5 ऐसी वजहें जिसकी वजह से भारतीय टीम वेस्टइंडीज दौरे पर अपने दूसरे दर्जे की टीम भेज सकती है

2017/18 के सीजन में भारतीय टीम काफी क्रिकेट खेलने वाली है। चैंपियंस ट्रॉफी के खत्म होते ही भारतीय टीम वेस्टइंडीज से 5 वनडे और एक टी-20 मैच खेलेगी। भारत का वेस्टइंडीज दौरा 21 जून से शुरु होगा और 9 जुलाई तक चलेगा। पहले दो वनडे मैच त्रिनिदाद के क्वींस पार्क ओवल मैदान में खेले जाएंगे। इसके बाद तीसरा और चौथा मैच एंटीगुआ में सर विवियन रिचर्ड्स स्टेडियम में खेला जाएगा। 5वां और आखिरी वनडे मैच और एकमात्र टी-20 मैच जमैका के सबीना पार्क में खेला जाएगा। भारतीय टीम काफी समय से क्रिकेट खेलने में व्यस्त है। इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया से टेस्ट सीरीज उसके बाद आईपीएल का लंबा सीजन और फिर तुरंत चैंपियंस ट्रॉफी। ऐसे में टीम मैनेजमेंट वेस्टइंडीज दौरे पर युवा और नए खिलाड़ियों को भेज सकते है। इससे उन्हे आजमाने का एक मौका भी मिलेगा। आइए आपको बताते हैं वो कारण जिसकी वजह से वेस्टइंडीज दौरे पर भारत की दूसरे दर्जे की टीम जा सकती है। 5. लगातार क्रिकेट खेल रहे खिलाड़ियों को ब्रेक देना भारतीय टीम के रेगुलर खिलाड़ी 2016/17 के सीजन में काफी क्रिकेट खेल चुके हैं। 13 टेस्ट मैच और 11 वनडे मैच भारतीय खिलाड़ी खेल चुके हैं। उसके बाद आईपीएल। जाहिर है इतना क्रिकेट खेलने के बाद खिलाड़ी थक जरुर गए होंगे। इसलिए टीम मैनेजमेंट इनको थोड़ा आराम दे सकती है। क्योंकि अगर भारतीय टीम के फ्यूचर टूर की बात करें तो वेस्टइंडीज दौरे के बाद टीम श्रीलंका के साथ 3 टेस्ट, 5 वनडे और एक टी-20 मैच खेलेगी। ऐसे में खिलाड़ियों को ब्रेक जरुरी हो जाता है, ताकि वो खुद को तरोताजा रख सकें। 4. बेंच स्ट्रेंथ को आजमाने का समय team2 आईसीसी वनडे रैंकिंग की अगर बात करें तो भारत के 2 गेंदबाज अक्षर पटेल 11वें और अमित मिश्रा 13वें नंबर पर हैं। हालांकि इनमें से कोई भी प्लेयर चैंपियंस ट्रॉफी में नहीं खेल रहा है। चयनकर्ताओं ने इनकी जगह रविंद्र जडेजा और रविचंद्रन अश्विन की जोड़ी को तरजीह दी है। ऐसे में वेस्टइंडीज दौरे पर अक्षर पटेल और अमित मिश्रा को आजमाने का बढ़िया मौका रहेगा। वहीं अगर बल्लेबाजी की बात करें तो मनीष पांडेय, दिनेश कार्तिक और अंबाती रायडू जैसे बल्लेबाजों को ज्यादा मौका नहीं मिला पाया है। ऐसे में टीम मैनेजमेंट इन खिलाड़ियों को भी मौका दे सकती है। जिस तरह से भारतीय टीम इतना व्यस्त क्रिकेट खेल रही है उसे देखते हुए ये जरुरी हो जाता है कि हर विभाग में टीम के पास बैकअप हो। ऐसे में सभी खिलाड़ियों को आजमाना जरुरी हो जाता है। 3. वेस्टइंडीज से ज्यादा चुनौती मिलने की उम्मीद नहीं wi team एक जमाना था जब वेस्टइंडीज की टीम को तेज गेंदबाजों की फैक्ट्री कहा जाता था। जिसका सामना करना बड़े से बड़े बल्लेबाज के लिए काफी चुनौती भरा काम होता था। लेकिन समय बीतने के साथ ही वेस्टइंडीज की टीम से वो धार कम होती गई और एक जमाने में लगातार वर्ल्ड कप जीतने वाली कैरिबियाई टीम इस वक्त आईसीसी वनडे रैंकिंग में 9वें नंबर पर है। वेस्टइंडीज की टीम में अब वो बात नहीं रही। उन्होंने पिछली बार साल 2006 में भारतीय टीम को वनडे सीरीज में हराया था। मतलब 11 साल से वेस्टइंडीज की टीम भारतीय टीम को वनडे सीरीज में नहीं हरा सकी है। ऐसे में भारतीय टीम के पास सुनहरा मौका है कि वो नए खिलाड़ियों को मौका देकर एक प्रयोग कर सकती है। 2. नए खिलाड़ियों को निखारने का अच्छा मौका new player भारत के खिलाफ सीरीज से वेस्टइंडीज की टीम अपने वनडे रैंकिंग में जरुर सुधार करना चाहेगी। ऐसे में कैरिबियाई टीम काफी आक्रामक क्रिकेट खेलने की कोशिश करेगी। वेस्टइंडीज की टीम 2019 वर्ल्ड कप के लिए क्वालीफाई जरुर करना चाहेगी। भारतीय टीम मैनेजमेंट के पास ये अच्छा मौका रहेगा कि इन परिस्थितियों में वो अपने युवा खिलाड़ियों को निखरने का मौका दे। ऋषभ पंत, श्रेयस अय्यर, संजू सैमसन और ईशान किशन जैसे खिलाड़ियों के पास अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में खुद को ढालने का ये अच्छा मौका रहेगा। 1. सीनियर खिलाड़ियों के वर्कलोड को मॉनिटरिंग करना dhoni महेंद्र सिंह धोनी और युवराज सिंह इस समय अपने करियर के आखिरी दौर में चल रहे हैं। हालांकि दोनों ही प्लेयर 2019 का वर्ल्ड कप खेलकर ही विदा लेना चाहेंगे। ऐसे में टीम मैनेजमेंट को इन खिलाड़ियों के वर्कलोड पर ध्यान देने की जरुरत है ताकि चोट या थकान की वजह से इनके खेल पर कोई असर ना पड़े। युवराज सिंह पिछले काफी समय से चोट और बीमारी से परेशान रहे हैं, वहीं धोनी का शेड्यूल काफी बिजी रहा है। इसलिए टीम मैनेजमेंट को इन खिलाड़ियों को तरोताजा रखने की जरुरत है। ताकि ये अपनी पूरी क्षमता से प्रदर्शन कर सकें। लेखक- राम कुमार अनुवादक- सावन गुप्ता