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वनडे में 5 ऐसे मौके जब निचले क्रम के बल्लेबाज़ों ने टीम को जीत दिलाई हो

Modified 22 Nov 2017, 13:32 IST
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  प्लेइंग इलेवन में आमतौर पर 6 मुख्य बल्लेबाज़ (जिसमें विकेट कीपर को भी गिना जाता है), एक ऑलराउंडर और 4 गेंदबाज़ शामिल होते हैं। जब किसी टीम का छठा विकेट गिरता है तो जीत की उम्मीदें काफ़ी कम रह जाती हैं, क्योंकि निचले क्रम के खिलाड़ियों को बल्लेबाज़ी का अनुभव कम होता है। ये ऐसे खिलाड़ी होते हैं जो आमतौर पर आख़िरी कुछ ओवर में पिच पर महज़ औपचारिकता निभाने आते हैं, लेकिन क्रिकेट के इतिहास में ऐसी कई मिसालें भरी पड़ीं हैं जब पुछल्ले बल्लेबाज़ों ने विपरीत हालात का हिम्मत से सामना किया हो। ऐसे कई मौके आए हैं जब सीमित ओवर के मैच में पुछल्ले बल्लेबाज़ों ने हार के मुंह से अपनी टीम के लिए मुश्किल जीत छीन ली हो। ऐसी जीत से दर्शकों में भी काफ़ी रोमांच पैदा होता है क्योंकि किसी को ये अंदाज़ा नहीं होता कि निचले क्रम के बल्लेबाज़ भी बड़ा कमाल कर सकते हैं। ऐसे मौके पर हारी हुई टीम के पास अफ़सोस करने के अलावा कुछ नहीं बचता। डिस्क्लेमर- हम यहां ऐसे बल्लेबाज़ों को तरजीह दे रहे हैं जो अपनी टीम में मुख्य बल्लेबाज़ नहीं थे, इसके अलावा सिर्फ़ उन मैचों पर ज़्यादा ध्यान दिया जा रहा है जो आईसीसी के मुख्य टूर्नामेंट और अन्य सीरीज़ के निर्णायक मैच है। #5 जब धोनी ने भुवनेश्वर को पहला अर्ध शतक बनाने की प्रेरणा दी थी (साल 2017 में श्रीलंका के ख़िलाफ़) BHUVI-DHONI धोनी को एक बेहतरीन फ़िनिशर के तौर पर जाना जाता है, हम यहाँ इसका सबसे ताज़ा उदाहरण बता रहे हैं। साल 2017 में जब टीम इंडिया का वनडे मुक़ाबला श्रीलंका से हो रहा था। श्रीलंका ने मिलिंदा सिरीवर्धना और चामारा कापुगेदारा की मदद से 50 ओवर में 236/8 रन का स्कोर बनाया। भारत को 47 ओवर में 230 रन का संशोधित लक्ष्य मिला। नए लक्ष्य का पीछा करते हुए भारत की सलामी जोड़ी शिखर धवन और रोहित शर्मा ने शतकीय साझेदारी निभाई। शुरुआत में भारत का स्कोर 109/0 था, एक वक़्त ऐसा लग रहा था कि भारत से मैच आसानी से जीत जाएगा लेकिन अगले 4 रन के अंदर भारत के दोनों सलामी बल्लेबाज़ आउट हो गए। धीरे धीरे भारत का टॉप ऑर्डर ताश के पत्तों की तरह बिखर गिरा। भारत को स्कोर 131/7 हो गया, जिससे टीम इंडिया पर हार का ख़तरा मंडराने लगा। धोनी का पिछले कुछ वक़्त में जैसा प्रदर्शन रहा था उससे उनके फ़ैन को भी माही से किसी करिशमे की उम्मीद कम ही थी। महेंद्र सिंह धोनी ने गंभीरता से बल्लेबाज़ी शुरू की और पिच के मिज़ाज को समझते हुए अपने आप को माहौल के मुताबिक ढालना शुरू किया। पिच की दूसरे छोर पर भुवनेश्वर कुमार थे जो काफ़ी नर्वस दिख रहे थे। धोनी ने सिंगल लेना शुरू किया जिससे स्ट्राइक बदलती रहे, वो भुवनेश्वर का बख़ूबी साथ दे रहे थे। उपल थारंगा की बचाव की रणनीति ने दोनों भारतीय खिलाड़ियों को पिच पर जमने का भरपूर मौका दिया।  उपल थारंगा ने अच्छी गेंदबाज़ी कर रहे अकिला धनंजया का इस्तेमाल नहीं किया जिसका सीधा फ़ायदा भारत को मिला। धोनी और भुवी ने श्रीलंका को मैच में वापसी को कोई मौका नहीं दिया और भुवनेश्वर ने शानदार 53 रन बनाए, धोनी ने भी एक बेहतरीन बल्लेबाज़ी करते हुए 45 रन जोड़े। भारत को इस मैच में 3 विकेट से यादगार जीत हासिल हुई।  
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Published 22 Nov 2017, 13:32 IST
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