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5 कारण जिससे ज़हीर खान भारतीय गेंदबाजी को और मजबूत बना सकते हैं

Modified 14 Jul 2017, 13:52 IST
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दुनिया में कुछ ऐसे लोग होते हैं, जिनके चरित्र में ही काबिलियत समाहित होती है। परिस्थितियां कैसी भी क्यों न हों उनके पास कोई न कोई समाधान जरुर निकल आता है। वह आपकी हर मौके पर मदद करने के लिए तैयार रहते हैं। उनकी ये खासियत लोगों को आकर्षित करती है। साल 2003 से लेकर 2013 तक ज़हीर भारत के शीर्ष गेंदबाज़ रहे। विकेट की जरूरत होती थी, कप्तान गेंद ज़हीर को थमा देता था। किस बल्लेबाज़ को कहाँ गेंद करनी है, ज़हीर सलाह देते थे। विपक्षी टीम को पेस दिखाना हो आप गेंद जहीर को दे दो। वहीं राहुल द्रविड़ को भारतीय बल्लेबाज़ी की दीवार माना जाता था। टेस्ट में वह विपक्षी टीमों के लिए सरदर्द बन जाया करते थे। ज़हीर ने साल 2011 के वर्ल्डकप अपनी गेंदबाज़ी से भारतीय टीम को विश्वविजेता बनने में अहम योगदान निभाया था। वहीं अब उन्हें भारतीय टीम का गेंदबाज़ी कोच नियुक्त किया गया है। उनके आने से क्या फायदा होगा,पढ़ें ये खास लेख: अमूल्य अनुभव जहीर भारत के लिए तीन विश्वकप खेल चुके हैं, जिसमें दो विश्वकप में भारत फाइनल तक पहुंचा है। इसके अलावा जहीर खान टीम के अंतिम एकादश में खेले हैं। साल 2003 व 2011 में जहीर खान ने भारत के लिए शानदार गेंदबाज़ी भी की थी। 2003 के संस्करण में जहीर ने 11 मैचों में 18 विकेट लिए थे। भारत उन्हीं दो मुकाबलों में हारा जब जहीर को विकेट नहीं मिला। उनका औसत इस दौरान 20.77 का रहा। दिग्गज जवागल श्रीनाथ भी उनसे पीछे रहे थे। साल 2011 में जब भारत विश्व विजेता बना तो ज़हीर खान ने सबसे ज्यादा विकेट चटकाए थे। 9 मैचों में ज़हीर को 21 मिले थे। कुल मिलाकर ज़हीर वर्ल्डकप में भारत के सबसे सफल गेंदबाज़ रहे और उनके नाम 23 मैचों में 44 विकेट दर्ज हैं। ज़हीर ने काउंटी क्रिकेट खेलकर खुद को एक बेहतरीन गेंदबाज़ बनाया था। मौजूदा समय में वह भारत के सबसे अनुभवी गेंदबाज़ हैं। जिनसे भावी पीढ़ी काफी कुछ सीख सकती है। पूर्व गेंदबाज़ी कोच जोए डावेस ने ज़हीर की तारीफ की है और उन्हें भारत के सबसे बेहतरीन गेंदबाज़ बताया है।
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Published 14 Jul 2017, 13:52 IST
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