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5 भारतीय स्पिनर जो किसी दूसरे देश के लिए खेलते तो महान टेस्ट खिलाड़ी होते

Rahul Pandey
ANALYST
Modified 30 Oct 2017, 16:07 IST
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वीनू मांकड़, सुभाष गुप्ते और गुलाम अहमद से, शुरू हुई भारतीय स्पिन विरासत की मशाल बिशन सिंह बेदी, ईएएस प्रसन्ना, भागवत चंद्रशेखर और श्रीनिवास वेंकटराघवन के हाथों तक पहुंची। कुछ समय के लिये 80 के दशक में एक छोटा सा ख़राब दौर आने के बाद, अनिल कुंबले और हरभजन सिंह के रूप में नई एक खतरनाक जोड़ी बन गयी।  अब भारत की समृद्ध स्पिन विरासत रविचंद्रन अश्विन और रवींद्र जडेजा के रूप में आगे बढ़ती रही है। इन खिलाड़ियों का प्रदर्शन इतना उच्चस्तरीय रहा कि  घरेलू टेस्ट में लंबे समय तक अच्छा प्रदर्शन करने वाले अनगिनत स्पिनरों को भारतीय टीम में जगह नहीं मिली।  यहाँ हम ऐसे पांच भारतीय स्पिनरों पर नज़र डाल रहे हैं जो अगर दूसरे देश के लिए खेलते तो शायद महान स्पिनर बन सकते थे। कहने की ज़रूरत नहीं, यह सूची पूरी तरह से काल्पनिक है और इन खिलाड़ियों के संभावित और प्रथम श्रेणी के रिकॉर्ड के आधार पर तैयार की गई है। इनमें से तीन स्पिनरों ने भारत के लिए टेस्ट क्रिकेट खेला था, जबकि अन्य दो स्थापित नामों की मौजूदगी के कारण राष्ट्रीय टीम में अपनी जगह नहीं बना सके।


# 5.  मुरली कार्तिक 9e7df-1508874718-800   मुरली कार्तिक की गति और साथ ही लंबाई में विविधताओं के चलते उनमें विकेट हासिल करने की क्षमता थी। हालांकि, कुंबले और हरभजन की दमदार उपस्थिति का मतलब था कि इस बाएं हाथ के स्पिनर को अपने करियर का ज्यादा समय तीसरे स्पिनर के रूप में गुज़ारना पड़ा, जिसका मतलब था कम मौकों का मिलना। मजबूत दक्षिण अफ्रीकी टीम के खिलाफ अपने पहले टेस्ट मैच के दौरान खुद के लिए एक बड़ा नाम बनाने का मौका होने के बावजूद  कार्तिक दूसरी पारी में केवल एक विकेट ही हासिल कर सके। जब भी तीसरे स्पिनर की जरुरत पड़ती थी, तो कार्तिक को बुलाया जाता था। इसके बाद कार्तिक ने सिर्फ सात और टेस्ट मैच खेले, हालाँकि काउंटी स्तर पर इंग्लिश क्रिकेट में वो लगातार बेहतरीन प्रदर्शन कर अपना नाम बनाते रहे। कई क्लबों जैसे लंकाशायर, समरसेट और सरे ने इंग्लैंड क्रिकेट सर्कल में उन्हें बहुत सम्मान दिया। शायद बाएं हाथ का यह स्पिनर उस दौर में अगर इंग्लैंड के लिए खेला होता तो वो और अधिक लंबे टेस्ट करियर का आनंद उठा सकता था। टेस्ट कैरियर (2000-2004) 8 मैचों में 34.16 की औसत से 24 विकेट और 80.5 की स्ट्राइक रेट प्रथम श्रेणी  कैरियर (1996/97 - 2014) 203 मैचों में 26.70 की औसत से 644 विकेट और 66.0 की स्ट्राइक रेट, जिसमें 36 पांच विकेट और 5 दस विकेट शामिल हैं।
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Published 30 Oct 2017, 16:07 IST
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