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साल 2000 के बाद से क्षमता से अधिक आंके गये 5 टेस्ट क्रिकेटर

Rahul Pandey
ANALYST
Modified 11 Feb 2018

  2000 के बाद से ही सीमित ओवरों के स्वरूपों ने धीरे-धीरे टेस्ट क्रिकेट को कोने में करना शुरू कर दिया है। विश्व भर में एकदिवसीय मैचों के प्रति सभी का आकर्षण बढता गया। 2007 में विश्व टी -20 के पहले संस्करण की सफलता के बाद, क्रिकेट के छोटे प्रारूप ने असीमित लोकप्रियता हासिल कर ली है। हालांकि, पिछले 18 सालों में अभी भी टेस्ट क्रिकेट प्रशंसकों के लिए कई आनंद भरे क्षण प्रदान करने में सफल रहा है। हालांकि विभिन्न टीमों के कई सितारों ने खेल के इतिहास में खुद का नाम बनाया है, लेकिन कुछ ऐसे भी खिलाड़ी हैं जो टेस्ट प्रारूप में अपने शुरुआती वर्षों में प्राप्त सफलताओं के बाद अपेक्षाओं पर खरे नहीं उतर सके हैं। यहाँ हम ऐसे ही पांच बड़े टेस्ट क्रिकेटरों पर नजर डाल रहे हैं, जिन्होंने 2000 के बाद खेला है। हालांकि, इस सूची में से कुछ नाम रंगीन कपड़ों में बहुत सफलता प्राप्त कर चुके हैं:

# 5 आशीष नेहरा

  खेल के प्रति अपने हार न मानने वाले रवैये और रचनात्मक दृष्टिकोण के साथ, आशीष नेहरा ने कई चोटों से जूझकर भी भारत की सीमित-ओवर टीम के महत्वपूर्ण सदस्य बने रहे। विशेष रूप से वह 50 ओवर प्रारूप में वह एक बहुत ही उपयोगी गेंदबाज थे। सटीकता से गेंदबाजी करने की प्रतिभा के दम पर उन्होंने भारत के 2011 के विश्व कप की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनको सफ़ेद-गेंद से सफलता तो मिली, लेकिन वह टेस्ट क्रिकेट में वैसी सफलता नही अर्जित कर सके। 1999 में एशियाई टेस्ट चैम्पियनशिप के दौरान पदार्पण करने के बाद, नेहरा ने टेस्ट प्रारूप में 17 मैच खेले। जिसमे उन्होंने 42.40 की औसत से 44 विकेट लिये और वो भी 78.3 की स्ट्राइक रेट, जो उनके टेस्ट क्रिकेट में संघर्ष को दर्शाता है। जब सौरव गांगुली ने 2000 में कप्तानी संभाली, नेहरा को तेज गेंदबाजी विभाग में भारत की अगली बड़ी उम्मीद के तौर पर देखा गया था। हालांकि, फिटनेस के साथ-साथ पुरानी गेंद से ज्यादा प्रभाव न डाल पाने के चलते कि उनके टेस्ट करियर ने कभी रफ़्तार नही पकड़ी।
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Published 11 Feb 2018
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