5 कारण आखिर क्यों युवराज सिंह को भारतीय टीम में नहीं चुना जाना जायज है

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भारतीय टीम में कई ऐसे खिलाड़ी हैं, जिनके साथ प्रशंसकों का भावात्मक लगाव है । युवराज सिंह हमेशा से ही मैच विनर खिलाड़ी रहे हैं । उन्होंने मैदान के अंदर और मैदान के बाहर दोनों जगह हमेशा परिस्थियों का डटकर सामना किया है। भारत ने एक टी-20 वर्ल्ड कप और 2011 में वर्ल्ड कप जीता, इस जीत में युवराज सिंह का योगदान सबसे ज्यादा रहा है। अपने विस्फोटक पारियों की वजह से युवराज सिंह प्रशंसकों के बीच काफी लोकप्रिय हैं । युवराज सिंह ने इतनी शानदार-शानदार पारियां खेली हैं कि जब भी वो मैदान पर उतरते हैं तो फैंस को उनके काफी उम्मीदें होती हैं । फिर चाहें वो रणजी मैच ही क्यों ना खेल रहे हों लोग उनसे हमेशा रनों की उम्मीद करते हैं । ये भी कहा गया कि इस रणजी सीजन में युवराज ने शानदार बैटिंग की, और ऐसा सिर्फ वहीं कर सकते हैं । उन्होंने इस रणजी सीजन में 5 मैचे खेले जिसमें 84 की औसत से 672 रन बनाए । इसमें उनके 2 शतक और 2 अर्धशतक शामिल हैं । लेकिन इस शानदार बैटिंग के बावजूद वो भारतीय टीम में जगह नहीं बना सके। चयनकर्ता युवा खिलाड़ियों को ज्यादा तरजीह दे रहे हैं और भविष्य के लिए उन्हें तैयार कर रहे हैं, इसलिए युवराज सिंह की टीम में जगह नहीं बनती है। यहां हम आपको 5 कारण बता रहे हैं जिसकी वजह से युवराज सिंह की टीम में जगह नहीं बनती है :


  1. वो अब पुराने वाले युवराज सिंह नहीं रहे, वो अब उनका अतीत है-

हर अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट खिलाड़ी को पता होता है कि प्रथम श्रेणी क्रिकेट और अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में बहुत बड़ा अंतर होता है। इसलिए युवराज सिंह प्रथम श्रेणी क्रिकेट में तो खूब रन बना रहे हैं, लेकिन अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में वो रनों के लिए जूझते नजर आते हैं। इसका कारण ये है कि युवराज सिंह को लय में आने के लिए टाइम लगता है। IPL में भी शुरुआत में उन्हें दिक्कतें आईं। इसका कारण ये है कि युवराज सिंह अब पुराने वाले युवराज सिंह नहीं रहे। आज के अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में उन्हें खुद को एडजस्ट करने में दिक्कत हो रही है। इस वजह से अगर उन्हें टीम में शामिल नहीं किया जा रहा है तो इसमें कोई हैरानी वाली बात नहीं है। 2. एक कदम वापस लेने जैसा होगा-

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युवराज सिंह 34 साल के हैं और अब अगर उन्हें चयनकर्ता टीम में शामिल करते हैं तो फिर युवा खिलाड़ियों के टैलेंट को व्यर्थ करने जैसा होगा क्योंकि युवा खिलाड़ी लंबे समय तक टीम के साथ जुड़े रह सकते हैं। युवराज सिंह का चयन करके चयनकर्ता ऐसी गलती नहीं करना चाहेंगे क्योंकि इससे खिलाड़ियों में गलत मैसेज जाएगा। युवराज सिंह की जगह टीम में जो युवा खिलाड़ी आएगा, वो लंबे समय तक टीम को अपनी सेवाएं दे सकेगा। इससे युवा खिलाड़ियों में विश्वास पैदा होगा और चयन में निरंतरता आएगी। 3. अच्छे तेज गेंदबाजों को खेलने में दिक्कत- quality yuvi बात 2013 की करते है, जब युवराज सिंह ने टीम में वापसी की थी। तब मिचेल जॉनसन ने उन्हें लगातार अपनी बाउंसर गेंदों से परेशान किया और अंत में उनका विकेट भी लिया। युवराज सिंह को उस समय जॉनसन की गेंदों पर काफी दिक्कत हुई। उम्र बढ़ने के साथ ही युवराज सिंह में अब वो तेजी और फुर्ती नहीं रही, जिसके लिए वो जाने जाते थे। इसलिए तेज गेंदबाजों के सामने उन्हें रन बनाने में दिक्कत होती है। ऐसे में जब विरोधी टीम बल्लेबाज के हर एक शॉट को बारीकी से चेक करती हो वैसे में युवराज से तेज गेंदबाजों के सामने रन की अपेक्षा करना जायज नहीं होगा। इसलिए युवराज सिंह की कमजोरियों के बारे में पता होने के बावजूद उन्हें टीम में शामिल करने का कोई तुक ही नहीं बनता। 4. कुछ भी साबित करने को नहीं रहा-

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एथलीट और खिलाड़ी हमेशा दूसरों के लिए प्रेरणा स्त्रोत बनना चाहते हैं, वो कुछ ऐसा करना चाहते हैं जिससे लोग उन्हें लंबे समय तक याद रखें। तो ऐसे में सवाल ये उठता है कि युवराज सिंह के पास साबित करने के लिए क्या बचा है ? क्योंकि युवराज सिंह ने अपने क्रिकेट करियर में काफी कुछ हासिल कर लिया है, कोई ऐसी चीज बची नहीं है जो अभी पाने के लिए बची हो। लेकिन अगर किसी युवा क्रिकेटर को मौका मिलता है तो उसके पास पाने के लिए उसका पूरा करियर होगा। अगर हम इसके दोनों पहलुओं पर गौर करें तो युवराज सिंह का टीम से बाहर रहना ही बेहतर होगा। उनकी जगह किसी युवा प्लेयर को मौका देकर उसे आजमाना और खुद को साबित करने के लिए मौका देना ही अच्छा है। 5. गैप सॉल्यूशन की दिक्कत-

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34 साल के युवराज सिंह को अगर टीम में शामिल किया जाता है तो ज्यादा से ज्यादा वो 2 या 3 साल तक खेल पाएंगे। ऐसे में चयनकर्ताओं को वो गैप भरने के लिए किसी और विकल्प पर विचार करना पड़ेगा। अगला विश्व कप में शुरु होने में अभी 3 साल हैं, ऐसे में वनडे टीम में भी युवराज सिंह को शामिल करने का कोई तुक नहीं बनता है। हां उसकी जगह हम घरेलू क्रिकेट में अच्छा करने वाले खिलाड़ियों को मौका दे सकते हैं और उनके प्रदर्शन के हिसाब से वर्ल्ड कप तक एक अच्छी टीम बना सकते हैं। इसलिए युवराज सिंह की जगह पर युवा खिलाड़ी का चुनाव ही ठीक रहेगा। चयनकर्ताओं को टीम चुनते समय अपनी भावनाओं पर काबू रखकर टीम हित में कड़ा फैसला लेना होगा।

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