Create
Notifications

5 यादगार टेस्ट मैच जिसमें भारतीय टीम का नाम जुड़ा है

जितेंद्र तिवारी

भारत और न्यूज़ीलैंड के बीच 22 सितम्बर से कानपुर के ग्रीन पार्क स्टेडियम में तीन मैचों की सीरीज का पहला टेस्ट शुरू होगा। यह टीम इंडिया के लिए एतिहासिक टेस्ट होगा, क्योंकि मेजबान टीम अपना 500 वां टेस्ट खेलने जा रही है। भारतीय टीम ने पहला टेस्ट 1932 में इंग्लैंड के खिलाफ खेला था। और अब वह काफी आगे आ चुकी है। फिर चाहे वीरेन्द्र सहवाग का तिहरा शतक हो या फिर लक्ष्मण और द्रविड़ की यादगार साझेदारी, ऐसे कई मौके आए जिसने भारतीय क्रिकेट इतिहास में अपनी अलग ही जगह बना ली। ऐसे ही कई यादगार लम्हें हैं। इन 500 टेस्ट मैच में भारतीय टीम ने कई यादगार टेस्ट मैच भी खेले हैं। जिनमें से 5 यादगार टेस्ट मैचों के बारे में हम आपको यहां बता रहे हैं:

#5) साल 2004 भारत बनाम पाकिस्तान, पहला टेस्ट- मुल्तान, पाकिस्तान

Indian cricketers Sachin Tendulkar (R),

इस मैच को फैंस दो कारणों से याद करते हैं, एक तो सहवाग का तिहरा शतक और दूसरा द्रविड़ के पारी घोषित करने के कारण सचिन तेंदुलकर का दोहरा शतक चूक जाना। तब सचिन 194 पर बल्लेबाज़ी कर रहे थे। पाकिस्तान की धरती पर भारतीय टीम ने 50 ओवर के प्रारूप में एतिहासिक जीत दर्ज की थी। उसके बाद टीम इंडिया ने मुल्तान में हुए पहले टेस्ट में पाकिस्तान को एक पारी और 57 से हरा दिया। 52 सालों के दरम्यान भारत ने पहली बार पाकिस्तान को उसकी धरती पर हराया था। द्रविड़ उस वक्त गांगुली की जगह टीम की कप्तानी कर रहे थे। इस मैच में भारत ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाज़ी करने का निर्णय लिया था। सहवाग ने भारत को मनचाही शुरुआत दिलायी। उसके बाद सचिन के साथ मिलकर 366 रन की शानदार साझेदारी की। सहवाग ने इस मैच में अपने करियर का पहला तिहरा शतक ठोंका। साथ ही सचिन ने 194 और युवराज सिंह ने भी तेज तर्रार अर्धशतक बनाया। भारत ने 675 रन पर 5 विकेट के बाद पारी घोषित कर दिया था। जवाब पाकिस्तान ने पहली पारी में 407 रन बनाये। इरफ़ान पठान को 4 विकेट मिले थे। उसके बाद दूसरी पारी में कुंबले(72/6) की कमाल की गेंदबाज़ी के चलते पाकिस्तान मात्र 216 रन ही बना पाया। भारत ने ये मैच आराम से जीत लिया था। भारत ने ये सीरीज 2-1 से जीती थी। परिणाम: भारत पहली पारी 675/5 (सहवाग 309, तेंदुलकर 194 नाबाद, युवराज 59) और पाकिस्तान पहली पारी 407 (हमीद 91, इंजमाम 77, पठान 4-100) दूसरी पारी 216(योहाना 112, कुंबले 6-72) भारत ने पाकिस्तान को एक पारी और 52 रन से हराया। #4) सन 1976, भारत बनाम वेस्टइंडीज तीसरा टेस्ट-पोर्ट ऑफ़ स्पेन (वेस्टइंडीज)

india wi

1970 के दशक में वेस्टइंडीज टीम दुनिया की सबसे धुरंधर टीमों में से एक थी। टीम इंडिया आज जैसी है वैसी तब नहीं थी। लेकिन 1976 में हुए इस टेस्ट मैच में वह कर दिखाया जो अकल्पनीय था। टेस्ट में 400 रन का सफल पीछा करने वाली ऑस्ट्रेलिया के बाद भारत उस वक्त दुनिया की दूसरी टीम बनी। ये कारनामा गावस्कर और विश्वनाथ ने कर दिखाया था। भारत ने 404 रन का सफल पीछा करते हुए भारत को 6 विकेट की जीत दिला दी थी।

वेस्टइंडीज ने टॉस जीतकर विवियन रिचर्ड्स के 177 रन की पारी के बदौलत 359 रन बनाये थे। जवाब में भारतीय टीम 228 रन पर आलआउट हो गयी थी। वहीं विंडीज ने दूसरी पारी में एल्विन कालीचरण के शतक के बदौलत 271 रन बनाकर पारी घोषित कर दिया। लेकिन गावस्कर और गुंडप्पा ने कुछ और ही सोच रखा था। दोनों बल्लेबाजों ने शतक ठोंककर अंतिम दो दिनों में भारत को 6 विकेट की जीत दिला दी। हालाँकि भारत ये सीरीज 2-1 से हार गया था। परिणाम: वेस्टइंडीज 359 और 271/6 पारी घोषित, भारत 228 और 406/4। #3 सन 1986, भारत बनाम ऑस्ट्रेलिया, पहला टेस्ट-चेन्नई, भारत dean jones भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेला गया सबसे ज्यादा रोमांचक टेस्ट मैचों से ये एक है। तकरीबन 30 हजार दर्शकों के सामने खेला गया ये मैच टेस्ट इतिहास का दूसरा टाई मैच है। इस मैच की परिस्थितियां बेहद कठिन थीं। एमए चिदम्बरम स्टेडियम पर काफी उमस और गर्मी थी। 1052 टेस्ट मैचों में दूसरा टाई मैच था, लेकिन दुर्भायवश ऑस्ट्रेलिया का नाम इन दोनों मैचों से जुड़ा था। बॉब सिम्पसन 1960 के टाई मैच में टीम के खिलाड़ी थे 1986 में वह बतौर कोच ऑस्ट्रेलिया से जुड़े थे। ऑस्ट्रेलिया ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाज़ी का फैसला किया था, एलन बॉर्डर और डेविड बून ने शतक और डीन जोंस ने दोहरा शतक बनाया था। जोंस को मैच के दौरान ही डिहाइड्रेशन हो गया था। उन्हें अस्पताल में भर्ती होना पड़ा था। बॉब सिम्प्सन जोंस की इस पारी को “ऑस्ट्रेलिया की तरफ से खेली सबसे महान पारी बताया था।” जवाब में भारतीय टीम ने अच्छा प्रदर्शन किया लेकिन वह ऑस्ट्रेलिया के स्कोर के सामने नाकाफी था। कपिल देव ने शतक बनाया और टीम इंडिया ने 397 रन बनाये थे। ऑस्ट्रेलिया ने दूसरी पारी में 170 रन पर पारी घोषित कर दी थी। इस तरह भारत के सामने 347 रन का लक्ष्य था। गावस्कर, अमरनाथ और शास्त्री ने भारत के लिए अच्छी पारियां खेली थी। भारत को जीत के लिए मैच के अंतिम ओवर में 4 रन बनाने थे। लेकिन मैच की अंतिम गेंद पर मनिंदर सिंह को एलबीडब्लू करार दिया गया था। जिसकी वजह से दर्शकों से खचाखच भरे स्टेडियम में सन्नाटा पसर गया था। परिणाम: ऑस्ट्रेलिया 574/7(जोंस-210 और यादव-4/142) और 170/5 (डेविड बून 49, मनिंदर सिंह 3/60)पारी घोषित और भारत 397 (कपिल देव 119, ग्रेग मैथ्यूज 103/5) और 347(गावस्कर 90, रे ब्राइट 5/94) #2 साल 2003 भारत बनाम ऑस्ट्रेलिया दूसरा टेस्ट-एडिलेड, ऑस्ट्रेलिया

dravid_adelaide2003_630getty-1408726079-1417976435-1474211465-800

साल 2003 में भारतीय टीम ने चार मैचों की टेस्ट सीरीज में ऑस्ट्रेलिया को एडिलेड में दूसरे टेस्ट में हरा दिया था। साल 2001 में जिस तरह द्रविड़ और लक्षमण ने ऑस्ट्रेलिया को हराया था। वही कारनामा फिर दोहराया गया था। ऐसा कम ही हुआ जब किसी टीम ने 500 रन बनाये हों और अंत में उसे हार का सामना करना पड़ा हो। उपकप्तान द्रविड़ ने इस मैच में दोहरा शतक बनाया था। इस मैच में अजित अगरकर ने दूसरी पारी में शानदार गेंदबाज़ी की थी। ऑस्ट्रेलिया ने इस मैच की पहली पारी में 556 रन बनाये थे, पोंटिंग ने इस मैच में दोहरा शतक बनाया था। अनिल कुंबले को 5 विकेट मिले थे। पहली पारी में एक समय भारत का स्कोर 85 रन पर 4 विकेट था। लेकिन एक बार फिर द्रविड़ और लक्ष्मण ने भारत की लाज बचाते हुए 303 रन की साझेदारी कर डाली। द्रविड़ ने इस मैच में नाबाद 233 रन बनाये। भारत ने कुल 523 रन बनाये। जिसकी वजह से कंगारुओं को 33 रन की बढ़त मिल गयी। दूसरी पारी में जब कंगारू टीम बल्लेबाज़ी करने आई तो अगरकर ने कहर बरपा दिया। उनकी पूरी टीम 196 रन पर आलआउट हो गयी। अजित ने 41 रन देकर 6 विकेट लिए। इस मैच को जीतने के लिए भारत को 230 रन बनाने थे। द्रविड़ ने एक बार फिर 72 रन की नाबाद पारी खेलते हुए भारत को 6 विकेट की जीत दिला दी। लक्ष्मण और सहवाग ने भी इस मैच में बेहतरीन खेल दिखाया था। परिणाम: ऑस्ट्रेलिया 556(पोंटिंग 242, कुंबले 154/5) और 196(हेडन 99, अगरकर 41/6), भारत 523( द्रविड़ 233, बिकल 118/4) और 233/6(द्रविड़ 72, काटिच 1/22) #1 साल 2001 भारत बनाम ऑस्ट्रेलिया, दूसरा टेस्ट- कोलकाता, भारत

dravid_laxman_kolkata_afp-1474211536-800

“जीत छीन लेना” इस मुहावरे को हकीकत में बदलते हुए भारतीय टीम ने इस मैच में जीत हासिल की थी। भारत ने इस मैच में यादगार वापसी की थी। दूसरी पारी में द्रविड़ और लक्ष्मण ने एतिहासिक पारी खेली थी। इसके अलावा हरभजन सिंह ने कमाल की हैट्रिक लगाई थी। जो आज भी लोगों के जहन में ताज़ा है। ऑस्ट्रेलिया उस वक्त 16 मैच लगातार जीतकर विजयी रथ पर सवार था। साथ ही पहले मैच में भारत को भी उन्होंने हरा दिया था। लेकिन दुसरे टेस्ट की भारत की दूसरी पारी में पासा पलट गया। ऑस्ट्रेलिया के शीर्ष 3 बल्लेबाजों ने अच्छी शुरुआत की थी। स्टीव वॉ के शतक और गिलेस्पी के 46 रन की मदद से ऑस्ट्रेलिया ने 445 रन बनाये थे। जवाब में भारतीय टीम मात्र 171 रन बना सकी। लक्ष्मण इस पारी में सबसे ज्यादा 59 रन बनाये थे। 274 रन से पिछड़ने के बाद दूसरी पारी में लक्ष्मण (281) और द्रविड़ (180) के बीच यादगार साझेदारी के बदौलत भारत ने ऑस्ट्रेलिया के सामने 374 रन का लक्ष्य रखा। उसके बाद हरभजन सिंह ने हैट्रिक लेकर ऑस्ट्रेलिया को हार की तरफ धकेल दिया। इस मैच में सचिन ने भी अच्छी गेंदबाज़ी की थी। परिणाम: ऑस्ट्रेलिया 445 (वा 110, सिंह 7/123)और 212(हेडन 67 सिंह 6/73) और भारत 171(लक्ष्मण 59, मैग्रा 4/18) और 657/7 (लक्ष्मण 281, मैग्रा 3/103) लेखक-राजदीप पुरी, अनुवादक-जितेन्द्र तिवारी

Edited by Staff Editor

Comments

Fetching more content...