, लेकिन सभी फ़ॉर्मेट का विशेषज्ञ होना हर खिलाड़ी के बस की बात नहीं है। ये बात तो समझ में आती है कि एक टेस्ट विशेषज्ञ के लिए वनडे में बेहतर खेल दिखा पाना मुश्किल होता है, लेकिन ऐसा भी देखने को मिलता है कि वनडे का मशहूर खिलाड़ी भी टेस्ट क्रिकेट में नाकाम साबित होता है। हांलाकि वनडे क्रिकेट में बल्लेबाज़ों को तेज़ी से रन बनाना होता है, वहीं टेस्ट क्रिकेट में हालात के हिसाब से ख़ुद को ढालना पड़ता है। भारतीय क्रिकेट की बात करें तो कई ऐसे खिलाड़ी हैं जो भारतीय वनडे टीम के नियमित सदस्य रहे हैं, लेकिन क्रिकेट के सबसे लंबे फ़ॉर्मेट में वो नाकाम रहे हैं। हम यहां ऐसे ही 5 भारतीय खिलाड़ियों को लेकर चर्चा कर रहे हैं।

#5 अजय जडेजा

अजय जडेजा अपने मस्त अंदाज़ और जोश के साथ बल्लेबाज़ी करने के लिए जाने जाते थे। वो 90 के दशक में टीम इंडिया के अहम बल्लेबाज़ थे। वो टीम के लिए बेहतरीन फ़िल्डिंग करते थे, इसके अलावा विकेट्स के बीच में दौड़ लगाने में उनका जवाब नहीं था। भले ही उन्होंने 196 वनडे मैच में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई हो, लेकिन उन्हें सिर्फ़ 15 ही टेस्ट मैच खेलने का मौका मिला था। दाएं हाथ के इस बल्लेबाज़ की सबसे बड़ी परेशानी ये थी कि वो तेज़ और स्विंग गेंद को खेलने में सहज नहीं थे। उनकी ये कमज़ोरी विदेशी दौरों पर साफ़ नज़र आती थी। जडेजा ने अपना आख़िरी टेस्ट मैच साल 2000 में दक्षिण अफ़्रीका के ख़िलाफ़ खेला था।

#4 आशीष नेहरा

आशीष नेहरा के क्रिकेट करियर में चोट का बहुत ज़्यादा दख़ल रहा है। वो 2000 के दश में तेज़ गेंद फेंकते थे। वनडे में उन्होंने टीम इंडिया के लिए कई बार मैच जिताऊ गेंदबाज़ी की है। हांलाकि नेहरा अपनी इस कामयाबी को टेस्ट क्रिकेट में दोहराने में नाकाम रहे हैं। उन्होंने 17 टेस्ट मैच में 42.40 की औसत से 44 विकेट हासिल किए। नेहरा ने आख़िरी टेस्ट मैच साल 2004 में खेला था, उस वक़्त उनकी उम्र महज़ 25 साल की थी।

#3 सुरेश रैना

रैना ने साल 2005 में महज़ 18 साल की उम्र में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में डेब्यू किया था। वो बीच के ओवर में तेज़ रन बनाने के लिए जाने जाते हैं। साल 2010 में उन्हें पहली बार टेस्ट मैच खेलने का मौका मिला। अपने पहले ही मैच में उन्होंने शानदार शतक लगाया था। ऐसा लगने लगा था कि वो टेस्ट क्रिकेट की लंबी पारी खेलेंगे। हालांकि इंग्लैंड दौरे पर उनकी कमज़ोरी सामने आई, वो स्विंग गेंद का सामना आसानी से नहीं कर पाए और इस वजह से वो टेस्ट टीम से बाहर हो गए थे। साल 2014-15 के ऑस्ट्रेलियाई दौरे में उनकी वापसी हुई थी, लेकिन वो ज्यादा कामयाब नहीं हो पाए।

#2 युवराज सिंह

इस बात में ज़रा भी शक नहीं है कि युवराज सिंह वनडे क्रिकेट में भारत के महानतम खिलाड़ियों में से एक हैं। उन्होंने जो टीम इंडिया के लिए योगदान दिया है, वो कभी भुलाया नहीं जा सकता। वहीं टेस्ट क्रिकेट की बात करें तो युवी उतने कामयाब नहीं हो पाए जितना उनसे उम्मीद की गई थी। बाएं हाथ के इस बल्लेबाज़ को बहुत मौके मिले थे, लेकिन वो टेस्ट में ख़ुद को स्थापित नहीं कर पाए। उन्होंने 10 साल के दरमियान महज़ 40 टेस्ट मैच खेले हैं।

#1 रोहित शर्मा

रोहित शर्मा का टेस्ट करियर काफ़ी दिलचस्प रहा है। उन्होंने वनडे में ख़ुद को स्थापित करने में काफ़ी वक़्त लगाया। मध्य क्रम में लगातार बुरा प्रदर्शन करने के बाद धोनी ने साल 2013 की आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफ़ी में उन्हें ओपनिंग की ज़िम्मेदारी सौंपी। उसके बाद से रोहित ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। साल 2013 में ही रोहित ने वेस्टइंडीज़ की ख़िलाफ़ अपना पहला टेस्ट मैच खेला था, और पहले 2 टेस्ट मैच में लगातार 2 शतक लगाए थए। हांलाकि वो अपने इस बेहतरीन फ़ॉम को बरक़रार रखने में नाकाम रहे। रोहित टेस्ट मे ग़ैर ज़िम्मेदाराना शॉट खेलने की वजह से मुश्किल में आए थे। रोहित शर्मा ने अपना आख़िरी टेस्ट मैच इस साल दक्षिण अफ़्रीका के ख़िलाफ़ खेला था। उन्हें इंग्लैंड के ख़िलाफ़ आगामी टेस्ट सीरीज़ के लिए भी नहीं चुना गया है।

लेखक- रैना सिंह

अनुवादक- शारिक़ुल होदा

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