Create
Notifications
New User posted their first comment
Advertisement

5 ऐसी तकनीक जिसने फ़ील्डिंग मे ला दिया है क्रांतिकारी बदलाव

Syed Hussain
ANALYST
Modified 31 Aug 2016, 20:57 IST
Advertisement
आज से क़रीब दो दशक पहले बहुत कम ही ऐसे खिलाड़ी थे, जिन्हें गेंद या बल्ले से नहीं बल्कि उनकी फ़ील्डिंग के लिए जाना जाता था। दक्षिण अफ़्रीका के जॉन्टी रोड्स जैसे फ़ील्डर ने सिर्फ़ अपनी फ़ील्डिंग से सभी को दीवाना बनाया, बल्कि उनकी ही बदौलत आज फ़ील्डिंग का स्तर भी बदल चुका है। अच्छा और चपल फ़ील्ड आज हरेक कप्तान की पसंद बनता जा रहा है, इसके लिए खिलाड़ी अपनी फ़ील्डिंग को शानदार करने के लिए स्लाइड, डाइव और जंप करते हुए आधे मौक़ों को विकेट में तब्दील कर देते हैं। पिछले कुछ दशकों में फ़ील्डींग के स्तर में तेज़ी से बदलाव आए हैं जिसने फ़ील्डिंग को पूरी तरह बदल दिया है। आपके सामने पेश हैं ऐसे ही 5 बदलाव और प्रयोग जिसने इसे बना दिया है और भी मनोरंजक और आकर्षक: # स्लाइड और थ्रो bell-1472647100-800 सीमित ओवर के क्रिकेट में बाउंड्री को छोटा कर दिया जाता है, जिससे फ़ील्डर्स को चौका बचाना और भी मुश्किल हो जाता है। आजकल फ़ील्डर्स गेंद को सीमा रेखा से पहले ही पकड़ने के लिए स्लाइड करते हैं, इससे काफ़ी जल्दी गेंद को पकड़ भी लिया जाता है और जोखिम भी कम होता है। स्लाइड भी दो तरीक़ों की होती है, अगर फ़ील्डर सर्किल के अंदर हैं तो पहले वह डाइव लगाते हैं और फिर स्लाइड करते हुए गेंद को अपने कब्ज़े में लेते हैं। दूसरा तरीक़ा ये है कि जब खिलाड़ी सीमा रेखा के पास दौड़ते हुए गेंद को पार होने से बचाते हैं तब वह ऊपर के शरीर से पहले छलांग लगाते हुए और अपने दोनों हाथो को फैलाते हुए गेंद को सीमा रेखा से पहले रोकते हैं, और फिर तेज़ी से थ्रो करते हैं।
1 / 5 NEXT
Published 31 Aug 2016, 20:57 IST
Advertisement
Fetching more content...
App download animated image Get the free App now
❤️ Favorites Edit