Create
Notifications

सचिन तेंदुलकर की नज़र में क्रिकेट को महत्वपूर्ण रखने के लिए ज़रूरी 5 कदम

CONTRIBUTOR
Modified 09 Dec 2016
क्रिकेट महज एक खेल नहीं एक धर्म हैं खासतौर पर उन लोगों के लिए जो इससे जुड़े हुए हैं जो इस खेल को जानते हैं इस खेल का जुनून ही कुछ ऐसा हैं कि जो इससे एक बार इससे जुड़ जाए उसके लिए खुद को इससे अलग कर पाना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन हैं। क्रिकेट एक ऐसा खेल हैं जिसमें इस बात से फ़र्क नहीं पड़ता कि आप मैदान पर मौजूद हैं या नहीं यदि आप इसे देखते हैं खेलते हैं औऱ समझते हैं तो जाने अनजाने ये हिस्सा बन जाता हैं आपके जीवन का। फिर चाहे मैच कभी भी कही भी और किन्ही भी देशों को बीच हो रहा हो बिना स्कोर जाने या बिना मैच अपडेट आपका मन लगना मुश्किल हैं आप कहीं भी हो स्कोर अपडेट लेना नहीं भूलते तो जरा सोचिए कि उन लोगों का या उन खिलाड़ियों का क्या होता होगा जिन्होने खेल को अलविदा कह दिया हो। वो भी एक अच्छे खासे लम्बे समय के सफल करियर के बाद। खासतौर पर 200 टेस्ट मैच जितना लम्बा क्रिकेट करियर खत्म करने के बाद संन्यास लेने वाले खिलाड़ी का। हम बात कर रहे हैं लिटिल मास्टर या कहें क्रिकेट के भगवान माने जाने वाले सचिन तेंदुलकर की। मास्टर ब्लास्टर को क्रिकेट को अलविदा कहे यूं तो कुछ सालों को वक्त हो गया हैं लेकिन यदि हम कहें कि संन्यास उन्होंने सिर्फ मैदान से लिया हैं क्रिकेट से नहीं तो गलत नहीं । क्योंकि संन्यास के बाद भी सचिन कई मायनों में क्रिकेट से जुड़े हुए हैं। फिर चाहे वो रिटायर हो चुके प्लेयर्स के लिए शेन वॉर्न के साथ मिलकर एक नई शुरूआत की कोशिश ही क्यों न हो। अपनी बल्लेबाजी से लाखों के दिल जीत लेने वाले सचिन अब मैदान पर बैट थामे नजर नहीं आते लेकिन खेल को लगातार बेहतर करने के लिए क्या कुछ किया जाना चाहिए। किस तरह तेजी से बदलती पीढ़ी को बेहतर खेल के लिए तैयार किया जाए। और ज्यादा से ज्यादा लोगों को खेल से जोड़ा जा सके ,टैलेंट को उभारा जा सके ज्यादा से ज्यादा मौके हर प्रतिभा तक कैसे पहुचायें जा सके ऐसे तमाम पहलुओं पर वो अपने सुझाव देते रहते है। क्रिकेट के विस्तार ले रहे आयामों के चलते हालिया वक्त में हर समय कहीं न कहीं कोई न कोई क्रिकेट टूर्नामेंट चल रहा होता है ऐसै में खेल के मौलिक स्वरूप और लोगो में खेल के प्रति क्रेज को बचाये रखना बहुत जरूरी है। मास्टर ब्लास्टर की नज़र में 5 दिलचस्प तरीके जो क्रिकेट के क्रेज को बरकरार रखने के लिए जरूरी हैं। दो पिच और दो गेंद cricket-balls-1481103300-800 घरेलू क्रिकेट में रणजी का क्रेज आज भी हैं और कई खिलाड़ियों के लिए अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट के दरवाज़े भी रणजी ने ही खोले हैं ऐसै में सचिन का मानना हैं कि रणजी खेलने के तरीके में भी बदलाव की जरूरत है। सचिन के मुताबिक हर मैच को दो पिचों पर खेला जाना चाहिए पहली औऱ दूसरी पारी ग्रीन ट़ॉप पर और तीसरी और चौथी पारी टर्निंग ट्रैक पर इसके साथ ही सचिन का मानना है कि भारतीय गेंदबाजों को जिस तरह से अंतर्राष्ट्रीय मैंचो में विदेशी पिचों पर परेशानी उठानी पड़ती है उसे देखते हुए जरूरत है कि घरेलू मैचों में 2 गेंदों का इस्तेमाल करना चाहिए। एक कुकाबुरा गेंद भारतीय गेंदबाजो के लिए ग्रिपिंग में  थोड़ी मुश्किल हैं और दूसरीएसजी गेंद। इस सुझाव पर यदि ध्यान दिया जाए तो इसका फायदा भारतीय बल्लेबाजों को उन परिस्थितियों में मिल सकता है जिनमें विदेशी पिचों पर बॉल ज्यादा ऑफ पिच हो या पेस पर हो। हालांकि इस सुझाव पर अमल करना थोड़ा मुश्किल हैं क्योंकि एक ही मैदान पर एक दूसरे के पास में दो पिच तैयार करने से एक पिच पर खेल के वक्त फील्डर्स को दूसरे पिच पर चलने से रोकना लगभग असंभव है।
1 / 5 NEXT
Published 09 Dec 2016
Fetching more content...
App download animated image Get the free App now