ENG v IND: भारत और इंग्लैंड के बीच 5 सबसे यादगार वनडे मैच

क्रिकेट में दो प्रमुख प्रतिद्वंद्विताएं हैं जिन पर पूरी दुनिया की नज़र रहती है, एक हैं ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बीच खेली जाने वाली एशेज सीरीज़ और दूसरी है भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाली सीरीज़। हर क्रिकेट प्रशंसक इन टीमों के बीच होने वाले मुकाबले का बेसब्री से इंतज़ार करता है। हालांकि, इसके अलावा भी एक और प्रतिद्वंद्विता है, वह है भारत और इंग्लैंड के बीच। इन दोनों देशों के पुराने इतिहास को देखते हुए, मैच दिलचस्प हो जाता है। भारत और इंग्लैंड ने 1974 में एक दूसरे के खिलाफ पहला वनडे मैच खेला था, और तब से दोनों के बीच 97 मैच हो चुके हैं। भारत ने इनमें से 52 मैच जीते हैं जबकि इंग्लैंड ने 39 मैचों मे जीत दर्ज की है। दोनों टीमों की प्रतिद्वंद्विता को तीन भागों में विभाजित किया जा सकता है, शुरुआती दौर में , इंग्लैंड ने भारत पर प्रभुत्व बनाए रखा और 1990 के दशक और 2000 के शुरुआती दौर में वे भारतीय टीम पर हावी रहे। पिछले एक दशक में, भारत इंग्लैंड पर हावी रहा है और टीम इंडिया ने क्रिकेट के हर क्षेत्र में इंग्लिश टीम को मात दी है। हालांकि, मौजूदा इंग्लैंड टीम ने काफी सुधार किया है, और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ उनका हालिया प्रदर्शन अनुकरणीय रहा है। भारत के आगामी इंग्लैंड दौरे में टीम इंडिया को कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ेगा। इस लेख में हम भारत के इंग्लैंड के बीच 5 यादगार वनडे मैचों पर एक नज़र डालेंगे:

भारत बनाम इंग्लैंड - छठा वनडे, मुंबई, फ़रवरी 2002

भारत 6 मैचों की वनडे श्रृंखला में 3-2 से बढ़त बनाए हुए था और आखिरी मैच में जीत हासिल कर टीम इंडिया सीरीज़ जीतना चाहती थी लेकिन जैसी टीम इंडिया को अपेक्षा थी वैसा कुछ नहीं हुआ। इंग्लैंड ने मुंबई में खेले गए अंतिम वनडे में जीत हासिल कर सीरीज़ को 3-3 से ड्रा कर दिया। वीरेंदर सहवाग और सौरव गांगुली ने 255 रनों के लक्ष्य का का पीछा करते हुए अच्छी शुरुआत की लेकिन भारत का मध्य क्रम अच्छी शुरुआत को जीत में तबदील करने में नाकाम रहा और टीम इंडिया यह मैच 5 रनों से हार गयी। मेहमान टीम ने बेहतरीन गेंदबाज़ी करते हुए टीम इंडिया के मध्य-क्रम के बल्लेबाज़ों को टिकने नहीं दिया, खासकर फ़्लिंटॉफ़ ने यादगार प्रदर्शन करते हुए 3.86 की इकोनॉमी रेट से 38 रन देकर बेहद अहम 3 विकेट हासिल किये। इसके अलावा बल्लेबाजी करते समय, फ्लिंटॉफ ने 40 रनों का महत्वपूर्ण योगदान दिया और इंग्लैंड को 255 के स्कोर तक पहुंचाया।

इंग्लैंड बनाम भारत- विश्व कप 2003 - ग्रुप मैच, डरबन

इस मैच में, भारत ने बल्लेबाजी और गेंदबाज़ी दोनों में इंग्लैंड को मात दी। पहले बल्लेबाजी करते उतरी टीम इंडिया की तरफ से सचिन तेंदुलकर ने शानदार अर्धशतक लगाकर टीम को अच्छी शुरुआत दिलाई और उसके बाद राहुल द्रविड़ और युवराज सिंह ने क्रमशः 62 और 42 रन बनाकर भारत का स्कोर 250 तक पहुंचाया। भारत की गेंदबाजी का नेतृत्व अनुभवी जवागल श्रीनाथ ने किया था, लेकिन यह युवा गेंदबाज़ आशीष नेहरा थे जिन्होंने इंग्लैंड की बल्लेबाज़ी लाइन-अप को तहस-नहस कर दिया। उनकी स्विंग और गति ने इंग्लिश बल्लेबाजों को बहुत परेशान किया और उन्होंने अपने 10 ओवरों के स्पेल में सिर्फ 23 रन देकर 6 विकेट लिए। नेहरा का 6/23 का गेंदबाज़ी आंकड़ा उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन था। उस मैच में इंग्लैंड की पूरी टीम सिर्फ 168 रनों पर ढेर हो गई। इस जीत ने भारतीय टीम का मनोबल बढ़ाया और टीम ने फाइनल तक का सफर तय किया था।

भारत बनाम इंग्लैंड- विश्व कप 2011- ग्रुप मैच, फ़रवरी 2011

बल्लेबाज़ी के लिए मुफीद विकेट पर भारत ने पहले बल्लेबाज़ी करते हुए शानदार शुरुआत की। सलामी बल्लेबाज़ सचिन तेंदुलकर और सहवाग ने भारत को अच्छी शुरुआत दिलाई। लिटिल मास्टर सचिन तेंदुलकर ने शानदार प्रदर्शन करते हुए अपना 47वां वनडे शतक लगाया। उसके बाद गंभीर और सचिन ने मिलकर टीम इंडिया के स्कोर को 25 ओवरों में 150 के पार पहुंचाया। एक समय ऐसा लग रहा था कि भारतीय टीम आराम से 400 रन बना लेगी लेकिन नियमित इंग्लिश गेंदबाज़ों ने आखिरी ओवरों में अच्छी बल्लेबाज़ी करते हुए विरोधी बल्लेबाज़ों पर अंकुश लगाया और नियमित अंतराल पर विकेटों के गिरने की वजह से भारत ने निर्धारित 50 ओवरों में 338 रन बनाए। जवाब में लक्ष्य का पीछा करने उत्तरी इंग्लैंड टीम ने भी अच्छी शुरुआत की। इंग्लैंड के सलामी बल्लेबाज़ एंड्रयू स्ट्रॉस ने टीम को बेहतरीन शुरुआत दिलाई। एक समय तो ऐसा लग रहा था जैसे इंग्लैंड इस बड़े लक्ष्य को भी आसानी से हासिल कर लेगा लेकिन अनुभवी जहीर खान के एक जबरदस्त ओवर ने मैच का पैसा पलट दिया। एक ही ओवर में दो विकेटों लेकर उन्होंने लगभग भारत को मैच जीता ही दिया था लेकिन दुर्भाग्यवश मैच टाई हो गया क्यूंकि इंग्लैंड ने भी 338 रन बनाए। इसमें एंड्रयू स्ट्रॉस के शानदार 158 रन उल्लेखनीय हैं जिसके लिए उन्हें 'मैन ऑफ द मैच' चुना गया।

इंग्लैंड बनाम भारत- 2007, लंदन में छठा वनडे मैच

6 मैचों की उस सीरीज़ में भारत इंग्लैंड से 2-3 से पिछड़ रहा था रन बना रहा था, और एक और हार का मतलब था कि इंग्लैंड सीरीज़ जीत जाता। इंग्लैंड ने टॉस जीत कर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया और 316 रन बनाये क्योंकि भारतीय गेंदबाजों का दिन अच्छा नहीं था। ओवेस शाह के शतक और इयान बेल, और केवीन पीटरसन के महत्वपूर्ण योगदान से मेज़बान टीम ने 316 रन बनाए। इस मैच में, दिमित्री मस्करेनहास ने युवराज सिंह के एक ओवर में पांच छक्के लगाए और 15 गेंदों पर 36 रन बनाये। जवाब में, भारतीय टीम की ओर से गांगुली (53), सचिन (94) और गंभीर (47) ने टीम को अच्छी शुरुआत दिलाई। हालांकि, इंग्लिश गेंदबाज़ों ने भी अपने गेंदबाज़ों के अच्छे प्रदर्शन के दम पर वापसी की और आधी टीम को पवेलियन वापिस भेज दिया। उसके बाद टीम को जीत दिलाने का सारा दारोमदार युवा विकेटकीपर बल्लेबाज़ धोनी और उथप्पा पर था। दोनों ने कुछ अच्छे शॉट्स खेले लेकिन मैच के अंतिम ओवरों में धोनी आउट होकर पैवेलियन वापिस लौट गए। लेकिन रॉबिन उथप्पा ने बड़े शॉट्स खेलना जारी रखा और टीम इंडिया को केवल दो गेंदें शेष रहते मैच जीता दिया।

भारत बनाम इंग्लैंड -नेटवेस्ट ट्रॉफी फाइनल - लॉर्ड्स, जुलाई 2002

यह क्रिकेट इतिहास का शायद सबसे ऐतिहासिक वनडे था। 2002 की नेटवेस्ट श्रृंखला के फाइनल में, इंग्लैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए शानदार 325 रन बनाये। इंग्लैंड के कप्तान नासर हुसैन और सलामी बल्लेबाज मार्कस ट्रेस्कोथिक दोनों ने शतक लगाए थे। जवाब में बल्लेबाज़ी करने उतरी भारतीय टीम ने अच्छी शुरुआत की लेकिन कप्तान गांगुली के आउट होने के बाद मध्य-क्रम पूरी तरह से लडख़ड़ा गया। भारत की लगभग आधी टीम 150 रनों से पहले ही पवेलियन वापिस परत चुकी थी। फिर युवा बल्लेबाज़ युवराज और मोहम्मद कैफ की युवा जोड़ी ने 121 रनों की अहम साँझेदारी की, इसमें युवी ने 69 कैफ ने नाबाद 87 रन बनाकर टीम इंडिया को यादगार जीत दिलाई। जीत के बाद कप्तान गांगुली का लॉर्ड्स की बालकनी से हवा में अपनी शर्ट लहराना सब को याद है। लेखक: सौरभ हम्बरवाड़ी अनुवादक: आशीष कुमार

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