एमएस धोनी का अपने आलोचकों को 5 करारा जवाब

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एमएस धोनी का नाम पहले से ही महान खिलाड़ियों में शुमार होता है। वह निसंदेह दुनिया के बेहतरीन फिनिशर बल्लेबाज़ हैं। वह काफी शांत बल्लेबाज़ हैं, जिसकी वजह से वह अनहोनी को होनी में बदलने में हमेशा कामयाब रहे हैं। बीते कई सालों से उन्होंने वनडे और टी-20 में कई बार मैच जिताऊ पारी खेली है। देश भर के फैन के जब काफी डरे हुए होते हैं, तब उन्हें धोनी से चमत्कार की जरूरत होती है। खासकर उनकी निरंतरता को देखते हुए। इसके आलावा धोनी बीते कई साल से अपने आलोचकों का मुंह बंद करने में कामयाब रहे हैं। जब लोग के हाथ से चिप्स दूर हो जाती है और आलोचकों की सांसें गले के नीचे रह जाती हैं। तभी धोनी मैदान पर उतरकर अपने बेहतरीन प्रदर्शन से सभी का मुंह बंद कर देते हैं। आइये आज हम आपको ऐसे ही धोनी के 5 बेहतरीन पारी के बारे में बता रहे हैं। #1 91(79) नाबाद बनाम श्रीलंका, मुंबई, 2011 साल 2011 के विश्वकप फाइनल में धोनी ने जो पारी खेली थी वह उनकी सबसे महान पारी थी। श्रीलंका के 274 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम के शुरू में ही दोनों सलामी बल्लेबाज़ सचिन और सहवाग आउट हो गये थे। जिसके बाद गंभीर और कोहली ने कुछ देर तक पारी को आगे बढ़ाया। भारत का स्कोर 114 रन पर 3 विकेट था तो धोनी मैदान पर बल्लेबाज़ी करने आये थे। जिसके बाद उन्होंने गंभीर के साथ मिलकर शतकीय साझेदारी निभाई। धोनी ने खुद को युवराज से पहले मैदान पर उतारा था। उन्होंने मुरलीधरन को काउंटर करने की चाल चली थी जो कामयाब हुई थी। उन्होंने गंभीर के साथ 109 और युवराज के साथ 54 रन की साझेदारी निभाकर भारत को 49वें ओवर में जीत दिला दी थी। धोनी ने छक्का मारकर इस मैच में जीत दिलाई थी। धोनी ने ये पारी तब खेली थी जब भारत को सबसे ज्यादा जरूरत थी। #2 92(86) बनाम दक्षिण अफ्रीका, इंदौर, 2015 msd-1463900206-800 भारत पहला मैच हार चुका था और टीम दूसरा मैच भी हार जाती अगर धोनी टीम को संकट से न उबारते। पहले बल्लेबाज़ी करते हुए भारत का स्कोर एक समय 124 पर 6 था लेकिन धोनी ने भुवनेश्वर कुमार के साथ 41 और भज्जी के साथ 56 रन की साझेदारी निभाते हुए 92 रन बनाये थे। जबकि टीम ने निश्चित अंतराल पर विकेट गवां दिए थे। लेकिन उन्होंने 86 गेंदों में 7 चौके और 4 छक्के मारे थे। उन्होंने इस अहम पल में बेहतरीन बल्लेबाज़ी की थी। उनकी वजह से टीम ने किसी तरह से पूरे पचास ओवर खेल पाई थी। धोनी ने पहले भारत को सम्मानजनक स्कोर 247 तक पहुंचाया जिसके बाद अपनी कप्तानी से उन्होंने दक्षिण अफ्रीका को 225 रन पर आलआउट भी कर दिया। इससे पहले वनडे में मिली हार के बाद उनसे बड़ा ही अटपटा सवाल पूछा गया था। उन्होंने उन सभी आलोचकों का मुंह अपने बल्ले से बंद किया था। #3 नाबाद 44(58) बनाम ऑस्ट्रेलिया, एडिलेड 2012 australia-adelaide-2012-1463900218-800 कॉमनवेल्थ बैंक सीरीज़ का ये मैच भारत के लिए काफी यादगार मैच था। इस मैच में धोनी ने टीम इंडिया को आख़िरी ओवर में जीत दिलाई थी। इस सीरीज़ से पहले भारतीय टीम टेस्ट में 4-0 से हार गयी थी। भारी दबाव में 270 रन के लक्ष्य को 2 बाल रहते ही टीम ने बना लिया था। हालांकि एक समय टीम इंडिया ने 5 विकेट पर 239 रन बनाये थे। गंभीर ने इस मैच में 92 रन की पारी खेली थी। लेकिन भारतीय टीम इसके बाद लक्ष्य हासिल करने में थोड़ा डगमगा गई थी। इसके आलावा एक समय धोनी ने 31 गेंदों में मात्र 13 रन बनाये थे। लेकिन उन्होंने अंतिम ओवर में 6 गेंदों में 13 रन बनाकर टीम को विजेता बना दिया। धोनी ने इस मैच में क्लिंट मैके की गेंद पर छक्का जड़कर भारत को विजयी बनाया था। धोनी ने इस बड़े मैदान पर छक्का मारकर विलेन से हीरो बन गये थे। #4 नाबाद 54(29) बनाम KXIP, धर्मशाला 2010 kxip-dharamsala-2010-1463900231-800 ये धोनी की बेहतरीन टी-20 परफॉरमेंस में से एक है। इस पारी ने सीएसके फैन्स को हैरान कर दिया था। 192 रन का पीछा कर रहे सीएसके ने 16.4 ओवर में 148 रन बनाये थे और उसके 4 विकेट गिर चुके थे। इस जीत ने सीएसके को सेमीफाइनल का टिकट दिलाया था। इसके बाद उनकी टीम ने सेमीफाइनल में डेक्कन को और फाइनल में मुंबई को हराकर तीसरे सीजन की ट्राफी अपने नाम किया था। धोनी ने उस सीजन में 11 मैचों में 287 रन बनाये थे। लेकिन उनकी इस पारी उनके व्यक्तित्व का पता चलता है। वह जब ऐसे मौके पर आये हैं। उन्होंने भावनात्मक होकर बल्लेबाज़ी की है। इससे पता चलता है कि वह कितने मजबूत खिलाड़ी हैं, अंतिम क्षणों में जीत को अपनी तरफ खींच लेता है। #5 नाबाद 64(32) बनाम KXIP, विशाखापट्नम, 2016 kxip-visakhapatnam-2016-1463900241-800 धोनी के लिए सीजन सबसे खराब सीजन रहा है। हालांकि उन्होंने 40.5 के औसत से 248 रन बनाये हैं। पुणे सुपरजायंट्स के लिए पहला सीजन अच्छा नहीं गया। जिसकी वजह उनके ज्यादातर खिलाड़ियों के चोटिल हो जाना रहा है। हालाँकि धोनी सीजन का अंत अपने ही अंदाज में किया। 173 रन के जवाब में पुणे के 86 रनों पर 5 विकेट गिर गये थे। धोनी ने तिसारा परेरा के साथ मिलकर 58 रन की साझेदारी की थी। अंतिम ओवर में टीम को जीत के लिए 6 गेंदों में 23 रन बनाने थे। लेकिन धोनी ने अक्षर पटेल जो 20वां ओवर फेंकने आये थे। चौके-छक्के जड़ने का सोच लिया था। उन्होंने इस मैच की आखिरी 2 गेंदों छक्के मारकर टीम को अपने ही अंदाज में जीत दिलाया। इस तरह ये मैच टूर्नामेंट का सबसे अच्छा साबित हुआ। धोनी ने एक बार फिर खुद को साबित कर दिया और वह कर दिया दिखाया जो उनके आलोचकों के मुंह पर ताला लगाने के लिए काफी था।

Edited by Staff Editor
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