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5 ट्रॉफी जिसके लिए भारत हमेशा एमएस धोनी का आभारी रहेगा

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Modified 08 Jan 2017

अगर जॉर्ज आरआर मार्टिन को अनिश्चितता के मामले में कोई हरा सकता है तो वो और कोई नहीं बल्कि अपने भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी हैं। धोनी ने हमेशा वही किया जो वो करते आए हैं- शांत रहकर देश के लिए सर्वश्रेष्ठ काम किया। वह पहले भी कई बार कप्तान के रूप में दमदार अंदाज में मैदान में उतरे हैं। मगर अब उन्होंने कप्तानी छोड़ दी- वो भी जब तब धोनी ने पाया कि उनकी जगह कप्तानी के लिए सही विकल्प उपलब्ध है और चैंपियंस ट्रॉफी शुरू होने में अभी एक वर्ष का समय भी है, जिससे भारत 2019 में होने वाले विश्व कप की तैयारियां अच्छे से कर सकता है। धोनी ने अपनी जगह भी खतरे में डाल दी है, उन्होंने अपने आप को विशेषज्ञ विकेटकीपर बल्लेबाज के रूप में उपलब्ध रखने की बात कही है। इससे चयनकर्ताओं के दिमाग में भी उलझन पैदा हो गई है कि क्या धोनी 2019 विश्व कप तक खेलेंगे या फिर वह पहले ही संन्यास लेंगे। या फिर उन्हें अब ऋषभ पंत को आजमाना चाहिए ताकि 2019 विश्व कप से पहले उन्हें अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट की अच्छे से समझ हो जाए। मगर यह बहस किसी और दिन की जा सकती है। भारत को शायद मैदान पर धोनी जैसा और कोई कप्तान नहीं मिलेगा। धोनी ने हर वो चीज जीती जो क्रिकेट कप्तान के लिए बहुत ही मायने रखती है। वह विश्व के एकमात्र कप्तान है जिन्होंने आईसीसी टेस्ट मेस, आईसीसी एकदिवसीय विश्व कप, आईसीसी टी20 विश्व कप और चैंपियंस ट्रॉफी जीती। यह कल्पना करना भी मुश्किल है कि कोई और कप्तान इतनी बड़ी उपलब्धि हासिल कर पाएगा या नहीं। यह उपलब्धि धोनी की अलग सोच के कारण मिली। हम खेल के छोटे प्रारूपों में धोनी की 5 सबसे बड़ी ट्रॉफी के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसके लिए भारत हमेशा उनका आभारी रहेगा :


#5 2011 आईसीसी एकदिवसीय विश्व कप, भारत

Winning Captain

इयान चैपल ने धोनी को पिछले 30 वर्षों में क्रिकेट का सबसे शानदार लीडर करार देते हुए इस टूर्नामेंट का जानदार अंत किया। चैपल ने कहा कि धोनी ने उस टीम से सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन निकाला जिसका गेंदबाजी आक्रमण ज्यादा मजबूत नहीं था, जो कि किसी भी एकदिवसीय टीम का सबसे बेहतर पहलू होता है। धोनी की कप्तानी में भारत पहली टीम बनी, जिसने अपने देश में ख़िताब जीता हो। धोनी ने ऐसा लगातार बदलते गेंदबाजी क्रम के साथ किया। सिर्फ ज़हीर की लगातार मैच खेले जबकि पियूष चावला के बाद अश्विन को आजमाया गया, युवराज ने वैकल्पिक गेंदबाज की भूमिका अदा की और नेहरा चोटिल होने के कारण फाइनल में नहीं खेल सके। इन सभी चुनौतियों से परे धोनी ने गौतम गंभीर के साथ फाइनल में दबावभरे मुकाबले में शानदार पारी खेलकर भारत को विश्व चैंपियन बनाया। धोनी की यह पारी महत्व और परिस्थिति को देखते हुए सर्वकालिक महान एकदिवसीय पारियों के शीर्ष 10 में शामिल हुई। लीग चरण में भारत को दक्षिण अफ्रीका से शिकस्त झेलना पड़ी जबकि इंग्लैंड के खिलाफ बड़े स्कोर के बावजूद मुकाबला ड्रॉ रहा। मगर टीम ने सही समय पर लय हासिल की और ऑस्ट्रेलिया, पाकिस्तान के बाद फाइनल में श्रीलंका को हराकर ख़िताब जीत लिया। धोनी ने अंत के लिए अपना विशेष प्रदर्शन सुरक्षित कर रखा था। वानखेड़े के छोटे मैदान पर बल्लेबाजों के लिए मददगार पिच के संसाधनों का धोनी ने बखूबी इस्तेमाल किया, जहां श्रीलंका उन्हें हरा सकता था, लेकिन ऐसा हो नहीं सका। एक जेंटलमैन जैसे धोनी ने संगकारा को जाने दिया जबकि पहली बार वह टॉस गंवा चुके थे। उनका सबसे भावनात्मक पल पूरे टूर्नामेंट के दौरान सिर्फ एक बार देखने को मिला जब फाइनल में श्रीलंका के खिलाफ एक चुनौतीपूर्ण लेने गए। धोनी ने गुस्से में बल्ला अपने पेड पर मारा। युवराज से ऊपर अपने आप को तरजीह देते हुए मुरलीधरन का सामना करने का कारण देकर धोनी ने कई आलोचनाओं को दावत दी थी- ऐसे हैं आपके और हमारे धोनी।
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Published 08 Jan 2017
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