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5 उदाहरण जो साबित करते हैं कि एमएस धोनी एक अद्भुत खिलाड़ी हैं

Modified 09 Jun 2018, 11:55 IST
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इन दिनों खेल भावना चर्चा का विषय बन गई है, खासकर कुछ समय पहले डेविड वॉर्नर और क्विनटन डी कॉक में हुई नोकझोक ने इस बहस को और हवा दी है।
भारतीय टीम की बात करें तो भारत के पूर्व कप्तान एमएस धोनी खेल भावना दिखाने में कभी पीछे नहीं रहते। उनके नेतृत्व में भारत ने 2007 में आईसीसी टी 20 विश्व कप, 2011 में आईसीसी विश्व कप और 2013 में आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी जीती है। इन उपलब्धियों के बावजूद, उन्होंने सुनिश्चित किया कि टीम के खिलाड़ी कुछ भी ऐसा ना करें जो खेल भावना के विपरीत हो। यह विकेटकीपर बल्लेबाज मैदान पर अपनी शांत रवैये के लिए जाने जाते हैं, जिससे उन्हें 'कैप्टन कूल' ' जैसा उपनाम मिला है। आईपीएल में भी उन्होंने आठ सत्रों में चेन्नई सुपर किंग्स का नेतृत्व किया है और छह बार 'फेयर प्ले' पुरस्कार जीता है। तो आइये जानते हैं मैच के दौरान हुई ऐसी घटनाओं के बारे में जब धोनी ने खेल भावना दिखाई:

सौरव गांगुली को उनके विदाई टेस्ट में कप्तानी देना

  भारत के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली ने भारतीय टीम को दुनिया की सर्वश्रेष्ठ टीमों की पंक्ति में ला खड़ा किया था। जब टीम का मनोबल मैच फिक्सिंग घोटाले के कारण गिर गया था, गांगुली ने टीम में एक नई जान फूंकने का काम किया। अपने आक्रामक कप्तानी के साथ, उन्होंने भारत को कई टूर्नामेंट जिताए। गांगुली ने नवंबर 2008 में नागपुर में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अपना विदाई टेस्ट खेला। धोनी, जो उस समय टीम का नेतृत्व कर रहे थे, ने गांगुली को सम्मान देते हुए उन्हें कप्तानी करने के लिए कहा। 'दादा' धोनी के इस कदम से हैरान रह गए थे। पहले तो गांगुली ने इससे मना कर दिया लेकिन मैच के आखिरी ओवरों में धोनी के दोबारा कहने पर वह मना नहीं कर पाए। भारत के सफलतम कप्तानों में से एक, गांगुली के लिए इससे बेहतर विदाई नहीं हो सकती थी।
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Published 09 Jun 2018, 11:55 IST
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