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5 खिलाड़ी जो भारतीय टीम में अपनी जगह पक्की ना कर पाए

  • इन खिलाड़ियों से काफी उम्मीद थी, लेकिन भारतीय टीम में अपनी जगह पक्की नहीं कर पाए
  • इस लिस्ट में शामिल 5 खिलाड़ियों में 2 खिलाड़ी अभी तक संन्यास नहीं लिए हैं
FEATURED COLUMNIST
टॉप 5 / टॉप 10
Modified 13 Jun 2020, 13:51 IST
भारतीय टीम
भारतीय टीम

सचिन तेंदुलकर को जब 16 साल की उम्र में टीम में चुना गया था, तब वो सबकी नज़रों में आ गए थे। एक युवा खिलाड़ी के तौर पर उनके पास पाने के लिए बहुत कुछ था। हालांकि एक युवा खिलाड़ी को संभालना किसी कोच के लिए बिल्कुल भी आसान नहीं होता, क्योंकि जल्दी सफलता पाने के डर के चक्कर में वो राह से ना भटक जाए।

सचिन तेंदुलकर, विराट कोहली, रोहित शर्मा, युवराज सिंह यह ऐसे कुछ खिलाड़ी जिन्होंने दिखाया कि किस तरह टैलेंट को प्रदर्शन में तब्दील किया जाता है। इन सभी खिलाड़ियों ने भारत को अपने दम पर कई मैच जिताए हैं।

हालांकि बहुत से ऐसे प्रतिभाशाली खिलाड़ी भी रहे हैं, जिनसे उम्मीद तो काफी थी, लेकिन वो भारतीय टीम में जगह पक्की नहीं कर पाए।

आइये नज़र डालते हैं, ऐसे 5 युवा खिलाड़ियों पर, जिन्होंने अपने करियर के शुरुआत में बहुत तारीफ बटोरी, लेकिन उसके बाद भारतीय टीम में जगह बनाने में नाकाम रहें:

# पीयूष चावला

पीयूष चावला 2007 वर्ल्ड टी20 और 2011 वर्ल्ड कप जीतने वाली टीम का हिस्सा रह चुके हैं
पीयूष चावला 2007 वर्ल्ड टी20 और 2011 वर्ल्ड कप जीतने वाली टीम का हिस्सा रह चुके हैं

पीयूष चावला सबसे पहले सबकी नज़रों में 2005 चैलेंजर ट्रॉफी के समय आए, जब उन्होंने सचिन तेंदुलकर को गुगली पर बोल्ड किया था। उसके बाद इनमें काफी क्षमता देखी गई और उन्हें क्रिकेट की दुनिया उभरते हुए सितारे के रूप में देखा जाने लगा। जब वो 17 साल के थे, तब 2007 में उनका चयन इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज के लिए किया गया।

पहले मैच का दबाव चावला पर साफ दिख रहा था और उनकी गेंदो के ऊपर इंग्लैंड ने आक्रमण करना शुरू किया केविन पीटरसन ने, उसके बाद भारतीय कप्तान राहुल द्रविड़ ने उन्हें जल्द ही गेंदबाजी से हटा दिया। कुंबले रिटायरमेंट के करीब थे और हरभजन सिंह की फॉर्म उतनी अच्छी नहीं थी, इसलिए चावला से उम्मीद की जाने लगी कि वो टीम में अपनी जगह पक्की करेंगे।

भारत के लिए वो जितने मैच खेलते गए, उतना ही उनकी गेंदे लेग स्पिन होनी बंद हो गई और वो सिर्फ गुगली और फ्लिपर पर ज्यादा निर्भर होने लगे। वो 2011 में विश्व कप जीतने वाली टीम का भी हिस्सा थे, लेकिन वो चयनकर्ताओं का विश्वास जीतने में नाकाम रहे और वो अंतिम बार 2012 में टीम का हिस्सा थे।

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Published 13 Jun 2020, 13:51 IST
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