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5 ऐसे मैदानी घटनाक्रम जो ये साबित करते हैं कि अनिल कुंबले भारत के महान कोच होंगे

Modified 25 Jun 2016
इस देश में लाखों-करोड़ो लोग क्रिकेट देखते हैं और बहुत से ऐसे लोग हैं जिनके अनिल कुंबले बचपन के हीरो रहे हैं। उनके 1999 के दिनों को कौन भूल सकता है। पाकिस्तान के खिलाफ पहला टेस्ट चेन्नई में हारने के बाद दिल्ली में हुए दूसरे टेस्ट में जो कुछ हुआ था। उससे अनिल कुंबले ने इतिहास बनाते हुए बतौर हीरो पेश आये थे। पाकिस्तान की दूसरी पारी में उसके बल्लेबाज़ एक के बाद एक कुंबले का शिकार हो रहे थे। एक पारी के सभी 10 विकेट लेने के बाद ये खिलाड़ी दिग्गज के तौर पर उभरा था। अब यही खिलाड़ी भारतीय टीम का मुख्य कोच बनाया गया है। कुंबले अपना कार्यभार वेस्टइंडीज के साथ होने वाले टेस्ट सीरीज से संभाल लेंगे। वहीं अगर उनके खेलने के दिनों को याद किया जाये तो वह कमाल के खिलाड़ी थे, लेकिन बतौर कोच अभी उनका कोई बहुत बड़ा अनुभव नहीं रहा है। ऐसे में हम आपको 5 ऐसे मौकों के बारे में बताना चाहते हैं, जब अनिल 'जंबो' कुंबले ने एक बेहतरीन परफ़ॉर्मर और लीडर के तौर पर ख़ुद को साबित किया। #1 2002: टूटे हुए जबड़े के बावजूद उन्होंने गेंदबाज़ी की 93276-1466741932-800 ये क्रिकेट के इतिहास का बहुत ही साहसिक और अतुल्य प्रदर्शन था। भारत साल 2002 में वेस्टइंडीज के दौरे पर था। अनिल कुंबले का मर्वन ढिल्लन की बाउंसर लगने से जबड़ा टूट गया था। लेकिन उन्होंने तबतक बल्लेबाज़ी की जबतक की वह आउट नहीं हुए। इसके अलावा जब टूटे जबड़े पर पट्टी बांधकर कुंबले गेंदबाज़ी करने आये तो क्रिकेट के दीवानों का दिल जीत लिया। साहसी कुंबले ने हार न मानते हुए अपने 14वें ओवर में दिग्गज बल्लेबाज़ ब्रायन लारा का विकेट भी लिया, वह दिल से गेंदबाज़ी कर रहे थे। इसके बाद जो कुछ अंटीगुआ में हुआ वह क्रिकेट के इतिहास में दर्ज हो गया। कुंबले का ये महान चरित्र दिखाता है कि वह अपने कोचिंग करियर में भी खुद को साबित करेंगे। वह ऐसे खिलाड़ी हैं, जिसने अपने देश के लिए सबकुछ किया है। ऐसे में ये अंदाजा लगाया जा सकता है कि बतौर कोच कुंबले अपना 100 फीसदी देंगे।
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Published 25 Jun 2016, 14:52 IST
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