COOKIE CONSENT
Create
Notifications
Favorites Edit
Advertisement

इन 5 घटनाओं से ये साबित होता है कि एमएस धोनी एक नि:स्वार्थ क्रिकेटर हैं

15   //    19 Jul 2018, 11:28 IST
इस बात में कोई शक नहीं है कि महेंद्र सिंह धोनी टीम इंडिया के महानतम खिलाड़ियों में से एक हैं। जब उन्होंने टीम इंडिया के लिए डेब्यू किया था तब उनके बाल काफ़ी लंबे थे, जिसकी वजह से कई लोग उनकी दीवाने हो गए थे। जब साल 2007 में धोनी को टीम इंडिया का कप्तान बनाया गया था तब कई लोग उनकी क़ाबिलियत पर शक कर रहे थे। लेकिन धोनी ने अपनी कप्तानी में भारत को आईसीसी वर्ल्ड टी-20 2007 का चैंपियन बनाया था।

तब से लेकर अब तक धोनी ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा, रांची में जन्मे इस क्रिकेटर को क्रिकेट इतिहास का सबसे कामयाब कप्तान कहा जाता है। वो विश्व के सबसे बेहतरीन फ़िनिशर्स में से एक हैं। धोनी ने अपने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट करियर में कुछ ऐसा व्यवहार पेश किए हैं जिससे ये पता चलता है कि वो एक नि:स्वार्थ क्रिकेटर हैं। हम यहां ऐसी ही 5 घटनाओं के बारे में चर्चा कर रहे हैं।

#5 जब धोनी ने सौरव गांगुली को कप्तानी सौंपी थी



ये बात तब की है जब साल 2008 में ऑस्ट्रेलियाई टीम भारत के दौरे पर आई थी। नागपुर में सौरव गांगुली अपने अंतरराष्ट्रीय करियर का आख़िरी टेस्ट मैच खेल रहे थे। पहले बल्लेबाज़ी करते हुए टीम इंडिया ने 441 रन बनाए थे जिसमें तेंदुलकर ने 109 रन की शतकीय पारी खेली थे। इसके जवाब में ऑस्ट्रेलिया ने 355 रन का स्कोर खड़ा किया जिसमें कैटिच ने 102 रन की पारी खेली थी।

इस हिसाब से भारत ने पहली पारी में कंगारुओं के ख़िलाफ़ 86 रन की बढ़त हासिल कर ली थी। दूसरी पारी में टीम इंडिया 295 रन पर ऑल आउट हो गई थी, सहवाग ने भारत की तरफ़ से सबसे ज़्यादा 92 रन बनाए थे। बड़े लक्ष्य का पीछा करते हुए ऑस्ट्रेलिया 209 रन ही बना पाई और भारत ये मैच 172 रन से जीत गया।

इस मैच का सबसे ख़ास पल तब आया जब टीम इंडिया को जीत के लिए महज़ 1 विकेट की ज़रूरत थी। उस वक़्त एमएस धोनी ने अपनी कप्तानी ने दादा को सौंप दी थी। और इस तरह धोनी ने गांगुली को एक यादगार विदाई दी थी।
1 / 5 NEXT
Advertisement
Fetching more content...