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कप्तान के रूप में विराट कोहली को इन 5 गलतियों से बचना चाहिए

Modified 12 Dec 2016
इसमें कोई दो राय नहीं कि इस समय विराट कोहली भारत के सबसे लोकप्रिय खिलाड़ी हैं| एक ऐसा खिलाड़ी जो क्रिकेट के मैदान पर अपने जोश, जनून और कभी ना हार मानने वाले जज्बे के लिए जाना जाता है| पिछले 5 सालों में विराट ने जिस तरह से अपने खेल को 'इम्प्रूीव' किया है, उसे देखते हुए कहा जा सकता है कि आसमान ही उनकी सीमा है| बतौर बल्लेबाज हमेशा ही कोहली से ‘विराट’ प्रदर्शन की उम्मीद की जाती है और कोहली उम्मीदों पर खरे भी उतरते आए हैं, कप्तनी करियर की शुरूआत में अगर ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ दिल तोड़ने वाली हार को छोड़ दिया जाए तो हर मोर्चे पर कोहली ने अपनी काबिलियत साबित की है | हालांकि बतौर टेस्ट कप्तान कोहली के लिए शुरूआत अच्छी नहीं रही, पहले 4 टेस्ट मैचों में से टीम इंडिया को 2 मुकाबले ड्रॉ खेलने पड़े, जबकि 2 में हार का मुंह देखना पडा | यहां पर गौर करने वाली बात ये है कि जो 2 टेस्ट मैच टीम इंडिया हारी उसमें जीत के काफी करीब पहुंचकर लड़खड़ाई थी और एक कप्तान के रूप में कोहली के करियर ने यहीं से उड़ान भरी | श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट सीरीज में सीरीज में 0-1 से पिछड़ने के बाद कोहली एंड कंपनी ने जबरदस्त कमबैक किया और श्रीलंका को उसी के घर में 2-1 से पटखनी दी, इसके बाद वेस्टइंडीज को उसी के गढ़ में 2-0 से हराया | कोहली की कप्तानी में भारतीय टीम ने लगातार 17 मुकाबलों में एक में भी हार का सामना नहीं किया है और इस रिकॉर्ड के साथ ही कोहली ने पूर्व कप्तान कपिल देव के भी लगातार 17 टेस्ट में अपराजेय रहने के रिकॉर्ड की बराबरी की है | टीम इंडिया के टेस्ट कप्तान विराट कोहली का हर तरफ जलवा है. पूरी दुनियां उनकी बल्लेबाजी की कायल है. कोहली ने जब से भारतीय टेस्ट टीम की कमान संभाली है. तब से अबतक भारतीय टीम ने नई इबारतें लिखने में कामयाब रही हैं. कोहली को एडीलेड में 9 दिसंबर 2014 में भारतीय टेस्ट टीम की कमान सौंपी थी. विराट कोहली को भारतीय टेस्ट टीम का कप्तान बने उन्हें पूरे दो साल हो गए हैं कोहली की कप्तानी में भारत ने 20 में से 12 टेस्ट मैचों में जीत दर्ज की है, जबकि 2 में उसे हार मिली है और 6 मुकाबले ड्रॉ रहे हैं. कोहली को मैदान पर उनके आक्रमक रवैये के लिए जाना जाता है | कोहली की कप्तानी में कहीं से भी पूर्व कप्तान राहुल द्रविड़ और एम.एस.धोनी की कप्तानी की झलक नहीं मिलती | कोहली का कप्तानी स्टाइल काफी हदतक सौरव गांगुली से मिलता –जुलता है | जो आक्रमक और उत्साहित क्रिकेट खेलने में विश्वास रखते हैं | जबकि मौजूदा भात-इंग्लैंड टेस्ट सीरीज में भी कोहली की कप्तानी सूझबूझ की काफी तारीफ हुई | खासतौर से जिस तरीके से कोहली ने अपने गेंदबाजों का इस्तेमाल किया और आक्रमक फील्ड प्लेसमेंट के दमपर अंग्रेज बल्लेबाजों का अच्छा खासा परेशान किया | लेकिन इस सबके बावजूद क्रिकेट कंमटेटर्स ने कोहली की कुछ ऐसी गलतियों की आलोचना भी की जिसकी वजह से मैच भारत की पकड़ से दूर जा सकता था | अब आगे आने वाले समय में कोहली को इन गलतियों से सीखना होगा साथ ही वो इस मामले में थोड़े लकी भी रहे कि उनकी गलतियों का खामियाजा टीम इंडिया को हार के साथ नहीं चुकाना पडा | नहीं तो ये गलती टीम इंडिया को काफी भारी पड़ सकती थी | लेकिन अब विराट कोहली को इस गलती पर बेहतर तरीके से काम करने की जरूरत है, खासकर विदेशों में कोहली पूरी प्लानिंग के साथ उतरना होगा क्योंकि तब यही छोट-छोटी गलतियां हार और जीत के बीच का बड़ा अंतर साबित हो सकती हैं | अब हम आपको वो पाँच उदाहरण देंगे जब भारत-इंग्लैंड टेस्ट सीरीज के दौरान कोहली की कप्तानी ने क्रिकेट पंडितों को नकारात्मक तरीके से हैरान किया | अस्वीकरण : ध्यान रहे, ये कोहली की कप्तानी की सिर्फ शुरूआत भर है और उनको गाइड करने के लिए उनके साथ खुद अनिल कुंबले जैसे दिग्गज खड़े हैं, जिसका मतलब ये है कि समय के साथ कोहली और ज्यादा बेहतर होते चले जाएंगे | उनकी कप्तानी में शुरुआती दिन हैं और समय के साथ बेहतर वो और होगा | #1 स्टैगर्ड स्लिप ajinkya-rahane-fielding-1480849911-800 आजकल टेस्ट क्रिकेट में इसका प्रचलन है और कोहली ने भी इसे अच्छे से अपनाया है | कोहली हमेशा मैदान मारने के जज्बे के साथ ही उतरते हैं | मौजूदा सीरीज में उमेश यादव और मोहम्मद शमी अच्छी गेंदबाजी कर रहे हैं | गेंद को स्विंग कर बल्लेबाजों को आउट करने के मौके बनाते हैं, लेकिन कोहली ऐसी गेंदों को नजरअंदाज करते हैं जो गली तक आती हैं वो स्लिप को ज्यादा महत्व देते हैं | कई बार कोहली ने अपरंपरागत स्लिप भी लगाई है, पहली स्लिप के बिना दूसरी स्लिप लगाई | सबसे पहले तो पहली स्लिप को हटाकर दूसरी स्लिप रखने के पीछे कोई वाजिब वजह नजर नहीं आती, जहां टेस्ट में बल्लेबाज मारने के लिए एज में जाएगा, जबकि पहली स्लिप रखने से बल्लेबाज जोर से हिट करता है | दूसरी बात ये है कि भारतीय विकेटकीपर क्वांटन डी कॉक और मैथ्यू वेड की तरह डाइव नहीं लगा पाते | वहीं भारतीय स्लिप घेरे में अजिंक्य रहाणे को छोड़कर किसी पर भी भरोसा नहीं किया जा सकता | इसका मतलब है कि विकेटकीपर के बाद फर्स्ट स्लिप ना होने की वजह से कैच करने मौके गंवा दिए जाते हैं | लिहाजा गेंदबाज जो मौके बनाता है वो होना या ना होना एक ही बराबर है | और इस तरीके से मौके बर्बाद करना का मनोवैज्ञानिक असर गेंदबाज पर भी बहुत गहरा पड़ेगा |
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Published 12 Dec 2016
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