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अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेटरों के घरेलु क्रिकेट खेलने के 5 सकारात्मक पहलू

CONTRIBUTOR
Modified 07 Sep 2016, 22:13 IST
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भारत ने हाल में वेस्टइंडीज़ के खिलाफ चार टेस्ट मैचों की सीरीज खेली है। भारत ने इस सीरीज़ को 2-0 से जीत लिया था। भारत के लिए इस सीरीज़ में एक बड़ी बात निकल कर सामने ये आई कि कुछ बड़े खिलाड़ी जो कुछ समय से खराब फॉर्म से गुज़र रहे थे अब अपनी ले पकड़ चुके हैं और अच्छा प्रदर्शन कर टीम और चयनकर्ताओं को अपने फॉर्म में होने का संकेत भी दे दिया है। हालांकि क्रिकेट में खिलाड़ी अपने फॉर्म और टीम में अपनी जगह बनाने को लेकर बेहद चिंतित रहते हैं। इस खेल में दिगज्जों का ऐसा मानना है कि जबतक आपका प्रदर्शन अच्छा चल रहा है आप टीम की ज़रुरत हैं पर जिस दिन आपका प्रदर्शन नीचे खिसका टीम को आपकी ज़रुरत नहीं। ये कोई लफ्ज़ी बातें नहीं बल्कि ऐसा कई बार देखा और सुना भी गया है और तो और कई बड़े बड़े खिलाड़ियों के साथ होता भी दिखा है। लेकिन इसके ठीक विप्रीत कुछ खिलाड़ियों का ये मानना है कि टीम में शामिल किये जाने और उसके बाद सही मौका मिलने पर बेहतरीन प्रदर्शन करने पर खिलाड़ियों के अन्दर पूरी तरह से आत्मविश्वास भी भर जाता है। ऐसा ही कुछ मानना है भारतीय टीम के दिग्गज ऑफ अपिनर आर अश्विन का। अश्विन इस सीरीज से पहले बेहद खराब फॉर्म से जूझ रहे थे पर वेस्टइंडीज़ दौरे पर अश्विन ने बल्ले और गेंद दोनों से शानदार प्रदर्शन किया। हालांकि ये तो बात थी भारतीय खिलाड़ियों की पर अगर विश्व क्रिकेट के बाकी खिलाड़ियों पर भी नज़र दौड़ाई जाये तो क्रिकेट के कुछ पूर्व दिग्गजों का मानना है कि अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में लगातार अच्छा प्रदर्शन करने के लिए किसी भी खिलाड़ी को घरेलु क्रिकेट आवश्यक रूप में खेलना चाहिए। घरेलु क्रिकेट खेलने से खिलाड़ियों का फिटनेस काफी सही रहता है और वो अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में लम्बे समय तक खेल सकते हैं। इसके अलावा बहुत सारे ऐसे और कारण हैं जो ये ज़ाहिर करते हैं कि अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेटरों को घरेलु क्रिकेट खेलना चाहिए। आइये नज़र डालते हैं ऐसे ही पांच कारणों पर: #1 घरेलु परिस्थितियों में मैच अभ्यास    1 पिछले कुछ सालों से घरेलु टीमें हमेशा पिच को अपनी मज़बूती के अनुसार के अनुसार तैयार किया करती हैं। देखा जाये तो ये प्रक्रिया इस फैसले को बहुत हद तक सही भी साबित कर देती है। भारत में हमेशा से स्पिन गेंदबाजों का बोलबाला रहा है इसी का एक बड़ा कारण है कि भारतीय पिच धीमी और स्पिनिंग प्रकृति की होती है। इसी के साथ साथ भारतीय बल्लेबाज़ इस परिस्थिति में आसानी से खुद को ढ़ालने में कामयाब हो पाते हैं। शायद यही वजह है कि भारतीय बल्लेबाज़ विदेशी स्पिनरों को खेलने में हिचकिचाते नहीं हैं। देखा जाये तो ये खिलाड़ियों का अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर लगातार अच्छा प्रदर्शन करने का इससे बेहतर अवसर और दूसरा कोई हो ही नहीं सकता कि वो जितना ज्यादा से ज्यादा हो घरेलु क्रिकेट खेलें।
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Published 07 Sep 2016, 22:13 IST
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