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5 ऐसे महान क्रिकेटर जिन्होंने अनावश्यक रुप से अपने टेस्ट करियर को लंबा खींचा

SENIOR ANALYST
Modified 03 Dec 2016
कहावत है कि समय किसी का इंताजर नहीं करता ।  सिर्फ वनडे क्रिकेट में ही नहीं उम्र सीमा दिक्कत बनती है, बल्कि टेस्ट क्रिकेट में भी उम्र ढलने के साथ खेलना मुश्किल हो जाता है । टेस्ट क्रिकेट कभी-कभी ज्यादा उम्र खिलाड़ियों के लिए और घातक साबित हुआ है । किसी भी महान क्रिकेटर की बड़ी-बड़ी पारियां हमारे जेहन में सालों तक ताजा रहती हैं, लेकिन समय बीतने के साथ उस तरह के प्रदर्शन में गिरावट आने लगती है । ओवल टेस्ट मैच में मैच विनिंग पारी के बाद पाकिस्तानी बल्लेबाज यूनिस खान के साथ भी ऐसा हुआ । उन्हें गेंद की लेंथ को पढ़ने में काफी दिक्कत होने लगी । वो पहले अनुभवी खिलाड़ी नहीं हैं, जिनके साथ ऐसा हुआ है, बल्कि कई दिग्गज खिलाड़ियों को दिक्कत हुई है । आइए नजर डालते हैं कुछ ऐसे ही क्रिकेटरों पर जो अपने पीक पर तो काफी शानदार रहे, लेकिन समय ढलने के साथ ही उनके प्रदर्शन में गिरावट आती गई । डिस्क्लेमर- इस पोस्ट का मतलब किसी भी महान क्रिकेटर की क्षमता पर उंगली उठाना नहीं है।   5. सर विव रिचर्ड्स   viv-richards-1480534215-800   शायद दुनिया के अकेले ऐसे बल्लेबाज जिनके क्रीज पर होने मात्र से विपक्षी गेंदबाजों के पसीने छूट जाते थे । विव रिचर्ड्स ने 1974 में अपना डेब्यू किया था और 80 के अंत तक वो अपने चरम पर रहे । लेकिन करियर के आखिरी सालों में उनके आंखों और हाथ का तालमेल उतना अच्छा नहीं रहा, जिसकी वजह से उन्होंने बड़े-बड़े गेंदबाजों के छक्के छुड़ा दिए । 20 मार्च 1989 तक सर रिचर्ड्स ने 104 टेस्ट मैचों में 52.83 की औसत से 7714 रन बनाए । इस दौरान उन्होंने 23 शतक लगाए । उस समय वो वेस्टइंडीज की बल्लेबाजी लाइन-अप की रीढ़ थे । लेकिन अगस्त 1991 में अपने संन्यास के समय तक उनका करियर उतना शानदार नहीं रहा । सर रिचर्ड्स ने अपने करियर के आखिरी पड़ाव में 17 टेस्ट मैचों में 34.41 की औसत से महज 826 रन बनाए । इस दौरान वो मात्र एक शतक लगा सके । हालांकि अपने विदाई टेस्ट मैच तक विव रिचर्ड्स वेस्टइंडीज के कप्तान थे ।
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Published 03 Dec 2016
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