जब एक दशक से अधिक समय के लिए खेल की शैली सफल होती है, तो खिलाड़ियों के उसे बदलने और पूरी तरह से अलग तरह के खेल को अपनाने की संभावना नहीं है। हालांकि, तेंदुलकर ने करीब 12 वर्षों के लिए आक्रमक खिलाड़ी होने के बाद बल्लेबाजी की अपनी शैली को बदल दिया था जब उन्हें पीठ की एक चोट के कारण बदलाव करना पड़ा था, यह वो समय था जब 1999 में उनका करियर इसके चलते खत्म होने वाला था।
तेंदुलकर एक बहुत ही भारी बल्ले से बल्लेबाजी करते थे लेकिन विशेषज्ञ की सलाह मानकर उन्होंने हल्के बल्ले से बल्लेबाजी शुरू कर दी। जब उन्होंने ऐसा किया तो वह सिर्फ बल्ले में नही बल्कि बतौर एक खिलाड़ी भी बदलाव था, जिसने शायद उन्हें एक स्ट्रोक खेलने वाले से ज्यादा एक ऐसे बल्लेबाज में बदल दिया जिसे आउट करना बेहद मुश्किल हो गया और शायद यह उनके करियर का एक नया जीवन साबित हुआ।
विशेषज्ञ की सलाह ध्यान में रखते हुए और अपने दृष्टिकोण में बदलाव लाना हर किसी के लिये जरुरी होता है।