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5 मंत्र जो हम युवराज सिंह के जीवन से सीख सकते हैं

Rahul Pandey
ANALYST
Modified 18 Nov 2017, 10:37 IST
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अपने आकर्षक स्ट्रोक-प्ले और बेहतरीन व्यक्तित्व के साथ, युवराज सिंह वर्षों तक भारतीय क्रिकेट के अभिन्न अंग रहे हैं, यहाँ तक की बढ़ती उम्र के साथ वो और भी ख़ास होते चले गये। हालांकि बहुत से बल्लेबाजों के आकड़ें इनसे ज्यादा बेहतर हो सकते है, लेकिन यह स्टाइलिश बल्लेबाज़ सीमित ओवरों में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाजों में से एक की सूची में जरुर जगह बनाता है। उनके सनसनीखेज प्रदर्शन ने 2007 विश्व टी 20 खिताब जीतने के लिये पूरी टीम में एक नई ऊर्जा भर दी, तो 2011 में विश्व कप जीतने वाली टीम के लिये बल्ले और गेंद से युवराज का ऐसा प्रदर्शन रहा कि अंत में उन्हें वो 'प्लेयर ऑफ टूर्नामेंट' पुरस्कार से सम्मानित किया गया। कैंसर से जंग की मार्मिक कहानी ने उन्हें क्रिकेट के मैदान के बाहर भी एक बड़ा हीरो बना दिया। जब अपने पूरे फॉर्म में युवराज मैदान पर होते हैं तो वह विपक्षी गेंदबाजों के लिए एक भयानक स्वप्न होते हैं। आइये पांच महत्वपूर्ण जीवन मन्त्रों पर नज़र डालें जो हम सब इस प्रेरणादायक खिलाड़ी से सीख सकते हैं:


# 5.  क्षमता को प्रदर्शन में बदलना c6147-1510168583-800   छोटी उम्र से ही युवराज बड़ी सफलता की ओर अग्रसर रहे थे। हालांकि उन्होंने शुरू में रोलर स्केटिंग में अधिक रुचि दिखाई और यहां तक कि अंडर -14 नेशनल चैंपियनशिप जीती, लेकिन फिर बाएं हाथ के खिलाड़ी रूप में पंजाब की अंडर -12 राज्य टीम के साथ क्रिकेट से जुड़ रहे थे। धीरे-धीरे कदम बढ़ाते हुए, उन्होंने जमशेदपुर में अंडर -19  कूच बेहर ट्राफी के फाइनल में तिहरा शतक लगाया जिससे वो राष्ट्रीय स्तर पर भी सबकी आँखों में आ गये। श्रीलंका में 2000 अंडर -19 विश्वकप के दौरान, युवराज को 'प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट' पुरस्कार से सम्मानित किया गया था और साथ ही भारत ने इस प्रतियोगिता में अपना पहला खिताब जीता था। उसी साल आईसीसी नॉकऑट टूर्नामेंट के लिए उन्होंने वरिष्ठ टीम में अपना पहला मैच खेला। इस प्रतिभाशाली बल्लेबाज ने अपनी क्षमता का प्रदर्शन करने में बहुत समय नहीं लिया। उन्होंने क्वार्टर फाइनल में ग्लेन मैक्ग्रा, ब्रेट ली और जेसन गिलेस्पी के घातक गेंदबाजी आक्रमण के खिलाफ 80 गेंदों में 84 रन की पारी खेली। एक बल्लेबाजी सितारे का इस तरह से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आगमन हो चुका था। 18 साल की उम्र में ही युवराज का इस प्रकार का धमाकेदार प्रदर्शन करते हुए प्रतिभा को प्रदर्शन में परिवर्तित करना एक आदर्श उदाहरण है, कि कैसे किसी भी क्षेत्र में संभावित क्षमता को शुरुआती अवसर सामने आते ही प्रदर्शन में परिवर्तित करना जरुरी है।
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Published 18 Nov 2017, 10:37 IST
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