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5 ऐसे कारण जिनकी वजह से 90 के क्रिकेटर वर्तमान भारतीय क्रिकेट टीम को खूब पसंद करेंगे

SENIOR ANALYST
Modified 22 Nov 2016, 23:48 IST
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समय के साथ खेलों में भी काफी बदलाव आ गए हैं। इसी वजह से हम खेलों को और भी ज्यादा पसंद करते हैं। दिन और उम्र में इसका असर दिखता भी है। भारतीय क्रिकेट टीम में भी पिछले 25 सालों में काफी बदलाव हुए हैं। युवा कप्तान विराट कोहली की अगुवाई में भारतीय टीम अभी इंग्लैंड के खिलाफ जिस तरह से टेस्ट सीरीज में प्रदर्शन कर रही है, उसे देखकर 90 के क्रिकेटर काफी खुश हो रहे होंगे, क्योंकि 90 का दशक भारतीय क्रिकेट टीम का सबसे कठिन दौर था। ये सही है कि भारतीय टीम अब काफी मजबूत हो गई है, लेकिन अगर इतिहास को देखें तो भारतीय टीम ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका जैसी मजबूत टीमों से काफी पीछे थी। लेकिन  दर्शकों की भारी तादाद और क्रिकेट के बड़े बाजार की वजह से पिछले 2 दशक में भारतीय क्रिकेट टीम और बोर्ड में अभूतपूर्व परिवर्तन हुए हैं। खिलाड़ियों का बॉडी लैंग्वेज, और उनके एट्टीट्यूड में काफी बदलाव आ गए हैं। भारतीय टीम अब केवल जीत के लिए खेलती है खासकर घरेलू पिचों पर भारतीय टीम और भी खतरनाक हो जाती है। आइए जानते हैं 5 ऐसे ही बदलाव के बारे में जो पिछले 25 सालों में भारतीय टीम में हुए-



  1. फील्डिंग का स्तर काफी ऊंचा हो गया है, खासकर गेंदबाजों का-

field umesh

विशाखापट्टनम टेस्ट के दूसरे दिन ऑफ स्पिनर जयंत यादव तेजी से गेंद का पीछा कर डाइव लगाकर गेंद को उठाते हैं और हवा में छलांग लगाकर तुरंत स्क्वायर लेग से विकेटकीपर को थ्रो करते हैं, विकेटकीपर साहा गेंद को स्टंप के आगे जाकर पकड़ते हैं और गिल्लियां बिखेर देते हैं।  जयंत यादव की इस शानदार फील्डिंग की वजह से इंग्लैंड के ओपनर हसीब हमीद का विकेट भारत को मिलता है। उस समय तक इंग्लैंड की स्थिति काफी मजबूत थी। हमीद और जोए रुट इंग्लैंड की पारी को अच्छे से आगे बढ़ा रहे थे, लेकिन हमीद का विकेट गिरने के बाद पूरा खेल ही बदल गया। इस विकेट के साथ भारत मैच में आ गया और धीरे-धीरे इंग्लैंड की स्थिति कमजोर होती गई और अंत में भारत ने इंग्लैंड को 246 रनों के बड़े अंतर से हराया। भारत के दोनों तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी और उमेश यादव भी शानदार फील्डिंग कर रहे हैं। उमेश यादव बेहतरीन एथलीट हैं और मैदान के हर कोने में डाइव लगाने से नहीं चूकते हैं वहीं बात अगर की जाए रवींद्र जाडेजा की तो वो दुनिया के बेहतरीन फील्डरों में शुमार किए जाते हैं। भारतीय गेंदबाजों में रविच्रंदन अश्विन ही केवल एकमात्र गेंदबाज हैं जो फील्ड पर धीमे हैं। लेकिन 90 के दशक के गेंदबाजों से वे ज्यादा तेज हैं। इसी वजह से भारतीय टीम की फील्डिंग आजकल काफी मजबूत मानी जाती है।
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Published 22 Nov 2016, 23:48 IST
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