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5 ऐसे मौके जब भारतीय टीम वनडे में करीबी अंतर से हारी है

Modified 25 Jan 2017
क्रिकेट में जबतक आखिरी गेंद न फेंक दी जाये तबतक आप परिणाम की घोषणा नहीं कर सकते हैं। वनडे में हाल ही में ईडन गार्डन में भारत और इंग्लैंड के बीच हुए मुकाबले में ऐसा ही देखने को मिला है। भारत इंग्लैंड के दिए 321 रन के लक्ष्य का पीछा कर रहा था। आखिरी ओवर में जीत के लिए टीम इंडिया को 16 रन बनाने थे। क्रीज पर केदार जाधव थे। सामने गेंदबाज़ क्रिस वोक्स थे। पहली गेंद पर छक्का और दूसरी पर चौका जड़ने के बाद आखिरी 4 गेंदों पर भारत को जीत के लिए 6 रन बनाने थे। क्रिस वोक्स ने दो गेंदें डॉट फेंक दी। जिसके बाद समीकरण बदल गया। उसके बाद जाधव ने शॉट तो बड़ा ही खेला लेकिन वह सीमा रेखा पर पकड़ लिए गये। अब आखिरी गेंद पर 6 रन और स्ट्राइक पर थे भुवनेश्वर कुमार जो गेंद और बल्ले का कांटेक्ट ही नहीं करवा पाए और भारत ये मुकाबला 5 रन से हार गया। सीरिज भारत ने 2-1 से जीती लेकिन इंग्लैंड ने इस मुकाबले को जीतकर अपनी लाज बचा ली। आइये आज हम आपको ऐसे ही 5 मुकाबलों के बारे में बता रहे हैं, जिसमें भारत बहुत मामूली अंतर से हारा है: 17 अगस्त 1997: कोलम्बो में भारत 2 रन से श्रीलंका से हारा था  ये मैच भारतीयों के लिए दिल तोड़ने वाला था। टॉस जीतकर फील्डिंग करने उतरी भारतीय टीम के खिलाफ श्रीलंका ने बेहतरीन शुरुआत की। जयसूर्या और अट्टापट्टू ने पहले विकेट के लिए 91 रन बनाये थे। जयसूर्या के आउट होने के बाद अट्टापट्टू ने शतकीय पारी खेली इस दौरान रोशन महानामा ने उनका पूरा साथ दिया था। उसके बाद अरविन्द डीसिल्वा और अर्जुन रणतुंगा ने श्रीलंका को 302 रन तक पहुंचा दिया। भारतीय टीम शुरू से ही परेशानी में रही और 64 रन पर 4 विकेट आउट हो गये थे। मोहम्मद अजहरुद्दीन और अजय जडेजा ने शतकीय पारी खेलते हुए भारतीय पारी को उबारने का काम किया। दोनों ने मिलकर 223 रन की साझेदारी निभाई। हालांकि ये पर्याप्त नहीं था और भारतीय टीम 2 रन से मुकाबला हार गयी।
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Published 25 Jan 2017
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