भारतीय मूल के 5 खिलाड़ी जिन्होंने भारत के खिलाफ की अपने क्रिकेट करियर की शुरुआत

भारत क्रिकेट की दुनिया में एक वैश्विक शक्ति है। निःसंदेह, भारतीय टीम इस समय सबसे मजबूत क्रिकेट टीमों में से एक है। क्रिकेट खेलने वाले सबसे ज़्यादा जनसंख्या वाले देश होने के नाते भारत दुनिया में क्रिकेट का प्रतिनिधित्व करता है। पिछले कुछ वर्षों में, हमने भारतीय मूल के कई क्रिकेटरों को अपनी टीम के लिए खेलते देखा है। उन्होंने दूसरे देशों की तरफ से खेलते हुए शानदार प्रदर्शन किया है और टीम का बेहद अहम हिस्सा रहे हैं। इन खिलाडियों में नासिर हुसैन, शिवनारायण चंद्रपॉल, मोंटी पनेसर, हाशिम अमला प्रमुख हैं। इस लेख में हम भारतीय मूल के पांच खिलाड़ियों पर एक नज़र डालेंगे जिन्होंने टेस्ट, वनडे या टी 20 में भारत के खिलाफ अपनी अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत की।

शिवनारायण चंद्रपॉल

वेस्टइंडीज़ के बाएं हाथ के दिग्गज बल्लेबाज़ शिवनारायण चंद्रपॉल अपनी अपरंपरागत और प्रभावी बल्लेबाजी शैली के लिए जाने जाते थे। वह वेस्टइंडीज के सबसे भरोसेमंद बल्लेबाज़ों में से एक रहे हैं। महान बल्लेबाज़ ब्रायन लारा के क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद चंद्रपॉल को उनके उत्तराधिकारी के तौर पर विंडीज़ टीम में शामिल किया गया था। हालांकि उन्हें धीमी गति से बल्लेबाजी के लिए जाना जाता है, लेकिन फिर भी चंद्रपॉल ने क्रिकेट इतिहास में कुछ अनोखे रिकॉर्ड बनाए हैं। उनके पास सबसे तेज टेस्ट शतक का रिकॉर्ड है, जो उन्होंने 2002 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ लगाया था। टेस्ट मैच से अपने अंतराष्ट्रीय क्रिकेट की शुरुआत करने वाले चंद्रपॉल ने 17 अक्टूबर 1994 को भारत के खिलाफ अपना वनडे करियर का आगाज़ किया था। उन्हें वनडे में अपना पहला शतक बनाने के लिए लगभग तीन साल इंतजार करना पड़ा। दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने अपना पहला वनडे शतक भी 3 मई 1997 को भारत के खिलाफ बनाया था। सभी वेस्ट इंडीज खिलाड़ियों में, चंदरपॉल वनडे में भारत के खिलाफ दूसरे सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी हैं।

नरसिंह देवनारेन

शिवनारायण चंद्रपॉल की तरह ही एक और भारतीय मूल के विंडीज़ खिलाड़ी नरसिंह देवनारेन ने वेस्टइंडीज़ की तरफ से भारत के खिलाफ खेला है। हालाँकि उनका क्रिकेट करियर चंद्रपॉल जैसा शानदार नहीं रहा। देवनारेन और चंद्रपॉल में एक समानता यह भी थी कि वो भी चंद्रपॉल की तरह ही आंखों के नीचे एंटी-ग्लैयर पैच के शौकीन थे। देवनारेन ने 31 जुलाई, 2005 को भारत के खिलाफ वनडे मैच से अंतराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण किया था। दिलचस्प बात यह है कि बाएं हाथ के इस बल्लेबाज ने शिवनारायण चंद्रपॉल की कप्तानी के तहत ही अपने क्रिकेट करियर का आगाज़ किया था। 2005 में श्रीलंका ने त्रिकोणीय सीरीज़ के लिए वेस्टइंडीज और भारत की मेजबानी की थी। नरसिंह ने श्रीलंका में खेली गई वनडे सीरीज़ में भारत के खिलाफ अच्छी शुरुआत की थी। यह त्रिकोणीय सीरीज़ का दूसरा मैच था। यद्यपि देवनरेन ने धीमी गति से अपनी पारी की शुरुआत की, जब उन्होंने 91 गेंदों पर सिर्फ 41 रन बनाये थे, लेकिन उन्होंने इस मैच में वेस्टइंडीज को 178 रनों के स्कोर तक पहुंचाने में मुख्य भूमिका निभाई, जब वेस्टइंडीज़ टीम का कोई भी बल्लेबाज़ भारतीय गेंदबाज़ों के आगे टिक नहीं सका। आखिरकार, भारत ने बड़ी आसानी से 14 ओवरों और छह विकेट शेष रहते यह मैच जीत लिया।

मोंटी पनेसर

ऐसे समय में जब इंग्लैंड क्रिकेट टीम अपनी धारदार तेज़ गेंदबाज़ी के लिए जानी जाती थी, बाएं हाथ के स्पिनर ने अपनी प्रतिभा से राष्ट्रीय टीम में जगह बनाई। इस गेंदबाज़ का नाम है- मोंटी पनेसर मोंटी ने 1 मार्च 2006 को नागपुर में भारत के खिलाफ टेस्ट मैच से अपने क्रिकेट करियर का आगाज़ किया था। यह भारत और इंग्लैंड के बीच श्रृंखला का पहला टेस्ट मैच था। पनेसर ने पहली पारी में दो विकेट लिए और दूसरी पारी में एक विकेट लिया। दिलचस्प बात यह है कि पनेसर ने अपना पहला टेस्ट विकेट सचिन तेंदुलकर का लिया था। समय के साथ, पनेसर ने खुद को इंग्लैंड के महत्वपूर्ण स्पिनर के रूप में स्थापित किया। हालांकि, धीरे-धीरे, स्पिनर ग्रीम स्वान ने इंग्लैंड टीम में अपनी जगह बनाई और पनेसर के करियर पर विराम लग गया।

हसीब हमीद

9 नवंबर 2016 को भारत के खिलाफ अपना टेस्ट मैच खेलने वाले हसीब हमीद ने 19 साल की उम्र में इंग्लैंड की तरफ से अपने अंतराष्ट्रीय करियर की शुरुआत की थी और वह इंग्लैंड के सलामी बल्लेबाज बनने वाले सबसे युवा खिलाड़ी थे। भारत के खिलाफ उन्होंने अपने पहले टेस्ट में शानदार प्रदर्शन किया था। राजकोट में अपने पहले मैच की पहली पारी में अर्धशतक लगाने के बाद उन्होंने इंग्लैंड की दूसरी पारी में शानदार 82 रन बनाए थे। उसके बाद मोहाली टेस्ट में भी उन्होंने अपना अच्छा प्रदर्शन जारी रखा और उंगली में फ्रैक्चर होने के बावजूद 82 रन बनाए थे।

हाशिम अमला

अगर क्रिकेट खेलने वाली दुनिया की सभी टीमों में कोई ऐसा खिलाड़ी है जिससे विराट कोहली के वनडे रिकॉर्ड को गंभीर खतरा है, तो वह हैं हाशिम अमला है। टेस्ट क्रिकेट में 8982 रन बनाने के बाद, अमला टेस्ट मैचों में दक्षिण अफ्रीका के लिए तीसरे सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी हैं। हाशिम अमला ने कोलकाता के ईडन गार्डन्स में भारत के खिलाफ 2004 में अपना टेस्ट करियर का आगाज़ किया था। हालाँकि, वह इस टेस्ट में कुछ खास नहीं कर सके थे और उन्होंने टेस्ट की दोनों पारियों में सिर्फ 26 रन बनाए थे। लेखक: वैभव जोशी अनुवादक: आशीष कुमार

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