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जीवन से जुड़ी 5 बातें जो वीरेंदर सहवाग से सीखी जा सकती हैं

Rahul Pandey
ANALYST
Modified 12 Nov 2017, 13:14 IST
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भारतीय क्रिकेट के इतिहास कई ऐसे सलामी बल्लेबाजों के नाम रहे जिन्होंने क्रिकेट की दुनिया में न सिर्फ एक सलामी बल्लेबाज़ बल्कि क्रिकेट के महान खिलाड़ी के तौर पर अपनी पहचान बनाई। हालांकि सलामी बल्लेबाज़ी के तरीके को बदलने और विपक्ष पर आते ही आक्रमण करने के एक नये दृष्टिकोण कोस्थापित करने की बात जब भी होगी तो वीरेंदर सहवाग उसकी शुरुआत करने वाले खिलाड़ी के तौर पर देखे जायंगे। अक्सर सत्र भर में ही टेस्ट मैचों की दिशा को बदल देने के कारण, सहवाग ने दर्शकों को आकर्षित किया और भारत को खराब पिचों पर भी जीतने में सक्षम बनाया। 50 ओवर प्रारूप में, उनकी तेज़ शुरूआत 2011 की विश्व कप की विजेता टीम का एक अहम पहलू भी था, जिसके चलते भारतीय लाइनअप एक मजबूत बैटिंग लाइनअप भी बन गई। खेल से रिटायर होने के बावजूद, नजफगढ़ के 'नवाब' आज भी ट्विटर पर अपनी मनोरंजक बातों से लोगो का मनोरंजन जारी रखे हुए हैं। आईये एक नज़र डालते हैं उनके जीवन की ऐसी ही पांच बातों पर जो एक आम इन्सान के लिये अहम सीख बन सकती हैं।


# 5.  मिले हुए अवसर का लाभ उठाना 4a8a8-1510011926-800 सहवाग का नाम आते ही सबको बतौर सलामी बल्लेबाज़ खेली गयी उनकी ताबड़तोड़ पारियाँ ही याद आती है, लेकिन उनके क्रिकेट करियर की शुरुआत एक ऑफ-स्पिन ऑलराउंडर के तौर पर हुई थी, जिसे निचले क्रम के साथ मिलकर तेज़ रन बनाने की जिम्मेदारी मिली थी। उनकी पहली पहचान बनाने वाली पारी आई, 2001 बैंगलोर एकदिवसीय में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ, जब एक तेज अर्धशतक और तीन विकेट के लिए उन्हें उनका पहला 'मैन ऑफ द मैच' पुरस्कार भी हासिल हुआ। https://youtu.be/lyUzlJeQYtY अनुभवी सचिन तेंदुलकर को पैर की चोट के चलते जब बाहर होना पड़ा, तब कप्तान सौरव गांगुली ने श्रीलंका में 2001 के कोको कोला कप के नौवें मैच के दौरान सहवाग को अपने साथ पारी की शुरुआत करने को कहा। मिले हुए मौके का पूरा फायदा उठाते हुए दाएं हाथ के इस बल्लेबाज़ ने न्यूजीलैंड के खिलाफ भारत के लिए एक आसान जीत तो तय ही की साथ ही मात्र 70 गेंद पर शतक लगाया। हालांकि उन्हें दोबारा मध्य-क्रम में स्थानांतरित कर दिया गया था, लेकिन टीम प्रबंधन ने एक सलामी बल्लेबाज के रूप में उनके कौशल का ध्यान रखा। 2002 के इंग्लैंड दौरे के दौरान, सहवाग को अस्थायी सलामी बल्लेबाज के रूप में पदोन्नत किया गया था। उन्होंने ट्रेंट ब्रिज में शतक जड़ दोनों प्रारूपों में इस जगह को अपना बनाया। जिस तरीके से सहवाग ने टेस्ट और एकदिवसीय दोनों में पारी की शुरुआत करने के लिये मिले अवसरों का लाभ उठाया, वह संभावनाओं और अवसरों की पहचान कर उनका लाभ उठाना सिखाता है। जैसा कि इस दिल्ली के धुरंधर ने कर के दिखाया, कि यदि अवसर सामने हो तो उसे लपकने में देरी नही करनी चाहिये।
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Published 12 Nov 2017, 13:14 IST
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