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5 मौैक़े जो धोनी को बनाते हैं "MAGNIFICENT MAHI"

Modified 25 Mar 2016, 14:28 IST
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भारतीय टीम के लिमिटेड ओवर के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी तनाव को सहने की क़ाबिलियत को एक अलग स्तर पर ले गए हैं। दबाव में धोनी जिस क़दर शांत रहते है इसपर कई आर्टिकल लिखे जा चुके हैं, और यही वजह है कि दुनिया उन्हें कैप्टेन कूल भी कहती है। इसके साथ साथ उन्होंने कई बार ये दिखाया है कि वह एक चतुर कप्तान भी हैं। धोनी सिमित ओवर के खेल में वें गज़ब की रणनीति बनाते हैं। कई बार दांव भी लगाते है और ज़्यादातर समय ये दांव सही साबित होता है मानो जैसे उनके पास अलादीन का चिराग हो। धोनी के प्रेज़ेंस ऑफ़ माइंड का तो जवाब नहीं, केवल बल्ले से ही नहीं, बल्कि वह अपने कप्तानी या कीपिंग से भी मैच फिनिश कर सकते हैं। ICC वर्ल्ड टी-20 में बांग्लादेश के ख़िलाफ़ जीत भारत के लिए अहम थी, क्योंकि इससे भारतीय टीम के सेमीफ़ाइनल में जाने का रास्ता साफ़ होने वाला था। लेकिन धोनी ने तनाव में चालाकी दिखाते हुए आपने विरोधियों को पछाड़ दिया। बांग्लादेश को जीत के लिए आख़िरी ओवर में 11 रनों की ज़रूरत थी और वह जीत के क़रीब थे। धोनी ने आख़िरी ओवर हार्दिक पंड्या को दिया, जिन्होंने दो गेंद में दो विकेट लिए और अब बांग्लादेश को जीत के लिए एक गेंद में दो रन चाहिए थे। और ये समय था धोनी को अपनी क़ाबिलियत दिखाने का। आख़िरी गेंद फेंके जाने से पहले ही धोनी ने अपने दाएं हाथ का दस्ताना उतार दिया था। उन्हें पता था कि आख़िरी गेंद पर बांग्लादेशी बल्लेबाज़ हर हाल में एक रन के लिए जाएंगे, और हो सकता है विकेट के पीछे से थ्रो करने की नौबत आ पड़े। हुआ भी ठीक वैसा ही, बांग्लादेश के बल्लेबाज़ सगुवागत होम पांड्या की गेंद पर बल्ला लगाने से चूक गए, और बाय लेने के लिए दौड़े। लेकिन स्टंप के पीछे खड़े धोनी ने बॉल पकड़ा और स्टंप की ओर तेज़ धावक की तरह दौड़े और बेल्स उड़ा दिए। मुस्तफ़िज़ुर रहमान क्रीज़ से बहुत दूर थे और इसलिए वह रनआउट हो गए। इससे भारत ने मैच एक रन से जीत लिया। इस जीत का श्रेय धोनी की चालाकी को जाता है। ऐसे कई उदाहरण हैं, जहां पर धोनी ने अपनी चालाकी से भारत को विजेता बनाया, आइए उन्हीं में 5 उदाहरण आपको याद दिलाते हैं:

#1 2007 ICC वर्ल्ड टी-20 के फ़ाइनल में जोगिन्दर शर्मा को आख़िरी ओवर देना

dhonijogi-1458814366-800 ICC वर्ल्ड टी-20 2007 के फ़ाइनल मैच के फ़ाइनल ओवर में पाकिस्तान को जीत क लिए 13 रन चाहिए थे और गेंदबाज़ी में अनुभवी हरभजन सिंह और युवा ऑलराउंडर जोगिन्दर शर्मा के दो-दो ओवर बाक़ी थे। दोनों में से किसी एक को चुनना मुश्किल था। इसके पहले मिस्बाह उल हक़ ने हरभजन सिंह के ओवर में छक्के जड़े थे। इसलिए धोनी ने जोगिन्दर शर्मा को चुना, जिन्हें अंतराष्ट्रीय क्रिकेट में कोई नहीं जानता था। जोगिन्दर कप्तान की उम्मीदों पर खरे उतरे और श्रीसंथ के हाथों मिस्बाह को आउट करवाया। मिस्बाह ने स्कूप खेलने की कोशिश की जिसकी टाइमिंग ग़लत हो गई और शॉर्ट फ़ाइन लेग पर खड़े श्रीसंथ ने कैच लपक लिया। और भारत बन गया था पहले वर्ल्ड टी-20 का बादशाह। ये एक तरह से एक जुआ ही था लेकिन सोचा समझा हुआ था, क्योंकि जोगिन्दर की रफ़्तार बहुत कम है। धीमी गेंद होने के कारण ही मिस्बाह की टाइमिंग ख़राब हुई। हालांकि ये धोनी के कप्तानी की शुरुआत थी, लेकिन यहीं से उनका हुनर दुनिया के सामने आ चुका था।
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Published 25 Mar 2016, 14:28 IST
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