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आधुनिक युग में ज्यादातर टेस्ट मैचों के परिणाम निकलने के पांच अहम कारण

Modified 10 Oct 2016, 20:58 IST
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बीते सालों में क्रिकेट के सबसे बड़े फॉर्मेट, टेस्ट क्रिकेट खेलने में तरीके में काफी बदलाव देखने को मिले हैं। बीते सालों में आज के मुकाबले टेस्ट मैच के काफी कम नतीजे निकलके थे, यहां तक की बिना तय समय सीमा वाले टेस्ट भी काफी ड्रॉ हुए । पहले ज्यादा आक्रामक क्रिकेट नहीं खेला जाता था और बल्लेबाज़ लंबे समय तक अपनी इच्छा के अनुसार बल्लेबाज़ी किया करते थे। रिजल्ट निकानले के लिए भी आज के मुकाबले आक्रामक खेल कम ही देखने को मिलता था , लिहाज़ा ज्यादातर मुकाबलों में दोनों टीमें रनों का अंबार लगा देती थी और मैच ड्रॉ हो जाया करते थे। लेकिन आधुनिक युग में खेल का तरीका बदल चुका है औऱ खिलाड़ियों की मानसिकता भी पहले के खिलाड़ियों से काफी अलग है। 1. बढ़ी हुई रन गति  CRICKET-SRI-AUS पुराने समय में बल्लेबाज़ों के पास काफी धीरज होता था और वो कई घंटों तक बिना रन बनाए खेल सकते थे, लिहाज़ा तब रन रेट काफी कम होती थी। तब के बल्लेबाज़ बड़े शॉट्स कम ही खेलते थे और कई मेडन ओवर्स खेलकर भी उनकी एक्रागता भंग नहीं होती थी। वनडे और टी-20 के आने से बल्लेबाज़ों का नजरिया पूरी तरह से बदल गया है और वो अब हम समय रन बनाने की ओर सोचते हैं। पहले की तरह मेडन ओवर्स काफी घट चुके है और रन रेट बढ़ गई है। आज के वक्त में 3 रन ज्यादा की रन रेट आम है और कई बार तो टीमें 4 से भी ज्यादा की औसत से रन बनाती हैं। एक दिन में 300 रन आसानी से बन जता हैं और सेट बल्लेबाज़ एक सेशन में 100 से ज्यादा रन बनाने की क्षमता रखते हैं। वीरेंद्र सहवाग , डेविड वॉर्नर और ए बी डिविलियर्स जैसे बल्लेबाज़ों ने  तो टेस्ट में एक तरह की क्रान्ती ला दी है और ये बल्लेबाज़ तेज़ रन बनाने के लिए गेंद को हवा में खेलने से भी नहीं कतराते । बढ़ी हुई रन रेट के चलते आज कल ज्यादातर टेस्ट मैच का नतीजा 5 दिनों से पहले ही आ जाता है।
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Published 10 Oct 2016, 20:58 IST
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